मध्य प्रदेश के कटनी की निलंबित नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) नेहा पच्चीसिया इस समय एक गंभीर जमीन सौदे और पद के कथित दुरुपयोग से जुड़े मामले में पुलिस की पहुंच से बाहर हैं। 19 अगस्त 2026 को कुठला थाने में उनके खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद से पुलिस उनकी तलाश कर रही है। उनके साथ क्षितिज राज बारापात्रे और मारूफ अहमद हनफी को भी मामले में आरोपी बनाया गया है।
ताजा उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक 5 सितंबर तक नेहा पच्चीसिया की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। पुलिस ने तीनों आरोपियों पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है और विदेश भागने की आशंका को देखते हुए Look Out Circular की कार्रवाई भी की गई है। आठ सदस्यीय SIT और Cyber/Technical Teams लगातार उनकी तलाश में जुटी हैं।
क्या है पूरा जमीन सौदे का मामला?
मामला कटनी के कन्हवारा क्षेत्र की करीब 2.15 हेक्टेयर जमीन से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार जमीन का सौदा करीब ₹1.07 करोड़ में तय हुआ था। आरोप है कि Registry के दौरान परिवार को केवल ₹15 लाख का Cheque और करीब ₹3.20 लाख Cash दिया गया, जबकि बाकी रकम का भुगतान नहीं हुआ। Registry Documents में जमीन की कीमत ₹18.20 लाख दर्शाई गई।
जांच में Government Guideline Value करीब ₹82.86 लाख बताई गई। शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि परिवार पर पुलिस प्रभाव और दबाव का इस्तेमाल करके जमीन की Registry कराई गई। इन आरोपों की जांच SIT कर रही है और इन्हें अभी अदालत द्वारा सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
मर्डर केस से कैसे जुड़ा जमीन विवाद?
जमीन विवाद की पृष्ठभूमि में एक हत्या का मामला भी बताया गया है। जांच एजेंसियों के सामने शिकायत यह थी कि जमीन मालिक परिवार के सदस्य रमेश लोधी एक हत्या मामले में आरोपी थे। आरोप है कि इसी स्थिति का फायदा उठाकर परिवार पर जमीन बेचने के लिए दबाव बनाया गया।
मामले की जांच में यह पहलू भी सामने आया कि हत्या मामले में 90 दिन की वैधानिक समयसीमा के भीतर Charge Sheet दाखिल नहीं होने के कारण आरोपी को Default Bail मिली थी। इसके बाद जमीन सौदे को लेकर शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक पहुंची और वरिष्ठ अधिकारियों ने पूरे मामले की जांच शुरू की।
₹15 लाख के Transaction ने बढ़ाया संदेह
जांच में कथित Money Trail भी सामने आया है। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, जमीन खरीदने वाले मारूफ अहमद हनफी के खाते में Registry के दिन ₹15 लाख पहुंचे थे। जांच में इस रकम के एक हिस्से का संबंध क्षितिज राज बारापात्रे के खाते से बताया गया है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि जमीन की खरीद के पीछे वास्तविक Financial Arrangement क्या था और अलग-अलग आरोपियों की इसमें क्या भूमिका थी। यह सभी बातें जांच में सामने आए आरोप और तथ्यों पर आधारित हैं; अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होंगे।
19 अगस्त को FIR, फिर फरार हुए आरोपी
कटनी के कुठला थाने में 19 अगस्त को नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज बारापात्रे और मारूफ अहमद हनफी के खिलाफ FIR दर्ज की गई। रिपोर्टों के अनुसार मामले में Bharatiya Nyaya Sanhita की विभिन्न धाराओं के साथ धोखाधड़ी, दबाव और आपराधिक साजिश से जुड़े आरोप लगाए गए। बाद की जांच में Prevention of Corruption Act की धाराएं भी जोड़ी गईं।
FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों की तलाश शुरू की, लेकिन उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के अनुसार अब तक तीनों में से किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
सरकार ने अब तक क्या कार्रवाई की?
