पहले राजेश पांडेय का नाम था, अब जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति
राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद को लेकर पिछले Update में पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडेय का नाम प्रमुख दावेदार के रूप में सामने आया था। Search Committee ने तीन नामों का Panel ट्रस्ट के सामने रखा था और राजेश पांडेय को संभावित उम्मीदवारों में प्रमुख माना जा रहा था।
लेकिन बुधवार को ट्रस्ट की बैठक में अंतिम निर्णय पूर्व Air Marshal जितेंद्र मिश्रा के पक्ष में हुआ। इस तरह राजेश पांडेय के संभावित CEO बनने की चर्चा समाप्त हो गई और अब जितेंद्र मिश्रा राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO होंगे।
कौन हैं जितेंद्र मिश्रा?
जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के Retired Air Marshal हैं। वह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भोपतपुरा गांव के मूल निवासी हैं। उन्होंने भारतीय वायुसेना में Fighter Pilot के रूप में 6 दिसंबर 1986 को Commission प्राप्त किया था।
लगभग चार दशक के Military Career के दौरान उन्होंने Fighter Pilot, Fighter Combat Leader और Experimental Test Pilot के रूप में काम किया। उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण Command और Staff Assignments संभाले और Air Force के कई महत्वपूर्ण Operational तथा Strategic पदों पर रहे।
अप्रैल 2026 में वह भारतीय वायुसेना से Retire हुए। Retirment से पहले उनका अंतिम बड़ा पद Western Air Command के Air Officer Commanding-in-Chief का था।
Operation Sindoor में संभाली थी Western Air Command की कमान
जितेंद्र मिश्रा का नाम Operation Sindoor के कारण भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हुआ। जनवरी 2025 में उन्होंने Indian Air Force की Western Air Command की कमान संभाली थी और मई 2025 में Operation Sindoor के दौरान इसी Command का नेतृत्व किया।
Western Air Command देश की सबसे महत्वपूर्ण Operational Commands में शामिल है और भारत की पश्चिमी सीमाओं से जुड़े Air Operations की जिम्मेदारी संभालता है। इस पद पर रहते हुए मिश्रा ने बड़े स्तर पर Operational Planning, Coordination और Command का अनुभव हासिल किया।
Operation Sindoor में उनकी भूमिका के लिए उन्हें Sarvottam Yudh Seva Medal से सम्मानित किया गया। यह युद्ध या संघर्ष की परिस्थितियों में असाधारण स्तर की विशिष्ट सेवा के लिए दिया जाने वाला प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान है।
3,000 घंटे से ज्यादा उड़ान, 18 से अधिक Aircraft Types
जितेंद्र मिश्रा का Military Career केवल Senior Command तक सीमित नहीं रहा। उनके पास 3,000 घंटे से ज्यादा Flying Experience है। उन्होंने 18 से अधिक प्रकार के Fighter Aircraft, Transport Aircraft और Helicopters उड़ाए हैं।
उन्होंने Fighter Squadron की Command की, Experimental Test Pilot के रूप में काम किया और Aircraft & Systems Testing Establishment यानी ASTE में Chief Test Pilot और Commandant जैसे महत्वपूर्ण पद संभाले।
उन्होंने Integrated Defence Staff में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। इसके अलावा Air Headquarters में Operational Planning, Assessment और Projects से जुड़े पदों पर भी काम किया।
Kargil War से भी जुड़ा रहा Career
जितेंद्र मिश्रा के Career का एक महत्वपूर्ण हिस्सा Kargil War के दौर से जुड़ा रहा। उपलब्ध विवरणों के अनुसार उन्होंने Mirage-2000 से जुड़े Laser-Guided Bomb Operations को Operationalise करने वाली टीम में काम किया था।
उनका अनुभव Test Flying, Operational Planning और Combat Operations तक फैला हुआ है। यही वजह है कि उनके Career को केवल एक Fighter Pilot की भूमिका तक सीमित नहीं माना जाता।
United Nations और International Training का अनुभव
जितेंद्र मिश्रा ने भारत के अलावा International स्तर पर भी Professional Training और Assignment का अनुभव हासिल किया है। वह National Defence Academy के Alumni हैं। उन्होंने Air Force Test Pilots School, Bengaluru, Air Command and Staff College, United States और Royal College of Defence Studies, United Kingdom में प्रशिक्षण लिया।
उनके Career में United Nations Peacekeeping से जुड़ा अनुभव भी बताया जाता है। इस तरह उनके पास Military Operations के साथ International Coordination और Institutional Management का अनुभव भी रहा है।
देवरिया के गांव से Air Marshal तक का सफर
जितेंद्र मिश्रा का मूल संबंध उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भोपतपुरा गांव से है। यह क्षेत्र Bhatpar Rani के आसपास आता है और बिहार सीमा के नजदीक है।
एक सामान्य पारिवारिक पृष्ठभूमि से निकलकर भारतीय वायुसेना के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचने वाले मिश्रा अब राम मंदिर जैसे देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक संस्थानों में से एक के प्रशासन की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनके पिता Lecturer रहे थे।
राम मंदिर ट्रस्ट ने उन्हें ही क्यों चुना?
