Apple के iOS 18 अपडेट को लेकर भारत में उपभोक्ता शिकायतों पर CCPA ने मामले को विस्तृत जांच के लिए अपनी Investigation Wing को भेज दिया है। शिकायतों में अपडेट के बाद iPhone की स्क्रीन और माइक्रोफोन में कथित खराबी तथा महंगी रिपेयर का मुद्दा शामिल है। अब Apple की उस नीति की भी जांच हो रही है, जिसमें सॉफ्टवेयर को वारंटी से बाहर रखा गया है।
नई दिल्ली। Apple के लिए भारत में iOS 18 से जुड़ा उपभोक्ता विवाद अब गंभीर नियामकीय जांच में बदल गया है। Central Consumer Protection Authority (CCPA) ने iOS 18 अपडेट से जुड़ी शिकायतों और Apple की सॉफ्टवेयर वारंटी शर्तों को लेकर मामले को विस्तृत जांच के लिए अपनी Investigation Wing को भेज दिया है।
मामले में आरोप है कि iOS 18 अपडेट के बाद कुछ iPhone यूजर्स को स्क्रीन डिस्प्ले, माइक्रोफोन और दूसरी कार्यक्षमताओं से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, इन समस्याओं के बाद उन्हें रिपेयर या डिस्प्ले बदलने के लिए बड़ी रकम खर्च करनी पड़ी, क्योंकि Apple की वारंटी में सॉफ्टवेयर को कवर नहीं किया जाता। CCPA अब यह देख रहा है कि ऐसी स्थिति में उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन हुआ या नहीं।
CCPA ने जांच क्यों बढ़ाई?
CCPA को iOS 18 के रोलआउट के बाद बड़ी संख्या में शिकायतें मिलने की बात सामने आई है। Reuters द्वारा देखे गए दस्तावेजों के मुताबिक, मामले में 75 औपचारिक शिकायतों का उल्लेख है। इन शिकायतों में iOS 18 इंस्टॉल करने के बाद iPhone स्क्रीन पर हरी, गुलाबी या सफेद लाइनें दिखाई देने और माइक्रोफोन समेत दूसरी सुविधाओं में समस्या आने के आरोप शामिल हैं।
CCPA ने 29 जुलाई 2026 को Apple को सूचित किया कि मामले को उसकी Investigation Wing के पास “detailed investigation” के लिए भेजा जा रहा है। नियामक के मुताबिक मामला उपभोक्ता अधिकारों के कथित उल्लंघन से जुड़ा है।
सॉफ्टवेयर वारंटी के Terms & Conditions भी जांच के घेरे में
इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू केवल iOS 18 में कथित तकनीकी समस्याएं नहीं हैं। CCPA Apple की उस सॉफ्टवेयर लाइसेंस व्यवस्था की भी जांच कर रहा है, जिसमें सॉफ्टवेयर को किसी तरह की वारंटी के बिना उपलब्ध कराने की शर्त शामिल है।
Apple के मौजूदा वारंटी दस्तावेजों में भी स्पष्ट किया गया है कि उसकी सीमित वारंटी सॉफ्टवेयर को कवर नहीं करती। Apple की iOS वारंटी शर्तों में कहा गया है कि वारंटी किसी सॉफ्टवेयर पर लागू नहीं होती। वहीं भारत में Apple की एक साल की सीमित निर्माता वारंटी मुख्य रूप से नए Apple-ब्रांडेड उत्पादों में सामग्री और निर्माण संबंधी दोषों को कवर करती है।
अब CCPA यह देख रहा है कि यदि किसी कंपनी के सॉफ्टवेयर अपडेट से कथित तौर पर किसी हार्डवेयर की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और ग्राहक को उसकी मरम्मत के लिए भुगतान करना पड़ता है, तो क्या केवल सॉफ्टवेयर को वारंटी से बाहर रखने वाली शर्त उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत पर्याप्त है।
शिकायतों में स्क्रीन पर लाइनें आने का आरोप
जांच से जुड़े आरोपों में iOS 18 अपडेट के बाद कुछ iPhone स्क्रीन पर हरी, गुलाबी और सफेद लाइनें दिखाई देने की शिकायतें शामिल हैं। इसके अलावा माइक्रोफोन और दूसरी कार्यक्षमताओं में खराबी के भी आरोप लगाए गए हैं।
CCPA का आरोप है कि ऐसे मामलों में कुछ उपभोक्ताओं को रिपेयर और डिस्प्ले बदलने के लिए काफी रकम खर्च करनी पड़ी। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, iPhone 15 के स्क्रीन रिपेयर की अनुमानित लागत का एक उदाहरण ₹27,900 बताया गया है।
Apple का क्या कहना है?
