TCE रीवा न्यूज डेस्क। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के त्योंथर अंचल में पिछले दिनों हुई लगातार बारिश के बाद प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। टमस (तमसा), बेलन और नैना नदियों में आए उफान को देखते हुए जिला व पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। जलभराव और बाढ़ की संभावित स्थिति की सूचना मिलते ही कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी और पुलिस अधीक्षक डॉ. गुरूकरण सिंह प्रशासनिक अमले के साथ ग्राउंड जीरो पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रभावित गांवों का स्थलीय निरीक्षण किया, ग्रामीणों से सीधा संवाद साधा और राहत एवं बचाव व्यवस्थाओं की समीक्षा की।
बेलन नदी के उफान से 7 गांवों का आवागमन प्रभावित
बेलन नदी में पानी की आवक बढ़ने के कारण त्योंथर क्षेत्र के डीह गांव सहित कुल सात ग्रामीण क्षेत्रों का मुख्य मार्ग से संपर्क प्रभावित हुआ है। प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में डीह, कैथा, गंथा, बजरा, सोनौरी कटरा, बसहट और कठौली शामिल हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में इन गांवों के भीतर बाढ़ की स्थिति निर्मित नहीं हुई है, लेकिन यदि जलस्तर में और वृद्धि होती है तो जोखिम बढ़ सकता है। इसे देखते हुए राजस्व और पुलिस विभाग के मैदानी अमले को इन सातों गांवों में 24 घंटे लगातार निगरानी रखने के सख्त निर्देश दिए गए हैं, ताकि जलस्तर बढ़ते ही आवश्यक राहत एवं बचाव कार्य तुरंत शुरू किया जा सके।
नैना नदी से दो गांवों में भरा पानी, गुरमा क्षेत्र में घटा जलस्तर
नैना नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी होने से रेरूआ और गाड़रपुर्वा गांवों के निचले हिस्सों में जलभराव की स्थिति बन गई। हालांकि, राहत की बात यह रही कि नैना और गुरमा क्षेत्र में जलस्तर धीरे-धीरे कम होने लगा है, जिससे कुछ पुल-पुलियों के ऊपर से पानी नीचे उतर गया है।
कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी और एसपी डॉ. गुरूकरण सिंह ने गाड़रपुर्वा, सोनौरी और आसपास के क्षेत्रों का सघन दौरा कर स्थिति का मुआयना किया और मौके पर मौजूद अधिकारियों से राहत केंद्रों की तैयारियों का ब्योरा लिया। इस दौरान एसडीएम त्योंथर राकेश चौरसिया, एसडीओपी मनस्वी शर्मा और तहसीलदार राजेश तिवारी सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
कलेक्टर की अपील: नदी-नालों से दूर रहें, जोखिम न लें
कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने ग्रामीणों से नदी-नालों और रपटों के करीब न जाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि गहरे पानी में उतरने से बचें और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनने पर तुरंत सुरक्षित स्थानों या प्रशासन द्वारा बनाए गए राहत केंद्रों में शरण लें।
कलेक्टर ने विशेष रूप से चेतावनी दी कि नदियों के उफान के दौरान नावों के जरिए नदी पार करने का प्रयास न करें क्योंकि यह जानलेवा साबित हो सकता है। उन्होंने बताया कि बारिश की तीव्रता में अब कमी आई है, इसलिए नागरिकों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी बरतना बेहद आवश्यक है। राहत शिविरों में भोजन, पेयजल और दवाओं की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित कर दी गई है।
जलमग्न पुल-पुलियों पर आवागमन रोकने के सख्त निर्देश
पुलिस अधीक्षक डॉ. गुरूकरण सिंह ने सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जहां भी पुल या पुलियों के ऊपर से पानी बह रहा हो, वहां दोनों ओर तत्काल बैरिकेडिंग कर आवागमन पूरी तरह रोका जाए। किसी भी नागरिक या वाहन चालक को जोखिम उठाकर रपटा पार न करने दिया जाए।
एसपी ने बताया कि होमगार्ड और राज्य आपदा आपातकालीन प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमों को पूरी तरह से अलर्ट पर रखा गया है। किसी भी आपातकालीन परिस्थिति या जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी होने पर तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू करने के लिए बोट्स और लाइफ जैकेट के साथ टीमें तैनात हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. रीवा के त्योंथर क्षेत्र में किन नदियों का जलस्तर बढ़ा है?
त्योंथर क्षेत्र में लगातार बारिश के कारण टमस, बेलन और नैना नदियों का जलस्तर बढ़ा है।
2. बेलन नदी के उफान से कौन-से गांव प्रभावित हुए हैं?
बेलन नदी के बढ़ते जलस्तर से डीह, कैथा, गंथा, बजरा, सोनौरी कटरा, बसहट और कठौली गांवों का आवागमन प्रभावित हुआ है।
3. नैना नदी से किन गांवों में जलभराव की स्थिति बनी थी?
नैना नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी से रेरूआ और गाड़रपुर्वा गांवों के निचले क्षेत्रों में जलभराव देखा गया था।
4. बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं?
कलेक्टर और एसपी ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर जलमग्न पुलों पर आवाजाही रोक दी है और SDRF व होमगार्ड टीमों को अलर्ट मोड पर रखा है।
