कहानी क्या है?
फिल्म की शुरुआत Mirzapur की उसी दुनिया से होती है जिसे दर्शक पहले से जानते हैं—हथियार, अपराध, सत्ता और डर। Kaleen Bhaiya अब भी Mirzapur के सबसे बड़े Power Centre हैं। उनके लिए सत्ता सिर्फ ताकत का सवाल नहीं, बल्कि डर पैदा करने और उसे बनाए रखने का खेल है। दूसरी ओर Guddu और Bablu उनकी Criminal Machinery का हिस्सा बन चुके हैं।
यहीं से कहानी में नया मोड़ आता है। Ravi Kishan का Babban “Babua” Yadav इस दुनिया में एक नए Challenger के रूप में प्रवेश करता है। Jaisalmer से जुड़े इस नए Player की नजर Mirzapur की सत्ता पर है। उसका सामना सीधे Kaleen Bhaiya से है और यही संघर्ष फिल्म के मुख्य Narrative को आगे बढ़ाता है।
Babban को Mirzapur की Power Structure समझने के लिए पुराने Players और उनके रिश्तों की जानकारी चाहिए। इसी बहाने फिल्म दर्शकों को Kaleen Bhaiya, Munna, Guddu, Bablu और दूसरे Characters के बीच चल रहे पुराने तनावों की तरफ वापस ले जाती है। Babban का सफर धीरे-धीरे एक ऐसे Power Game में बदलता है जहां दोस्ती, दुश्मनी, परिवार और Business—सब एक-दूसरे में घुल जाते हैं।
Kaleen Bhaiya बनाम Babban Yadav
फिल्म का सबसे नया और दिलचस्प Conflict Kaleen Bhaiya और Babban Yadav के बीच है। Pankaj Tripathi एक बार फिर उसी शांत लेकिन खतरनाक अंदाज में Kaleen Bhaiya को निभाते हैं, जिसमें Character को अपनी ताकत साबित करने के लिए लगातार चीखने या गोली चलाने की जरूरत नहीं पड़ती।
Babban के रूप में Ravi Kishan फिल्म में नई ऊर्जा लेकर आते हैं। कई Reviews में उन्हें फिल्म के मजबूत नए Additions में गिना गया है। उनका Character सिर्फ एक और Gangster नहीं लगता, बल्कि वह Kaleen Bhaiya की स्थापित सत्ता को चुनौती देने वाला ऐसा Player है जो अपने तरीके से Game खेलना चाहता है।
Munna Bhaiya की वापसी सबसे बड़ा Fan Moment?
अगर Mirzapur Fans के लिए फिल्म की सबसे बड़ी वजह तलाशनी हो तो Munna Bhaiya का नाम सबसे ऊपर आएगा। Divyenndu की वापसी शुरुआती Shows में जबरदस्त प्रतिक्रिया का कारण बनी है। उनके Character में वही Arrogance, Impulsiveness, Dark Humour और अचानक Violence का मिश्रण दिखाई देता है जिसने Munna को Franchise के सबसे यादगार Characters में बनाया था।
Critics ने भी Divyenndu के Performance को फिल्म की प्रमुख ताकत माना है। Hindustan Times के Review के अनुसार शुरुआती Show में Munna के प्रवेश और उनके Scenes पर दर्शकों की खास प्रतिक्रिया देखने को मिली। India Today और अन्य शुरुआती Audience Reports में भी Divyenndu की वापसी को बड़ा Highlight बताया गया है।
Guddu Pandit के रूप में Ali Fazal
Ali Fazal के लिए Guddu Pandit अब नया Character नहीं है, लेकिन बड़े पर्दे पर इस Character की Energy अलग महसूस होती है। Guddu अब सिर्फ बदला लेने वाला आदमी नहीं है; वह सत्ता और हिंसा के उस रास्ते पर आगे बढ़ चुका है जिसे उसने शुरुआत में शायद खुद नहीं चुना था।
फिल्म में Guddu के Action और Character Moments को Audience से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। खासकर Climax की ओर Ali Fazal को मिलने वाले Mass Moments फिल्म के प्रभाव को बढ़ाते हैं। Rediff की Review में भी Climax के एक Guddu Moment को दर्शकों की जोरदार प्रतिक्रिया मिलने की बात कही गई है।
Bablu Pandit और सबसे बड़ा Casting Change
फिल्म का एक बड़ा बदलाव Bablu Pandit के Character में Casting Change है। पहले Season में Bablu का किरदार Vikrant Massey ने निभाया था, जबकि फिल्म में यह भूमिका Jitendra Kumar ने निभाई है।
यह बदलाव स्वाभाविक रूप से तुलना पैदा करता है। Bollywood Hungama ने Jitendra Kumar के Performance को स्वीकार करते हुए माना कि उन्होंने Character में खुद को सहजता से स्थापित किया है। दूसरी तरफ Scroll और PeepingMoon जैसी Reviews में Vikrant Massey की कमी महसूस होने की बात कही गई है। Indian Express ने भी माना कि शुरुआत में Jitendra Kumar को Vikrant की जगह देखना थोड़ा असामान्य लगता है, हालांकि समय के साथ Performance अपना अलग स्थान बनाता है।
Beena Tripathi और महिला Characters को कितना Space?
