रीवा / जॉब्स-एजुकेशनरीवा

रीवा में नर्सिंग छात्रों का फूटा गुस्सा: 4 साल का कोर्स 7 साल में भी अधूरा, लंबित परीक्षाओं और नतीजों को लेकर कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन

•6 मिनट पढ़ने का समय
रीवा / जॉब्स-एजुकेशन: रीवा में नर्सिंग छात्रों का फूटा गुस्सा: 4 साल का कोर्स 7 साल में भी अधूरा, लंबित परीक्षाओं और नतीजों को लेकर कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन
रीवा में नर्सिंग छात्रों का फूटा गुस्सा: 4 साल का कोर्स 7 साल में भी अधूरा, लंबित परीक्षाओं और नतीजों को लेकर कमिश्नर को सौंपा ज्ञापनसाभार: The City Express

मुख्य बिंदुQuick Read

  • लंबित परीक्षाओं को लेकर आक्रोश: रीवा में नर्सिंग छात्र-छात्राओं के सब्र का बांध टूट गया है, विद्यार्थियों ने कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
  • ​'परीक्षा दो, परिणाम दो' की गूंज: प्रदर्शनकारी छात्रों ने प्रशासनिक अनदेखी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपने भविष्य को सुरक्षित करने की मांग उठाई।
  • ​7 साल में भी अधूरी डिग्री: विद्यार्थियों ने बताया कि 4 साल में पूरा होने वाला नर्सिंग कोर्स 6 से 8 साल बीतने के बाद भी दूसरे और तीसरे वर्ष में ही अटका हुआ है।

TCE रीवा न्यूज डेस्क। मध्य प्रदेश के रीवा जिले में नर्सिंग की पढ़ाई कर रहे छात्र-छात्राओं के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया है। पिछले कई वर्षों से लंबित परीक्षाओं और रुके हुए परीक्षा परिणामों के कारण अधर में लटके भविष्य को लेकर विद्यार्थियों ने स्थानीय प्रशासन और शासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को वर्ष 2020, 2021 और 2022 बैच के प्रभावित छात्र-छात्राओं के एक विशाल प्रतिनिधिमंडल ने रीवा कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। विद्यार्थियों ने प्रशासनिक महकमे से गुहार लगाई है कि उनके रुके हुए परिणामों और परीक्षाओं का जल्द से जल्द त्वरित निराकरण किया जाए ताकि उनका भविष्य अंधकारमय होने से बच सके।

कमिश्नर कार्यालय में गूंजे 'परीक्षा दो, परिणाम दो, भविष्य सुरक्षित करो' के नारे

कमिश्नर कार्यालय पहुंचे प्रदर्शनकारी छात्रों ने लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक अनदेखी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। छात्रों का स्पष्ट कहना था कि वे भविष्य में प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को संभालने और मरीजों की सेवा करने के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत और तैयारी कर रहे हैं। लेकिन, शासन और प्रशासन की घोर लापरवाही और लचर कार्यप्रणाली के कारण उनका समूचा भविष्य अधर में लटक गया है। आक्रोशित छात्रों ने प्रशासन के सामने दो टूक मांग रखते हुए कहा, "परीक्षा दो, परिणाम दो और हमारा भविष्य सुरक्षित करो।"

4 साल की डिग्री के लिए 6 से 8 साल का अंतहीन इंतज़ार

प्रदर्शन में शामिल विद्यार्थियों ने अपनी पीड़ा बयां करते हुए बताया कि जो नर्सिंग कोर्स सामान्य तौर पर 4 साल में पूरा हो जाना चाहिए था, उसे पूरा होने में 6 से 8 साल का समय बीतने को आ रहा है। इसके बावजूद, हालात यह हैं कि अभी तक सेकंड (द्वितीय) और थर्ड (तृतीय) ईयर की परीक्षाएं तक आयोजित नहीं हो पाई हैं, और जिनके एग्जाम हुए हैं उनके परिणाम पूरी तरह से अस्पष्ट और अटके हुए हैं।

विद्यार्थियों ने अपनी समस्याओं को गिनाते हुए निम्नलिखित गंभीर बिंदु प्रशासन के समक्ष रखे:

  • उम्र और करियर पर संकट: समय पर डिग्रियां न मिलने के कारण सरकारी और निजी नौकरियों के लिए निर्धारित तय उम्र सीमा लगातार निकलती जा रही है, जिससे उनके करियर पर बड़ा संकट मंडरा रहा है।
  • आर्थिक व मानसिक शोषण: समय पर डिग्री पूरी न होने की वजह से मजबूरी में इन छात्रों को प्राइवेट अस्पतालों में बेहद कम वेतन और बिना किसी पेशेवर सम्मान के काम करना पड़ रहा है। यह एक प्रकार का सीधा आर्थिक शोषण है।
  • समय की बर्बादी: छात्रों ने प्रशासन से सीधा सवाल उठाया कि उनके जीवन के जो 3 से 4 कीमती साल इस लेटलतीफी में बर्बाद हुए हैं, उसकी भरपाई आखिर कौन करेगा?

