✍️ विशेष संवाददाता•Published On 12th Sept, 2026 @ 11:28 AM
सतना मुख्यालय और तराई क्षेत्र में शुक्रवार रात हुई बारिश के बाद चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर शनिवार सुबह फिर बढ़ता दिखाई दिया। रामघाट समेत कई घाटों की सीढ़ियां पानी में डूब गईं। जलस्तर में बढ़ोतरी को देखते हुए मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश प्रशासन ने घाटों पर बैरिकेडिंग कर लोगों की आवाजाही सीमित कर दी है। हालिया बाढ़ के बाद नदी के दोबारा बढ़ते जलस्तर पर प्रशासन लगातार नजर रख रहा है।
चित्रकूट। सतना मुख्यालय और तराई क्षेत्र में शुक्रवार रात हुई तेज बारिश के बाद चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है। शनिवार सुबह तक नदी के पानी में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई। रामघाट समेत आसपास के घाटों की कई सीढ़ियां पानी में डूब गईं। नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है।
घाटों पर बैरिकेडिंग कर लोगों को निचले हिस्सों में जाने से रोका जा रहा है। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों से नदी के किनारे नहीं जाने की अपील की गई है। घाट किनारे कारोबार करने वाले दुकानदारों को भी बढ़ते पानी को देखते हुए अपना सामान सुरक्षित स्थान पर रखने की सलाह दी गई है।
रामघाट की सीढ़ियां फिर पानी में डूबीं
शुक्रवार रात हुई बारिश के बाद मंदाकिनी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हुई। शनिवार सुबह रामघाट समेत दूसरे घाटों पर नदी का पानी सीढ़ियों तक पहुंच गया। जलस्तर बढ़ने के साथ घाटों के निचले हिस्से में आवाजाही जोखिम भरी हो गई है।
प्रशासन ने एहतियात के तौर पर घाटों पर बैरिकेडिंग कर दी है। लोगों को बैरिकेड के आगे जाकर नदी के करीब पहुंचने से रोका जा रहा है। हाल ही में चित्रकूट में मंदाकिनी के उफान के दौरान रामघाट और आसपास के इलाकों में बाढ़ की गंभीर स्थिति बन चुकी है। सितंबर की शुरुआत में नदी खतरे के निशान से कई मीटर ऊपर पहुंच गई थी और रामघाट समेत निचले इलाकों में पानी भर गया था।
खतरे के निशान से करीब 3 मीटर नीचे जलस्तर
फिलहाल राहत की बात यह है कि उपलब्ध स्थानीय जानकारी के अनुसार मंदाकिनी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 3 मीटर नीचे है। हालांकि, रातभर हुई बारिश के बाद पानी के तेजी से बढ़ने को देखते हुए प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
यह सावधानी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कुछ दिनों में मंदाकिनी ने कई बार तेज उफान का रूप लिया है। अगस्त के अंत और सितंबर की शुरुआत में नदी का जलस्तर खतरे के निशान से कई मीटर ऊपर पहुंच गया था और रामघाट के आसपास बड़ी संख्या में घर और दुकानें प्रभावित हुई थीं।
घाटों पर बैरिकेडिंग, श्रद्धालुओं को रोका
जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन ने घाटों पर बैरिकेडिंग कर दी है। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को निचले हिस्सों में जाने से रोका जा रहा है। प्रशासन की ओर से नदी के बहाव और जलस्तर को देखते हुए सावधानी बरतने की अपील की गई है।
घाट किनारे मौजूद दुकानदारों को भी सामान सुरक्षित जगह पर रखने के निर्देश दिए गए हैं। नदी का पानी और बढ़ने की स्थिति में दुकानों और घाट से लगे दूसरे स्थानों पर नुकसान की आशंका को देखते हुए प्रशासन पहले से तैयारी कर रहा है।
पिछली बाढ़ के बाद फिर बढ़ा पानी
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर इस मानसून में कई बार तेजी से बढ़ चुका है। अगस्त के अंतिम सप्ताह में भारी बारिश के बाद नदी ने विकराल रूप ले लिया था। रामघाट के आसपास बड़ी संख्या में मकान और दुकानें जलमग्न हुई थीं। पानी उतरने के बाद बाढ़ से हुए नुकसान की तस्वीरें भी सामने आई थीं।
ऐसे में नदी का जलस्तर दोबारा बढ़ने से घाट क्षेत्र में रहने और कारोबार करने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल निचले इलाकों में लोगों की आवाजाही रोकने और जलस्तर की लगातार निगरानी करने की है।
सतना में बदला मौसम, रात में तेज बारिश
शुक्रवार को सतना और आसपास के इलाकों में दिनभर मौसम में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। दिन में बादल और धूप का दौर चलता रहा। शाम के बाद मौसम ने करवट ली और बारिश शुरू हुई। रात करीब 11:30 बजे के बाद तेज बारिश हुई, जो रुक-रुककर रातभर जारी रहने की जानकारी है।
24 घंटे में आधा इंच से अधिक बारिश दर्ज होने की स्थानीय जानकारी है। बारिश से उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिली, लेकिन तराई क्षेत्र और मंदाकिनी के जलस्तर पर इसका असर दिखाई दिया।
मौसम सिस्टम क्या कहता है?
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार 10 सितंबर को उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी और आसपास के क्षेत्र में कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ था और इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण ऊंचाई तक फैला था। मौसम प्रणाली के प्रभाव से मध्य और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बनी हुई हैं।
IMD के भोपाल केंद्र ने 10 सितंबर को जारी चेतावनी में 12 सितंबर के लिए पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी बारिश की संभावना जताई थी। इसके अलावा गरज-चमक और आंधी जैसी मौसम गतिविधियों की भी चेतावनी दी गई थी।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसम प्रणाली और मानसूनी गतिविधि के प्रभाव से मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। ऐसे में चित्रकूट और आसपास के जलग्रहण क्षेत्रों में होने वाली बारिश का असर मंदाकिनी के जलस्तर पर भी पड़ सकता है।
प्रशासन की नजर अब जलस्तर पर
मंदाकिनी के जलस्तर में दोबारा बढ़ोतरी को देखते हुए प्रशासन नदी और घाट क्षेत्र की निगरानी कर रहा है। फिलहाल लोगों को सावधानी बरतने और बैरिकेडिंग वाले हिस्से से आगे नहीं जाने की सलाह दी गई है।
यदि ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में बारिश जारी रहती है और नदी का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा, तो घाटों के आसपास निचले इलाकों में पानी पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए प्रशासन के साथ स्थानीय लोगों और दुकानदारों को भी सतर्क रहने की जरूरत है।
अभी राहत, लेकिन निगरानी जरूरी
फिलहाल मंदाकिनी का जलस्तर उपलब्ध जानकारी के अनुसार खतरे के निशान से नीचे है, इसलिए स्थिति को तत्काल बाढ़ की स्थिति नहीं माना जा रहा है। लेकिन पिछले दिनों नदी में आई तेज बाढ़ और अब दोबारा हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए प्रशासन की सतर्कता जरूरी है।
श्रद्धालुओं और पर्यटकों को नदी के किनारे जाने से बचने तथा प्रशासन की ओर से लगाए गए बैरिकेड और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।