इस मामले में मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पहली बड़ी कार्रवाई नेहा पच्चीसिया का Suspension थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद उन्हें तत्काल Suspend किया गया। उन्हें Suspension Period में Police Headquarters, Bhopal से Attach किए जाने की जानकारी भी सामने आई। मुख्यमंत्री ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
सरकार और पुलिस की कार्रवाई की Timeline
| तारीख/समय |
कार्रवाई |
| जुलाई 2026 |
ट्रांसपोर्ट कारोबारी की कथित अवैध वसूली की शिकायत के बाद प्रारंभिक कार्रवाई शुरू हुई। |
| अगस्त 2026 के शुरुआती दिन |
नेहा पच्चीसिया से कुठला, माधवनगर और रंगनाथनगर थानों का प्रभार वापस लिया गया। |
| 11 अगस्त 2026 |
तीन थानों का प्रभार वापस लेने के SP के Administrative Order के खिलाफ उनकी High Court याचिका खारिज हुई। |
| 19 अगस्त 2026 |
कुठला थाने में जमीन सौदे और पद के कथित दुरुपयोग से जुड़ी FIR दर्ज हुई। |
| 21 अगस्त 2026 |
मुख्यमंत्री के निर्देश पर नेहा पच्चीसिया Suspend की गईं। |
| 22 अगस्त 2026 |
आरोपों की जांच के लिए 8 सदस्यीय SIT गठित की गई। |
| अगस्त अंत |
तीनों आरोपियों पर ₹10-₹10 हजार का इनाम घोषित किया गया। |
| अगस्त अंत |
विदेश भागने की आशंका में Look Out Circular की कार्रवाई की गई। |
| 29 अगस्त 2026 |
District Court ने नेहा पच्चीसिया की Anticipatory Bail याचिका खारिज की। |
| 31 अगस्त 2026 |
SIT ने सील CSP Office की तलाशी लेकर Documents और Digital Evidence जब्त किए। |
| 5 सितंबर 2026 |
ताजा रिपोर्टों के अनुसार नेहा पच्चीसिया अब भी पुलिस की पहुंच से बाहर हैं। |
High Court ने कब और किस मामले में राहत नहीं दी?
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। High Court से राहत नहीं मिलने का एक स्पष्ट और पुष्ट मामला 11 अगस्त 2026 का है। उस समय नेहा पच्चीसिया ने अपने प्रशासनिक अधिकार सीमित किए जाने और तीन थानों का प्रभार वापस लेने के SP के आदेश को चुनौती दी थी।
मध्य प्रदेश High Court में न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी और पुलिस प्रशासन के उस Administrative Order में हस्तक्षेप से इनकार किया। इसके बाद कुठला, माधवनगर और रंगनाथनगर थानों का प्रभार उनसे हटाने का फैसला प्रभावी रहा।
इसके अलावा जमीन मामले में District Court ने 29 अगस्त को उनकी Anticipatory Bail याचिका खारिज कर दी थी। उपलब्ध 5 सितंबर की ताजा रिपोर्ट में यह कहा गया है कि वह High Court से राहत की कोशिश कर रही हैं। इसलिए दोनों न्यायिक घटनाओं को अलग-अलग रखना जरूरी है: 11 अगस्त का High Court आदेश Administrative Charge से जुड़ा था, जबकि जमीन मामले में Anticipatory Bail District Court ने 29 अगस्त को खारिज की।
तीन थानों का प्रभार क्यों छीना गया था?
जमीन मामले से पहले नेहा पच्चीसिया के खिलाफ एक Transport Businessman ने कथित अवैध वसूली की शिकायत की थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि वाहन जांच के दौरान ₹30 हजार की मांग की गई और ₹25 हजार Cash दिए गए।
शिकायत के बाद उनके Driver Constable Keshav Singh को Suspend किया गया और नेहा पच्चीसिया के क्षेत्र से तीन थाने—कुठला, माधवनगर और रंगनाथनगर—हटा दिए गए। इनका प्रभार दूसरे DSP को सौंपा गया। बाद में इसी Administrative Order को नेहा पच्चीसिया ने High Court में चुनौती दी, लेकिन अदालत ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
8 सदस्यीय SIT अब क्या कर रही है?
