नाड़ी दोष क्या है? कुंडली मिलान में कब बनता है, जानें आदि, मध्य और अंत्य नाड़ी के नियम

✍️ विशेष संवाददाताPublished On 23rd Aug, 2026 @ 1:05 AM
नाड़ी दोष को आधुनिक चिकित्सा में genetic compatibility या fertility test नहीं माना जाता।
नाड़ी दोष विवाह के लिए दो कुंडलियों के मिलान में देखा जाता है; यह किसी एक व्यक्ति की कुंडली का अकेला दोष नहीं है।साभार: The City Express

विवाह के लिए कुंडली मिलान में नाड़ी कूट को 36 गुणों में सबसे अधिक 8 अंक दिए जाते हैं। वर और वधू की जन्म नक्षत्र आधारित नाड़ी समान होने पर पारंपरिक अष्टकूट पद्धति में नाड़ी दोष माना जाता है, लेकिन केवल नाड़ी दोष देखकर विवाह का अंतिम निर्णय लेना उचित नहीं माना जाता।

📌 इस खबर की बड़ी बातें (Quick Read)

  • नाड़ी दोष विवाह के लिए दो कुंडलियों के मिलान में देखा जाता है; यह किसी एक व्यक्ति की कुंडली का अकेला दोष नहीं है।
  • अष्टकूट गुण मिलान में नाड़ी कूट को 8 अंक मिलते हैं।
  • पारंपरिक व्यवस्था में तीन नाड़ियां मानी जाती हैं—आदि, मध्य और अंत्य।
  • वर और वधू की नाड़ी समान होने पर पारंपरिक गणना में नाड़ी कूट के 8 अंक नहीं मिलते।
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नाड़ी दोष: हिंदू विवाह परंपरा में कुंडली मिलान के दौरान नाड़ी दोष का नाम अक्सर सामने आता है। 36 गुणों वाले अष्टकूट मिलान में नाड़ी कूट को सबसे अधिक 8 अंक दिए जाते हैं। यही वजह है कि विवाह के लिए कुंडली मिलाते समय नाड़ी को महत्वपूर्ण माना जाता है।

लेकिन नाड़ी दोष को समझने से पहले यह जानना जरूरी है कि यह किसी एक व्यक्ति की कुंडली में अकेले देखा जाने वाला दोष नहीं है। इसका संबंध वर और वधू की कुंडलियों के आपसी मिलान से है। जन्म नक्षत्र के आधार पर दोनों की नाड़ी निर्धारित की जाती है और समान नाड़ी होने पर पारंपरिक अष्टकूट पद्धति में नाड़ी दोष माना जाता है।

जरूरी बात: नाड़ी दोष वैदिक ज्योतिष की पारंपरिक विवाह-मिलान अवधारणा है। इसे आधुनिक चिकित्सा में genetic compatibility, fertility या भविष्य में बच्चे के स्वास्थ्य की वैज्ञानिक जांच नहीं माना जाता। इसलिए नाड़ी दोष के आधार पर बीमारी या संतान संबंधी निश्चित भविष्यवाणी करना उचित नहीं है।

नाड़ी दोष क्या होता है?

अष्टकूट गुण मिलान में वर और वधू की जन्म नक्षत्र के आधार पर नाड़ी निर्धारित की जाती है। पारंपरिक व्यवस्था में तीन प्रकार की नाड़ी मानी जाती हैं—आदि नाड़ी, मध्य नाड़ी और अंत्य नाड़ी

जब विवाह के लिए मिलाई जा रही दोनों कुंडलियों में वर और वधू की नाड़ी समान होती है, तो पारंपरिक गुण मिलान में इसे नाड़ी दोष कहा जाता है। समान नाड़ी होने पर नाड़ी कूट में 0 अंक मिलते हैं, जबकि अलग नाड़ी होने पर 8 अंक प्राप्त होते हैं।

नाड़ी कूट को कितने गुण मिलते हैं?

अष्टकूट गुण मिलान कुल 36 गुणों पर आधारित होता है। इसमें नाड़ी कूट का हिस्सा 8 गुण है, जो आठों कूटों में सबसे अधिक है। इसी वजह से पारंपरिक कुंडली मिलान में नाड़ी को विशेष महत्व दिया जाता है।

कूट अधिकतम अंक
वर्ण 1
वश्य 2
तारा 3
योनि 4
ग्रह मैत्री 5
गण 6
भकूट 7
नाड़ी 8
कुल 36

आदि, मध्य और अंत्य नाड़ी क्या होती है?