Rasika Dugal की Beena Tripathi फिल्म में महत्वपूर्ण मौजूदगी रखती हैं, लेकिन Critics की एक बड़ी आपत्ति यह है कि महिला Characters को उतना Screen Time नहीं दिया गया जितना उनके Potential के हिसाब से दिया जा सकता था। Indian Express ने भी फिल्म में महिला Characters की भूमिका को सीमित बताया है।
फिर भी Beena का Character Mirzapur की Power Politics में दिलचस्प बना रहता है। वह सिर्फ किसी पुरुष Character की पत्नी या प्रेमिका नहीं है, बल्कि अपने अस्तित्व और सत्ता के लिए अलग रणनीति रखने वाली महिला है। Sheeba Chaddha को भी Critics ने छोटे लेकिन प्रभावी Role में सराहा है।
क्या फिल्म की कहानी मजबूत है?
यहीं पर Critics की राय सबसे ज्यादा बंटी हुई है। कुछ Reviews के अनुसार फिल्म में पर्याप्त नया Material है और यह सिर्फ Web Series के पुराने Scenes को जोड़कर बनाई गई फिल्म नहीं लगती। Bollywood Hungama ने इसे Power और Ambition पर आधारित Mass Entertainer बताया है, जबकि Hindustan Times ने भी इसे बड़े पर्दे के लिए प्रभावी Companion Piece माना है।
लेकिन दूसरी तरफ NDTV और Indian Express ने फिल्म की लंबाई और Narrative Structure पर सवाल उठाए हैं। NDTV ने फिल्म को 2.5/5 देते हुए इसे कई जगह Predictable माना, जबकि Indian Express ने 3/5 देते हुए कहा कि 197 मिनट की Runtime कुछ हिस्सों में महसूस होती है।
यानी कहानी पूरी तरह कमजोर नहीं है, लेकिन Screenplay को और Tight किया जा सकता था। फिल्म में कई बड़े Moments हैं, मगर उनके बीच का सफर हर जगह उतना तेज नहीं है।
First Half कैसा है?
First Half में फिल्म धीरे-धीरे अपनी दुनिया स्थापित करती है। पुराने Characters की वापसी और Babban Yadav के आने से नया Conflict तैयार होता है। Mirzapur Fans के लिए यह हिस्सा Nostalgia और Familiarity से भरपूर है, लेकिन नए दर्शक कुछ जगहों पर Character Relationships को समझने में समय ले सकते हैं।
कुछ Audience Reactions में First Half को धीमा और कुछ हिस्सों को ज्यादा Explained बताया गया है। वहीं अन्य दर्शकों ने शुरुआती हिस्से के Character Moments और Confrontations की तारीफ की है। इसलिए First Half का Experience इस बात पर काफी निर्भर करता है कि दर्शक Mirzapur Universe से कितना परिचित है।
Second Half और Climax में असली भौकाल?