ट्रस्ट ने जितेंद्र मिश्रा के चयन के पीछे किसी एक कारण को अलग से घोषित नहीं किया है। हालांकि, Selection Process और उनके Career को देखते हुए उनके पक्ष में कई Professional Factors दिखाई देते हैं।
पहला, उनके पास करीब चार दशक का Administrative और Command Experience है। दूसरा, उन्होंने बड़े स्तर की Teams और Organisations का नेतृत्व किया है। तीसरा, उनके Career में Operational Planning, Logistics, Security Coordination और Crisis Management जैसे क्षेत्र शामिल रहे हैं।
राम मंदिर में रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं और आने वाले समय में मंदिर परिसर तथा उससे जुड़ी सुविधाओं का विस्तार जारी रहेगा। ऐसे में बड़े संगठन के संचालन, विभिन्न Agencies के बीच Coordination और सुरक्षा व्यवस्था के अनुभव को उपयोगी माना जा सकता है।
क्या उनका काम सिर्फ मंदिर की व्यवस्था देखना होगा?
CEO की भूमिका केवल मंदिर में दर्शन व्यवस्था तक सीमित नहीं होगी। उन्हें Trust के Administrative और Operational Systems को मजबूत करने में भूमिका निभानी होगी। इसमें Staff Management, Pilgrim Facilities, विभिन्न Agencies के साथ Coordination, Infrastructure और Financial Administration जैसे क्षेत्र शामिल हो सकते हैं।
मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए Crowd Management, सुरक्षा व्यवस्था और सुविधा संबंधी व्यवस्थाओं के लिए भी अलग-अलग विभागों और सरकारी Agencies के साथ Coordination महत्वपूर्ण होगा।
5,585 Applicants में से चुने गए जितेंद्र मिश्रा
राम मंदिर ट्रस्ट ने CEO चयन के लिए व्यापक Selection Process अपनाई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कुल 5,585 Applications प्राप्त हुए थे। Screening के दौरान Candidates का Evaluation किया गया और कई चरणों के बाद 16 Candidates को आगे की प्रक्रिया के लिए चुना गया।
इसके बाद Online Interaction और Ayodhya में Face-to-Face Interviews हुए। अंत में तीन अत्यधिक योग्य Candidates का Panel तैयार किया गया और ट्रस्ट ने उनमें से जितेंद्र मिश्रा को CEO के लिए चुना।
Selection Process में AI-Enabled Screening और Manual Assessment दोनों के इस्तेमाल की जानकारी भी सामने आई है। इससे स्पष्ट है कि ट्रस्ट ने इस पद के लिए केवल पारंपरिक Administrative Recruitment की बजाय एक बहु-स्तरीय प्रक्रिया अपनाई।
तीन नए Trustees भी नियुक्त
CEO की नियुक्ति के साथ ट्रस्ट ने तीन रिक्त Trustee पदों को भी भर दिया। दिल्ली के Mahesh Bhagchandka, अयोध्या के Madan Mohan Pandey और Shikohabad की Nirmala Yadav को नए Trustees के रूप में शामिल किया गया।
Mahesh Bhagchandka को दिवंगत VHP नेता Ashok Singhal का रिश्तेदार बताया जाता है। वह Ashok Singhal Foundation से जुड़े रहे हैं और राम मंदिर से संबंधित महत्वपूर्ण आयोजनों में भी उनकी मौजूदगी रही है।
Madan Mohan Pandey अयोध्या से जुड़े वरिष्ठ अधिवक्ता हैं, जबकि Nirmala Yadav शिक्षण क्षेत्र से जुड़ी रही हैं। तीनों नियुक्तियों से ट्रस्ट के खाली पद भर गए हैं।
Mahesh Bhagchandka को Treasurer की जिम्मेदारी
ट्रस्ट के नए ढांचे में Mahesh Bhagchandka को Treasurer की जिम्मेदारी भी दी गई है। यानी वह Trustee के साथ-साथ ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण पद पर भी काम करेंगे।
यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब मंदिर के Donation और Financial Management को लेकर पिछले महीनों में विवाद और जांच चर्चा में रहे हैं। इसलिए Treasurer और CEO दोनों की नई भूमिकाएं प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
Swami Govind Dev Giri बने General Secretary
ट्रस्ट ने Swami Govind Dev Giri को नया General Secretary नियुक्त किया है। इससे Trust के प्रमुख Administrative पदों का नया ढांचा सामने आया है।
इस बदलाव के साथ CEO, General Secretary और Treasurer के स्तर पर जिम्मेदारियों का नया Distribution तैयार हुआ है। इसका उद्देश्य मंदिर ट्रस्ट के बढ़ते प्रशासनिक और वित्तीय कामकाज को अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित करना माना जा रहा है।
दान और चढ़ावे के विवाद के बाद बड़ा प्रशासनिक बदलाव
राम मंदिर में Donation और चढ़ावे से जुड़े कथित चोरी और वित्तीय अनियमितता के मामले ने पिछले महीनों में Trust Administration पर सवाल खड़े किए थे। इस मामले में कई गिरफ्तारियां हुईं और ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दिया।
इसी पृष्ठभूमि में Trust का नया Administrative Structure महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत जिम्मेदारी या दोष तय करना जांच और न्यायिक प्रक्रिया का विषय है। केवल प्रशासनिक बदलाव को किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
राम मंदिर प्रशासन के सामने अब क्या चुनौतियां?