पारंपरिक अष्टकूट मिलान में नाड़ी के तीन वर्ग बताए जाते हैं—आदि, मध्य और अंत्य। जन्म नक्षत्र के आधार पर व्यक्ति इनमें से किसी एक नाड़ी वर्ग में आता है।

आमतौर पर 27 नक्षत्रों को तीन नाड़ी समूहों में बांटा जाता है और प्रत्येक नाड़ी में 9 नक्षत्र आते हैं। इसलिए नाड़ी निर्धारित करने के लिए जन्म नक्षत्र की सही जानकारी जरूरी होती है।

नाड़ी पारंपरिक वर्गीकरण
आदि नाड़ी पहला नाड़ी वर्ग
मध्य नाड़ी दूसरा नाड़ी वर्ग
अंत्य नाड़ी तीसरा नाड़ी वर्ग

नाड़ी दोष कब बनता है?

यदि वर और वधू दोनों की नाड़ी समान आती है—यानी दोनों की आदि नाड़ी, दोनों की मध्य नाड़ी या दोनों की अंत्य नाड़ी—तो पारंपरिक अष्टकूट मिलान में नाड़ी दोष माना जाता है। ऐसी स्थिति में नाड़ी कूट के 8 अंक नहीं मिलते।

उदाहरण के लिए यदि वर की नाड़ी आदि है और वधू की भी नाड़ी आदि है, तो इसे समान नाड़ी की स्थिति माना जाएगा। इसी तरह मध्य-मध्य या अंत्य-अंत्य भी समान नाड़ी की स्थिति होगी।

नाड़ी दोष और अलग-अलग नाड़ी का मिलान

यदि वर और वधू की नाड़ी अलग-अलग होती है, तो पारंपरिक नाड़ी कूट गणना में 8 अंक मिलते हैं। उदाहरण के तौर पर आदि-मध्य, आदि-अंत्य या मध्य-अंत्य जैसी अलग नाड़ी वाली स्थितियों में नाड़ी कूट के पूरे अंक दिए जाते हैं।

नाड़ी दोष को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है?

अष्टकूट प्रणाली में नाड़ी को 8 अंक मिलने के कारण इसका वजन अन्य कई कूटों से अधिक है। पारंपरिक ज्योतिषीय व्याख्याओं में नाड़ी को दंपती के स्वास्थ्य, संतति और पारिवारिक जीवन से जोड़ा गया है।

हालांकि इन ज्योतिषीय मान्यताओं को वैज्ञानिक चिकित्सा निष्कर्ष के रूप में नहीं लेना चाहिए। नाड़ी मिलान किसी व्यक्ति की वास्तविक medical condition, fertility या genetic health का परीक्षण नहीं है।

क्या नाड़ी दोष होने पर शादी नहीं करनी चाहिए?

ऐसा सीधा निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। पारंपरिक ज्योतिष में भी समान नाड़ी मिलने पर पूरी कुंडली के अन्य कारकों और बताए गए परिहारों पर विचार करने की परंपरा है।

विवाह मिलान केवल एक कूट या एक दोष पर आधारित नहीं होता। अष्टकूट के अन्य घटकों के साथ-साथ विवाह भाव, ग्रह स्थिति, दशा और दोनों व्यक्तियों की कुंडलियों के दूसरे योगों को भी ज्योतिषीय पद्धति के अनुसार देखा जा सकता है।

क्या नाड़ी दोष का कोई परिहार या दोष-भंग होता है?

हां। विभिन्न ज्योतिषीय परंपराओं में नाड़ी दोष के लिए कई परिहार या दोष-भंग की स्थितियां बताई गई हैं। हालांकि इन नियमों की सूची सभी ज्योतिषीय पद्धतियों में समान नहीं है।

कुछ परंपराओं में समान राशि या समान नक्षत्र जैसी विशेष स्थितियों को नाड़ी दोष के प्रभाव को कम करने वाले अपवादों के रूप में देखा जाता है। लेकिन किसी भी अपवाद को लागू करने से पहले इस्तेमाल की जा रही कुंडली-मिलान पद्धति को स्पष्ट करना जरूरी है।

क्या केवल 36 गुण देखकर विवाह का फैसला करना सही है?

