अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बुधवार को बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। राम मंदिर ट्रस्ट ने तीन नए ट्रस्टियों के नामों की घोषणा कर दी है। इनमें दिल्ली के महेश भागचंदका, अयोध्या के मदन मोहन पांडेय और शिकोहाबाद की निर्मला यादव शामिल हैं।
इसी के साथ राम मंदिर के पहले पूर्णकालिक Chief Executive Officer यानी CEO की नियुक्ति की प्रक्रिया भी अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। Search Committee ने तीन नामों का Panel ट्रस्ट के सामने रखा है। इनमें पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडेय का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। हालांकि, अभी यह कहना सही नहीं होगा कि राजेश पांडेय को CEO नियुक्त कर दिया गया है। अंतिम फैसला ट्रस्ट की बैठक में होना है।
राम मंदिर ट्रस्ट में कौन बने नए ट्रस्टी?
ट्रस्ट में शामिल किए गए तीन नए सदस्यों में दिल्ली के महेश भागचंदका, अयोध्या के मदन मोहन पांडेय और शिकोहाबाद की निर्मला यादव शामिल हैं। बुधवार की बैठक के बाद इन तीनों नामों की घोषणा की गई।
महेश भागचंदका का नाम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उन्हें विश्व हिंदू परिषद के दिवंगत नेता अशोक सिंघल का रिश्तेदार बताया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वह अशोक सिंघल फाउंडेशन से भी जुड़े रहे हैं।
राम मंदिर के भूमिपूजन और बाद में प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के दौरान भी भागचंदका की मौजूदगी की जानकारी सामने आई थी। हालांकि, उनकी नई भूमिका अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के औपचारिक Trustee के रूप में होगी।
अयोध्या से मदन मोहन पांडेय को जगह
दूसरे नए ट्रस्टी मदन मोहन पांडेय अयोध्या से हैं। उनके शामिल होने से मंदिर ट्रस्ट के निर्णय लेने वाले ढांचे में स्थानीय प्रतिनिधित्व बढ़ेगा।
तीसरी नई ट्रस्टी निर्मला यादव शिकोहाबाद से हैं। तीनों नियुक्तियों के बाद ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में नए सदस्यों का प्रवेश हुआ है।
राम मंदिर को पहली बार Full-Time CEO क्यों चाहिए?
राम मंदिर के निर्माण के साथ अब मंदिर का संचालन भी बड़े पैमाने पर हो चुका है। रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंचते हैं। दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, प्रसाद, दान और चढ़ावे की व्यवस्था, कर्मचारी प्रबंधन, वित्तीय प्रक्रियाएं, तकनीकी सिस्टम और भविष्य की परियोजनाओं के लिए एक पेशेवर प्रशासनिक ढांचे की जरूरत लगातार बढ़ रही है।
इसी वजह से ट्रस्ट ने पहली बार एक Full-Time CEO नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की। CEO मंदिर ट्रस्ट और उसके दैनिक प्रशासन के बीच एक महत्वपूर्ण Executive भूमिका निभा सकता है।
CEO की दौड़ में कौन-कौन?
Search Committee ने अंतिम चरण में तीन नामों का Panel ट्रस्ट को सौंपा है। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के अनुसार इनमें पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडेय, बिहार के पूर्व DGP डॉ. परेश सक्सेना और IAS अधिकारी दिनेश चंद्र के नाम शामिल हैं।
राजेश पांडेय का नाम इस समय सबसे ज्यादा चर्चा में है, लेकिन उनकी नियुक्ति की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ट्रस्ट को Panel में से अंतिम उम्मीदवार चुनना है।
कौन हैं पूर्व IPS राजेश पांडेय?
राजेश पांडेय उत्तर प्रदेश कैडर के पूर्व IPS अधिकारी हैं। वह पुलिस सेवा में लंबे समय तक रहे और अपराध तथा आतंकवाद के खिलाफ अभियानों के लिए चर्चित रहे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने पुलिस सेवा में करीब 32 साल काम किया।
उनके करियर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध के खिलाफ अभियानों से जुड़ा रहा। वह UP STF और ATS के शुरुआती संस्थापक सदस्य अधिकारियों में शामिल रहे।
उनका नाम कुख्यात गैंगस्टर श्रीप्रकाश शुक्ला के खिलाफ चलाए गए अभियान से भी जुड़ा रहा है। विभिन्न रिपोर्टों में उनके Police Career के दौरान 80 से अधिक Encounters का उल्लेख किया गया है।
हालांकि, किसी अधिकारी के बारे में '80 से ज्यादा Encounter' जैसे आंकड़े बताते समय इसे उपलब्ध मीडिया और सार्वजनिक रिकॉर्ड में प्रकाशित विवरण के रूप में ही समझना चाहिए, न कि हर घटना के स्वतंत्र न्यायिक सत्यापन के रूप में।
राजेश पांडेय का United Nations अनुभव
राजेश पांडेय के करियर में International Experience भी रहा है। उन्हें United Nations के Kosovo Peacekeeping Mission में काम करने का अवसर मिला था। इस दौरान उन्हें United Nations Medal भी मिला।
उनका अनुभव केवल Police Operations तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने विभिन्न वरिष्ठ पदों पर Law and Order, Intelligence, Security और Administration से जुड़े कार्य किए। यही अनुभव उन्हें राम मंदिर जैसे बड़े और संवेदनशील संस्थान के प्रशासनिक पद के लिए संभावित उम्मीदवारों में महत्वपूर्ण बनाता है।
5,585 आवेदन से तीन नामों तक कैसे पहुंची प्रक्रिया?