पूरी फीस भरने के बाद भी डिप्रेशन झेल रहे निर्दोष विद्यार्थी

प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ कमिश्नर कार्यालय पहुंचीं एक शिक्षिका ने बताया कि नर्सिंग की पढ़ाई करने वाले अधिकांश छात्र-छात्राएं बेहद गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। इन विद्यार्थियों के परिजनों ने पेट काटकर कॉलेजों को 4 साल की पूरी फीस चुका दी है, लेकिन कॉलेजों और नियामक संस्थाओं ने समय पर परीक्षाएं आयोजित नहीं कराईं। मान्यता और प्रशासनिक विवादों का पूरा खामियाजा उन निर्दोष छात्रों को भुगतना पड़ रहा है जिनका इन विवादों से कोई लेना-देना नहीं है। इस अनिश्चितता के कारण कई होनहार विद्यार्थी गंभीर मानसिक तनाव और अवसाद (डिप्रेशन) का शिकार हो रहे हैं।

छात्रों की प्रमुख मांगें और बड़े आंदोलन की चेतावनी

छात्रों ने अपने ज्ञापन में शासन-प्रशासन के समक्ष मुख्य रूप से तीन मांगें रखी हैं:

  • स्पष्ट समय-सीमा का निर्धारण: लंबे समय से अटकी हुई परीक्षाओं के आयोजन और रुके हुए परिणामों को घोषित करने के लिए तत्काल एक निश्चित समय-सीमा तय की जाए।
  • बैच का स्थायी समाधान: 2020, 2021 और 2022 बैच के विद्यार्थियों की समस्याओं का अलग-अलग परीक्षण कर उनका स्थायी निराकरण किया जाए।
  • तत्काल शासन स्तरीय कार्रवाई: शासन स्तर पर लंबित सभी कानूनी और प्रशासनिक मामलों को तेजी से सुलझाकर छात्रों की डिग्री जल्द से जल्द पूरी कराई जाए।

छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने समय रहते उनकी इन जायज मांगों पर कोई ठोस और सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो वे आने वाले दिनों में चरणबद्ध तरीके से एक बड़े और उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. रीवा में नर्सिंग छात्र-छात्राओं ने किस कारण से प्रदर्शन किया?

नर्सिंग छात्रों ने कई वर्षों से लंबित परीक्षाओं और रुके हुए परीक्षा परिणामों के विरोध में अपना आक्रोश जताते हुए रीवा कमिश्नर कार्यालय में प्रदर्शन किया।

2. किन बैच के विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लगा है?

मुख्य रूप से वर्ष 2020, 2021 और 2022 बैच के नर्सिंग छात्र-छात्राएं इस प्रशासनिक लेटलतीफी से सबसे अधिक प्रभावित हैं।

3. डिग्रियों में देरी का छात्रों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?

समय पर डिग्री न मिलने से छात्रों की सरकारी नौकरी की उम्र सीमा निकल रही है, उन्हें निजी अस्पतालों में कम वेतन पर काम करना पड़ रहा है और कई छात्र मानसिक अवसाद (डिप्रेशन) का शिकार हो रहे हैं।

4. छात्रों ने प्रशासन को क्या चेतावनी दी है?

छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही परीक्षाओं की समय-सीमा तय कर उनकी समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया, तो वे बड़े और चरणबद्ध आंदोलन के लिए विवश होंगे।

संपादकीय लेखक एवं रिपोर्टर
सत्यापित रिपोर्टर
विशेष संवाददाता

मध्य प्रदेश, विंध्य, बुंदेलखंड और राष्ट्रीय घटनाक्रमों पर द सिटी एक्सप्रेस की विशेष रिपोर्टिंग टीम।

पाठकों की प्रतिक्रियाएं

खुला मंच
इस खबर पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। सबसे पहले अपनी राय साझा करें!

रीवा की अन्य खबरें

16 खबरें प्रदर्शित

मध्य प्रदेश की मुख्य खबरें

और देखें >

📍मध्य प्रदेश के अन्य जिलों से समाचार (District Dispatches)

आस-पास के जिले

सतना की बड़ी खबरें

सतना का पूरा पेज >

सीधी की बड़ी खबरें

सीधी का पूरा पेज >

भोपाल की बड़ी खबरें

भोपाल का पूरा पेज >

इंदौर की बड़ी खबरें

इंदौर का पूरा पेज >