नहीं। 36 गुणों का मिलान पारंपरिक compatibility assessment का एक हिस्सा है। केवल कुल अंक देखकर विवाह को निश्चित रूप से सफल या असफल बताना उचित नहीं है।

कई ज्योतिषीय पद्धतियों में नाड़ी और भकूट जैसे कूटों के साथ अन्य ग्रह स्थितियों का भी अध्ययन किया जाता है। इसलिए उदाहरण के तौर पर 30 गुण मिलने का अर्थ यह नहीं कि विवाह हर परिस्थिति में सफल होगा और कम गुण मिलने का अर्थ यह नहीं कि विवाह निश्चित रूप से असफल होगा।

नाड़ी दोष का संतान से क्या संबंध माना जाता है?

पारंपरिक ज्योतिषीय मतों में नाड़ी कूट को संतान और स्वास्थ्य से जोड़ा गया है। इसी वजह से समान नाड़ी को लेकर विवाह मिलान में विशेष सावधानी बरतने की बात कही जाती है।

लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। नाड़ी दोष को genetic disease, infertility या बच्चे के स्वास्थ्य की वैज्ञानिक भविष्यवाणी नहीं माना जा सकता। गर्भधारण, प्रजनन क्षमता और बच्चे के स्वास्थ्य से संबंधित वास्तविक चिंता होने पर चिकित्सा विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।

क्या नाड़ी दोष एक ही व्यक्ति की कुंडली में देखा जाता है?

नहीं। नाड़ी दोष मूल रूप से विवाह कुंडली मिलान का विषय है। एक व्यक्ति की जन्म कुंडली देखकर अकेले यह नहीं कहा जाता कि उसमें नाड़ी दोष है। पहले वर और वधू के जन्म नक्षत्र के आधार पर दोनों की नाड़ी निर्धारित की जाती है और फिर उनका मिलान किया जाता है।

नाड़ी जानने के लिए कौन-सी जानकारी जरूरी है?

नाड़ी निर्धारित करने के लिए जन्म नक्षत्र की जानकारी जरूरी होती है। जन्म नक्षत्र निकालने के लिए सामान्यतः जन्म तारीख, जन्म का सही समय और जन्म स्थान की आवश्यकता होती है।

जन्म समय गलत होने पर नक्षत्र या अन्य कुंडली गणनाओं में अंतर आ सकता है। इसलिए विवाह मिलान के लिए उपलब्ध जन्म विवरण की शुद्धता महत्वपूर्ण मानी जाती है।

नाड़ी दोष को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी क्या है?

सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि नाड़ी दोष का मतलब निश्चित रूप से विवाह असफल होना, संतान न होना या बच्चे को बीमारी होना है। ऐसी निश्चित भविष्यवाणी को तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।

नाड़ी दोष पारंपरिक ज्योतिषीय compatibility system का हिस्सा है। इसका अर्थ समझने के लिए पूरी मिलान पद्धति और संबंधित परंपरा को देखना जरूरी है।

नाड़ी दोष और मेडिकल जांच में अंतर

नाड़ी मिलान को medical test समझना सही नहीं है। जन्म नक्षत्र से निकाली गई नाड़ी किसी व्यक्ति की वास्तविक blood group, DNA, genetic condition, fertility या reproductive health को मापती नहीं है।

यदि विवाह से पहले स्वास्थ्य या genetic condition को लेकर चिंता है तो डॉक्टर या qualified medical professional से उचित जांच और सलाह लेना अधिक विश्वसनीय तरीका है।

नाड़ी दोष: एक नजर में

सवाल जवाब
नाड़ी दोष क्या है? विवाह के लिए दो कुंडलियों के मिलान में समान नाड़ी आने की पारंपरिक स्थिति
नाड़ी कितने प्रकार की होती है? आदि, मध्य और अंत्य
नाड़ी कूट के कितने अंक हैं? 8 अंक
समान नाड़ी होने पर क्या होता है? पारंपरिक अष्टकूट गणना में नाड़ी कूट के 0 अंक मिलते हैं
नाड़ी किस आधार पर तय होती है? जन्म नक्षत्र के आधार पर
क्या नाड़ी दोष वैज्ञानिक medical test है? नहीं

नाड़ी दोष विवाह कुंडली मिलान की पारंपरिक अष्टकूट व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। 36 गुणों में इसके 8 अंक होने के कारण इसे विशेष महत्व दिया जाता है। वर और वधू की जन्म नक्षत्र आधारित नाड़ी समान होने पर पारंपरिक गणना में नाड़ी दोष माना जाता है।