Apple ने आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। कंपनी का कहना है कि iOS 18 को कड़े परीक्षण से गुजारा गया था और उसे भारत में iOS 18 के संबंध में कोई systemic issue या safety concern नहीं मिला।
Apple ने यह भी तर्क दिया है कि सॉफ्टवेयर को वारंटी के बिना उपलब्ध कराना असामान्य नहीं है और इंस्टॉलेशन से पहले उपभोक्ताओं को संबंधित शर्तों की जानकारी दी जाती है। कंपनी ने अपनी स्थिति में यह भी कहा कि ऐसी व्यवस्था दूसरी बड़ी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों की प्रथाओं के समान है।
Apple के मुताबिक, जून 2026 तक केवल करीब 11% iPhone डिवाइस iOS 18 पर चल रहे थे। कंपनी ने यह भी कहा है कि वह भारतीय अधिकारियों के साथ सहयोग करेगी और ग्राहकों से जुड़े मामले पर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएगी।
Apple की भारत में मौजूदा वारंटी क्या कहती है?
Apple India के अनुसार, नए Apple-ब्रांडेड उत्पादों के लिए एक साल की सीमित निर्माता वारंटी उपलब्ध है। कंपनी यह भी कहती है कि यह वारंटी भारतीय उपभोक्ता कानून के तहत मिलने वाले अधिकारों से अलग और अतिरिक्त है।
Apple के भारत के Repair Terms & Conditions में यह भी कहा गया है कि यदि सेवा किसी वारंटी, विस्तारित सेवा अनुबंध या लागू उपभोक्ता कानून के तहत दी जा रही है, तो संबंधित शर्तें उपभोक्ता के वैधानिक अधिकारों को कम नहीं करेंगी। Apple की रिपेयर शर्तों में सर्विस और इस्तेमाल किए गए रिप्लेसमेंट पार्ट्स के लिए 90 दिन की सर्विस वारंटी का भी प्रावधान है, कुछ अपवादों के साथ।
क्या CCPA Apple को वारंटी बदलने के लिए मजबूर कर सकता है?
अभी ऐसा कोई अंतिम आदेश नहीं आया है। जांच फिलहाल इस बात को स्थापित करने के लिए चल रही है कि शिकायतों में लगाए गए आरोप और Apple की संबंधित शर्तें उपभोक्ता संरक्षण कानून का उल्लंघन करती हैं या नहीं।
जांच पूरी होने के बाद CCPA के स्तर पर आगे की कार्रवाई तय हो सकती है। इसमें परिस्थितियों के आधार पर जुर्माना, उपभोक्ताओं के लिए राहत या कारोबारी प्रक्रियाओं में बदलाव से जुड़े निर्देश जैसी कार्रवाई की संभावना हो सकती है। कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि वारंटी की शर्तों को कथित unfair practice का हिस्सा माना जाता है तो नियामक कंपनी से शर्तों या उपभोक्ता जानकारी में बदलाव की मांग कर सकता है।
क्या इसका मतलब Apple की iOS 18 गलती साबित हो गई?
नहीं। CCPA की विस्तृत जांच शुरू होना किसी आरोप के अंतिम रूप से सही साबित होने के बराबर नहीं है। अभी यह जांच का विषय है कि iOS 18 और शिकायतों में बताई गई समस्याओं के बीच क्या संबंध है और ऐसी स्थिति में Apple की जिम्मेदारी कितनी बनती है।
Apple ने भी iOS 18 में भारत के स्तर पर किसी systemic problem से इनकार किया है। इसलिए खबर में iOS 18 को iPhone खराब होने का निश्चित कारण बताना अभी उचित नहीं होगा।
Apple के लिए मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत Apple के लिए तेजी से बढ़ता हुआ बाजार है। Reuters के मुताबिक 2025 में भारत में iPhone की बाजार हिस्सेदारी करीब 9% थी, जो 2022 में लगभग 4% थी। ऐसे में उपभोक्ता अधिकारों और वारंटी शर्तों से जुड़ा यह मामला कंपनी के लिए केवल एक तकनीकी शिकायत का विषय नहीं है।
यदि जांच में यह पाया जाता है कि किसी सॉफ्टवेयर अपडेट से जुड़ी समस्या के मामले में उपभोक्ताओं को अनुचित तरीके से रिपेयर खर्च उठाना पड़ा या वारंटी की शर्तें उपभोक्ता अधिकारों के खिलाफ थीं, तो इसका असर Apple की भारत में ग्राहक सेवा और वारंटी नीतियों पर पड़ सकता है।
आगे क्या होगा?
अब CCPA की Investigation Wing शिकायतों, Apple की प्रतिक्रिया, संबंधित वारंटी और सॉफ्टवेयर लाइसेंस शर्तों तथा उपलब्ध तकनीकी और उपभोक्ता दस्तावेजों की जांच करेगी। इसके बाद जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई का फैसला होगा।
फिलहाल Apple ने कहा है कि वह अधिकारियों के साथ सहयोग करेगा। दूसरी ओर, CCPA की विस्तृत जांच यह तय करने की दिशा में अगला कदम है कि iOS 18 से जुड़े उपभोक्ता आरोप और Apple की वारंटी नीति भारतीय उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत किस हद तक आती है।