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत उसके Pre-Climax और Climax में दिखाई देती है। Jaisalmer के Sand Dunes में शूट किए गए हिस्से फिल्म को Visual Scale देते हैं और कई Reviews ने माना है कि फिल्म का अंतिम हिस्सा उसके पहले के धीमे हिस्सों की भरपाई करता है।
Taran Adarsh की शुरुआती प्रतिक्रिया में भी फिल्म के दूसरे हिस्से की शुरुआत में Dip का जिक्र है, लेकिन Pre-Climax से Climax तक Jaisalmer के Visuals और Action को उन्होंने बेहद प्रभावी बताया।
यही वह हिस्सा है जहां Film अपनी OTT पहचान से बाहर निकलकर एक बड़े Screen Experience की तरह काम करती है। Betrayal, Rivalry, Unexpected Team-Ups और Mass Moments Climax को ज्यादा प्रभावी बनाते हैं।
Action और Violence
Mirzapur से किसी ने Family Drama की उम्मीद नहीं की थी। फिल्म में Guns, Fights, Crime और Violence मौजूद हैं, हालांकि कुछ Critics के अनुसार यह Violence केवल Shock Value पैदा करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया गया है।
बड़े पर्दे पर Action को ज्यादा Scale दिया गया है और Real Locations का इस्तेमाल फिल्म की Authenticity बढ़ाता है। Hindustan Times ने भी फिल्म के Larger-than-Life Action और Real Locations की तारीफ की है।
Dialogues और Humour
Mirzapur की पहचान सिर्फ कहानी नहीं बल्कि उसके Dialogues भी रहे हैं। फिल्म पुराने लोकप्रिय Dialogues और नए One-Liners दोनों का इस्तेमाल करती है। कई Fan Reactions में Dialogues को Whistle-Worthy बताया गया है।
Munna और Kaleen Bhaiya को सबसे ज्यादा Fan-Service Moments मिलते हैं। Black Humour भी फिल्म की Tone को हल्का बनाए रखने में मदद करता है, खासकर उन हिस्सों में जहां लगातार Crime और Violence का माहौल है।
Music और Background Score
Music इस फिल्म का सबसे बड़ा Selling Point नहीं है। Reviews के अनुसार फिल्म में Songs की संख्या सीमित है और Original Series का Vaaroon भी इस्तेमाल किया गया है। Sonal Chauhan से जुड़ा नया Song कहानी में शामिल है, लेकिन कुछ Critics ने इसे फिल्म की जरूरत की तुलना में कमजोर हिस्सा माना है।
इसके मुकाबले Background Score को Audience Reactions में ज्यादा सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। Mass Scenes और Climax में Sound Design तथा Background Score फिल्म के बड़े पर्दे वाले प्रभाव को बढ़ाते हैं।
क्या 3 घंटे 17 मिनट की Runtime ज्यादा है?
हां, यही फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी है। फिल्म की Approved Runtime 197 मिनट 19 सेकंड है। यानी दर्शक को तीन घंटे से ज्यादा समय Cinema Hall में बिताना होगा।
कुछ Critics को यह Runtime उचित लगी क्योंकि फिल्म में पर्याप्त Characters और Subplots हैं, लेकिन Indian Express, NDTV और Moneycontrol जैसी Reviews में Pacing तथा Overlong Screenplay को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
Moneycontrol का निष्कर्ष भी इसी तरफ जाता है—फिल्म के Action और Character Moments काम करते हैं, लेकिन एक ज्यादा Tight Edit इसे काफी बेहतर बना सकता था।
Critics का Verdict: कितने Stars?
- NDTV — 2.5/5: फिल्म में Scale और Action है, लेकिन कहानी कई जगह Predictable और फिल्म जरूरत से ज्यादा फैली हुई लगती है।
- Indian Express — 3/5: Pankaj Tripathi की वापसी और कुछ शानदार Moments के बावजूद Runtime और कुछ Flabby हिस्से परेशानी पैदा करते हैं।
- Moneycontrol — 3/5: Performances और Action मजबूत, लेकिन Screenplay Overstretched है।
- Filmfare — 3.5/5: इसे Series का अच्छा Companion Piece माना गया है।
- Bollywood Hungama — 4/5: फिल्म को Paisa Vasool Big-Screen Entertainer और Mass Moments से भरपूर बताया गया है।
- Hindustan Times — 4/5: बड़े पर्दे पर Scale, Performances और Fan-Service को मजबूत पक्ष माना गया है।
Audience क्या कह रही है?