हालांकि नाड़ी दोष को लेकर डर पैदा करने वाली निश्चित भविष्यवाणियों से बचना चाहिए। इसे विवाह की सफलता, संतान या स्वास्थ्य का वैज्ञानिक predictor नहीं माना जा सकता। पारंपरिक ज्योतिषीय दृष्टिकोण अपनाने वाले लोग भी केवल नाड़ी के आधार पर फैसला लेने के बजाय पूरी कुंडली और संबंधित परंपरा में बताए गए परिहारों को देखते हैं।

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राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026: भोपाल की डॉ. अर्चना शुक्ला और सीधी के शैलेंद्र प्रताप सिंह का चयन, 5 सितंबर को सम्मान

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National Teachers Award 2026 के लिए मध्य प्रदेश से भोपाल की डॉ. अर्चना शुक्ला और सीधी के शैलेंद्र प्रताप सिंह चुने गए हैं। दोनों को 5 सितंबर को नई दिल्ली में सम्मान मिलेगा।

9 घंटे पहले|मध्य प्रदेश
Indore Tourism: एक साल में 2.80 करोड़ पर्यटक पहुंचे, उज्जैन के बाद MP का दूसरा सबसे बड़ा टूरिज्म हब बना शहर

Indore Tourism: एक साल में 2.80 करोड़ पर्यटक पहुंचे, उज्जैन के बाद MP का दूसरा सबसे बड़ा टूरिज्म हब बना शहर

इंदौर की पहचान अब सिर्फ मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी तक सीमित नहीं रह गई है। उपलब्ध 2025 पर्यटन आंकड़ों के अनुसार शहर में 2 करोड़ 80 लाख 70 हजार से ज्यादा पर्यटक यात्राएं दर्ज हुईं। इस आंकड़े ने इंदौर को मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल कर दिया है, जबकि उज्जैन करीब 8.40 करोड़ पर्यटक यात्राओं के साथ सबसे आगे रहा।

15 घंटे पहले|छिंदवाड़ा

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Indore Mid-Day Meal: कढ़ी-चावल खाने के बाद 38 बच्चों की तबीयत बिगड़ी, 19 अस्पताल में भर्ती; जांच शुरू

Indore Mid-Day Meal: कढ़ी-चावल खाने के बाद 38 बच्चों की तबीयत बिगड़ी, 19 अस्पताल में भर्ती; जांच शुरू

इंदौर के सांवेर क्षेत्र के सिंहाना गांव स्थित शासकीय माध्यमिक विद्यालय में मिड-डे मील खाने के बाद बड़ी संख्या में बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। 38 बच्चों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है, जबकि 19 को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और 4 बच्चे ICU में निगरानी में हैं। भोजन से बीमारी हुई या कोई अन्य कारण है, इसकी जांच की जा रही है।

8 घंटे पहले|मध्य प्रदेश
Indore Tourism: एक साल में 2.80 करोड़ पर्यटक पहुंचे, उज्जैन के बाद MP का दूसरा सबसे बड़ा टूरिज्म हब बना शहर

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इंदौर की पहचान अब सिर्फ मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी तक सीमित नहीं रह गई है। उपलब्ध 2025 पर्यटन आंकड़ों के अनुसार शहर में 2 करोड़ 80 लाख 70 हजार से ज्यादा पर्यटक यात्राएं दर्ज हुईं। इस आंकड़े ने इंदौर को मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल कर दिया है, जबकि उज्जैन करीब 8.40 करोड़ पर्यटक यात्राओं के साथ सबसे आगे रहा।

15 घंटे पहले|उज्जैन
MP IAS Transfer: रीवा जिला पंचायत को मिली नई CEO, सृष्टि देशमुख गोडा की पोस्टिंग; 32 IAS अफसरों का तबादला

MP IAS Transfer: रीवा जिला पंचायत को मिली नई CEO, सृष्टि देशमुख गोडा की पोस्टिंग; 32 IAS अफसरों का तबादला

मध्य प्रदेश में शुक्रवार को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। राज्य सरकार ने 32 IAS अधिकारियों की नई पदस्थापना के आदेश जारी किए हैं। इस बदलाव में सृष्टि देशमुख गोडा को जिला पंचायत रीवा का मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) बनाया गया है।

15 घंटे पहले|उज्जैन