राम मंदिर CEO के पद के लिए बड़ी संख्या में आवेदन आए थे। रिपोर्टों के अनुसार कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से Screening और कई चरणों की प्रक्रिया के बाद उम्मीदवारों की संख्या घटाई गई और अंतिम चरण में 16 उम्मीदवारों से प्रत्यक्ष संवाद किया गया।
इसके बाद Search Committee ने तीन प्रमुख नामों का Panel तैयार किया। अब अंतिम निर्णय ट्रस्ट को करना है।
इसलिए राजेश पांडेय को CEO बनाए जाने की खबर को अभी 'संभावित नियुक्ति' या 'रेस में प्रमुख नाम' के रूप में ही देखा जाना चाहिए। आधिकारिक नियुक्ति आदेश आने के बाद ही इसे Confirmed Appointment माना जाएगा।
चढ़ावा चोरी मामले के बाद क्यों महत्वपूर्ण है यह बैठक?
राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़े कथित अनियमितता एवं चोरी के मामले ने मंदिर प्रशासन की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए थे। इसी बीच ट्रस्ट की यह बैठक हो रही है, इसलिए प्रशासनिक नियुक्तियों पर खास नजर है।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित SIT ने मामले की Final Report ट्रस्ट को सौंप दी है। अगस्त में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा के खिलाफ SIT की Final Report में आपराधिक भूमिका नहीं पाए जाने की बात सामने आई थी।
हालांकि, इस मामले में अलग-अलग जांच प्रक्रियाओं को एक-दूसरे का पर्याय नहीं माना जाना चाहिए। SIT की रिपोर्ट में किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक भूमिका नहीं मिलना और मामले से जुड़ी हर जांच का पूरी तरह समाप्त हो जाना एक ही बात नहीं है।
ट्रस्ट में प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की तैयारी
CEO की नियुक्ति के अलावा ट्रस्ट की बैठक में मंदिर प्रशासन से जुड़े दूसरे पदों और Committees पर भी चर्चा होने की संभावना है। प्रसाद व्यवस्था और परिक्रमा व्यवस्था के लिए अलग Committees बनाए जाने की चर्चा है।
ट्रस्ट के प्रवक्ता पद को लेकर भी नाम सामने आ रहे हैं। विश्व हिंदू परिषद से जुड़े रहे शरद शर्मा को प्रवक्ता की जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना की रिपोर्ट है। हालांकि, इन पदों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित आदेश या ट्रस्ट की घोषणा के बाद ही मानी जानी चाहिए।
स्थायी महासचिव पर भी नजर
राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासन में स्थायी महासचिव का पद भी महत्वपूर्ण है। हालांकि, मौजूदा रिपोर्टों के अनुसार बुधवार की बैठक में स्थायी महासचिव की घोषणा की संभावना कम बताई जा रही है।
ऐसे में CEO की नियुक्ति और नए ट्रस्टियों के साथ ट्रस्ट का प्रशासनिक ढांचा किस दिशा में जाता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
CEO के सामने सबसे बड़ी चुनौतियां क्या होंगी?
राम मंदिर के CEO के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल मंदिर का दैनिक संचालन नहीं होगी। उन्हें लाखों श्रद्धालुओं की व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा एजेंसियों के साथ Coordination, प्रसाद और दान प्रबंधन, कर्मचारियों की व्यवस्था, Digital Systems, Infrastructure और भविष्य के विस्तार को एक साथ संभालना होगा।
अयोध्या में मंदिर के साथ-साथ शहर में भी बड़े पैमाने पर Infrastructure Development हो रहा है। ऐसे में मंदिर प्रशासन और स्थानीय प्रशासन के बीच Coordination भी CEO की भूमिका का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।
राजेश पांडेय को चुना गया तो क्या बदलेगा?
यदि ट्रस्ट अंततः राजेश पांडेय के नाम पर मुहर लगाता है, तो राम मंदिर के प्रशासन में एक ऐसे अधिकारी की एंट्री होगी जिसके पास Police, Security, Crisis Management और बड़े प्रशासनिक Operations का लंबा अनुभव है।
हालांकि, मंदिर का प्रशासन Police Department से बिल्कुल अलग प्रकृति का कार्य है। इसलिए उनके अनुभव का वास्तविक परीक्षण श्रद्धालु प्रबंधन, संस्थागत Governance, Finance, कर्मचारी व्यवस्था और मंदिर की धार्मिक एवं प्रशासनिक जरूरतों के बीच संतुलन बनाने में होगा।
अब किस फैसले का इंतजार?
फिलहाल तीन नए ट्रस्टियों की नियुक्ति Confirm हो चुकी है। CEO पद के लिए तीन नामों का Panel भी ट्रस्ट के सामने है। अब सबसे बड़ा फैसला यह है कि इन तीनों में से किसे राम मंदिर ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक CEO बनाया जाता है।
राजेश पांडेय का नाम इस समय प्रमुख दावेदारों में है, लेकिन अंतिम घोषणा के पहले उनकी नियुक्ति को Confirmed मानना जल्दबाजी होगी। ट्रस्ट की अंतिम मुहर के बाद ही यह साफ होगा कि राम मंदिर के पहले CEO के रूप में किस अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई है।
राम मंदिर के निर्माण के बाद अब उसके विशाल प्रशासन को पेशेवर Executive व्यवस्था देने की दिशा में यह बैठक एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है।