जमीन सौदे और पद के कथित दुरुपयोग की जांच के लिए 8 सदस्यीय SIT बनाई गई है। टीम Bank Transactions, Registry Documents, Case Records और Digital Evidence की जांच कर रही है।
SIT ने सील किए गए CSP Office को खोलकर वहां से Case Diaries, Office Registers, CCTV DVR, Hard Drive, Pen Drive और अन्य Electronic Records जब्त किए। इन उपकरणों के Forensic Examination के जरिए Deleted Data और अन्य Digital Evidence खंगाले जाने की बात सामने आई है।
Prevention of Corruption Act भी जोड़ा गया
जांच आगे बढ़ने के साथ मामले में Prevention of Corruption Act की धाराएं 7(C), 12 और 13 भी जोड़े जाने की जानकारी सामने आई है। इससे मामला केवल कथित जमीन सौदे तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सरकारी पद और कथित भ्रष्ट आचरण से जुड़े पहलुओं की जांच भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
हालांकि, किसी भी आरोपी को दोषी ठहराने का अधिकार अदालत के पास है। इसलिए FIR में लगाए गए आरोपों और जांच में सामने आए तथ्यों को अंतिम अपराध सिद्धि के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
10 हजार का इनाम और Look Out Notice के बाद भी गिरफ्तारी क्यों नहीं?
पुलिस ने तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी पर ₹10-₹10 हजार का इनाम घोषित किया है। इसके अलावा विदेश भागने की आशंका को देखते हुए Look Out Circular की कार्रवाई की गई। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आरोपी International Airport या Immigration Check Point के जरिए देश से बाहर निकलने की कोशिश करें तो संबंधित एजेंसियों को जानकारी मिले और उन्हें रोका जा सके।
इसके बावजूद 5 सितंबर की ताजा रिपोर्ट के अनुसार नेहा पच्चीसिया पुलिस की गिरफ्त में नहीं आई हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पुलिस और उनके अपने विभाग के अधिकारी भी उनसे संपर्क नहीं कर पा रहे हैं।
क्या नेहा पच्चीसिया विदेश भाग गई हैं?
इसकी पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की ओर से उपलब्ध जानकारी में यह नहीं कहा गया है कि नेहा पच्चीसिया विदेश पहुंच चुकी हैं। Look Out Circular की कार्रवाई केवल विदेश भागने की आशंका को देखते हुए की गई है। इसलिए यह कहना कि वह विदेश भाग गई हैं, वर्तमान में तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
फिलहाल सही स्थिति यह है कि वह पुलिस की पहुंच से बाहर और फरार बताई जा रही हैं, जबकि पुलिस उनकी तलाश कर रही है।
एयर होस्टेस से DSP तक का सफर
नेहा पच्चीसिया पहले Air India में Air Hostess के रूप में काम करती थीं। बाद में उन्होंने नौकरी छोड़कर MPPSC की तैयारी की और Police Service में DSP के रूप में चयनित हुईं। वह आगे चलकर कटनी में CSP के पद तक पहुंचीं। उनके Career Transition की वजह से उनका नाम पहले भी मीडिया में चर्चा का विषय रहा है।
अब आगे क्या होगा?
अब जांच का अगला बड़ा चरण आरोपियों की गिरफ्तारी और जब्त किए गए Digital तथा Financial Evidence की Forensic जांच है। SIT को यह स्पष्ट करना होगा कि कथित जमीन सौदे में किसकी क्या भूमिका थी, पैसों का वास्तविक स्रोत क्या था और क्या किसी सरकारी पद या पुलिस संसाधन का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया।
नेहा पच्चीसिया की गिरफ्तारी होने या अदालत से कोई नई राहत मिलने पर मामले की दिशा बदल सकती है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार Suspension, FIR, SIT Investigation, Reward, Look Out Circular और District Court से Anticipatory Bail खारिज होने के बावजूद वह पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।
सबसे बड़ा सवाल: इतने कदमों के बाद भी गिरफ्तारी क्यों नहीं?
इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि FIR, Suspension, SIT, Reward, Look Out Circular और लगातार Technical Surveillance के बावजूद पुलिस अभी तक निलंबित CSP तक क्यों नहीं पहुंच पाई है। हालांकि, किसी आरोपी के ठिकाने का पता लगाने या गिरफ्तारी की कार्रवाई में जांच एजेंसियों की रणनीति सार्वजनिक नहीं होती, इसलिए इस स्तर पर पुलिस की विफलता के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि मामला सामान्य जमीन विवाद से आगे बढ़कर पुलिस पद के कथित दुरुपयोग, Financial Transactions और संभावित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच तक पहुंच चुका है। अब SIT की जांच और न्यायिक प्रक्रिया ही तय करेगी कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।