राम मंदिर का निर्माण और संचालन लगातार बड़े स्तर पर विकसित हो रहा है। देश-विदेश से श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में दर्शन व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा, स्वच्छता, प्रसाद वितरण, Donation Management, कर्मचारी व्यवस्था और Infrastructure Development को एक साथ संभालना बड़ी चुनौती है।
CEO के रूप में जितेंद्र मिश्रा को धार्मिक संस्था की विशिष्ट आवश्यकताओं और आधुनिक Institutional Management के बीच संतुलन बनाना होगा। उनकी Military Background से मिलने वाला Command और Coordination Experience इस भूमिका में कितना प्रभावी रहता है, यह आने वाले समय में दिखाई देगा।
अब पुराने और नए नेतृत्व में क्या बदलाव?
राम मंदिर ट्रस्ट का नया ढांचा पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट Executive Structure की दिशा में बढ़ता दिखाई दे रहा है। पहले Trust की व्यवस्था मुख्य रूप से Trustees और General Secretary स्तर पर संचालित होती थी। अब पहली बार एक Full-Time CEO को दैनिक प्रशासन की Executive जिम्मेदारी दी गई है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि CEO Trust के सभी निर्णय अकेले लेंगे। CEO Trust के निर्धारित Governance Structure के भीतर काम करेंगे और Trustee तथा अन्य पदाधिकारियों के साथ Coordination करेंगे।
जितेंद्र मिश्रा के सामने पहला बड़ा काम क्या होगा?
नई जिम्मेदारी संभालने के बाद सबसे महत्वपूर्ण काम मंदिर प्रशासन की मौजूदा व्यवस्था को समझना, अलग-अलग विभागों और Agencies के बीच Coordination को मजबूत करना तथा श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाना होगा।
इसके साथ Financial Systems, Staff Management, Security Coordination और बड़े धार्मिक आयोजनों की Operational Planning भी उनके कार्यक्षेत्र का हिस्सा हो सकती है।
राम मंदिर ट्रस्ट का नया प्रशासनिक चेहरा
2 सितंबर 2026 के फैसले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रशासन में तीन बड़े बदलाव एक साथ सामने आए हैं—पहले CEO के रूप में Retired Air Marshal जितेंद्र मिश्रा, General Secretary के रूप में Swami Govind Dev Giri और Treasurer के रूप में Mahesh Bhagchandka। साथ ही तीन नए Trustees को भी शामिल किया गया है।
यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब राम मंदिर अब केवल निर्माण परियोजना नहीं बल्कि रोजाना बड़े पैमाने पर संचालित होने वाला धार्मिक और सार्वजनिक संस्थान बन चुका है। इसलिए आने वाले वर्षों में Trust के Administrative Model की सफलता का बड़ा हिस्सा इस नए Leadership Structure पर निर्भर करेगा।
पूर्व Air Marshal जितेंद्र मिश्रा के लिए यह Military Command से Religious Institution के बड़े Executive Management तक का बिल्कुल नया अध्याय है। अब उनकी सबसे बड़ी परीक्षा यही होगी कि चार दशक की Command और Operational Experience को वह अयोध्या के करोड़ों श्रद्धालुओं से जुड़े मंदिर प्रशासन में किस तरह लागू करते हैं।