Release Day पर सामने आई शुरुआती Audience Reactions को देखें तो फिल्म का Fan Response काफी सकारात्मक है, लेकिन पूरी तरह एकतरफा नहीं है।
कई दर्शकों ने इसे “Full Bhaukaal” बताते हुए Action, Dialogues, Background Score, Munna Bhaiya और Ravi Kishan की तारीफ की है। कुछ Audience Reviews में इसे Series से भी ज्यादा Powerful और बड़े पर्दे के लिए बेहतर अनुभव बताया गया है।
वहीं दूसरी तरफ कुछ दर्शकों ने Screenplay के Drag होने, First Half की धीमी गति और जरूरत से ज्यादा Explanation की शिकायत की है। कुछ Reactions में फिल्म को Average भी बताया गया है। Reddit पर भी शुरुआती चर्चाओं में यही दो राय देखने को मिलती हैं—कुछ दर्शकों ने 4/5 जैसी प्रतिक्रिया दी, जबकि अन्य ने इसे Mid या Overstretched कहा।
क्या Mirzapur The Movie देखने से पहले Series देखना जरूरी है?
जरूरी तो नहीं, लेकिन बेहद Recommended है।
फिल्म को इस तरह बनाया गया है कि नए दर्शक भी इसकी Basic Story समझ सकें, लेकिन जिन लोगों ने Season 1 देखा है उन्हें Characters, Relationships, Dialogues और कई छोटे-छोटे References का ज्यादा मजा आएगा।
खासकर Kaleen Bhaiya, Munna, Guddu, Bablu और Beena के पुराने रिश्तों को जानना फिल्म के Emotional और Political Context को ज्यादा प्रभावी बनाता है।
क्या Family के साथ देख सकते हैं?
नहीं। फिल्म को CBFC ने A Certificate दिया है। Certification के दौरान कुछ Intimate Scenes में कट और कुछ Cuss Words में बदलाव किए गए, लेकिन फिल्म की Adult और Violent Nature बरकरार है। इसका Approved Runtime 3 घंटे 17 मिनट 19 सेकंड है।
Post-Credit Scenes हैं?
हाँ। शुरुआती Reviews के अनुसार फिल्म में दो Post-Credit Scenes हैं और इन्हें Franchise के संभावित भविष्य की ओर संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इसलिए Fans के लिए Credits शुरू होते ही Theatre छोड़ना सही नहीं होगा।
Final Verdict: देखनी चाहिए या नहीं?
अगर आप Mirzapur के पुराने Fan हैं, तो हां—Theatre में देखने लायक है।
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी Story की मौलिकता से ज्यादा उसका Mirzapur Experience है। Kaleen Bhaiya की मौजूदगी, Munna Bhaiya की वापसी, Guddu का Attitude, Ravi Kishan का Babban Yadav, पुराने Dialogues, Black Humour और बड़ा Action—ये सब मिलकर Fans को वह स्वाद देते हैं जिसके लिए वे आए हैं।
लेकिन अगर आप एक बिल्कुल नई, लगातार तेज और Tight Crime Thriller की उम्मीद लेकर जा रहे हैं, तो 3 घंटे 17 मिनट की Runtime और कुछ धीमे हिस्से आपको परेशान कर सकते हैं। फिल्म में कई जगह ऐसा लगता है कि कहानी को थोड़ा काटकर इसे ज्यादा प्रभावी बनाया जा सकता था।
इसलिए Mirzapur: The Movie को न तो “Masterpiece” कहना पूरी तरह सही होगा और न ही “फुसका बार” कहना। उपलब्ध Reviews और शुरुआती Audience Response को मिलाकर देखें तो यह एक Massy, Fan-Service Driven, अच्छी Performances और मजबूत Climax वाली लेकिन Overlong Crime Entertainer है।