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खुदरा महंगाई 4.82% पर पहुंची: प्याज की कीमतों ने बढ़ाया दबाव, लगातार तीसरे महीने RBI के 4% लक्ष्य से ऊपर; गांवों में महंगाई ज्यादा

अगस्त 2026 की खुदरा महंगाई 4.82 प्रतिशत, प्याज की कीमतों में तेज बढ़ोतरी
अगस्त 2026 में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82% पर पहुंच गई।साभार: Representative

अगस्त में खुदरा महंगाई जुलाई के 4.45% से बढ़कर 4.82% हो गई। खाद्य महंगाई भी 5.95% पर पहुंची। प्याज की कीमतों में तेज उछाल ने दबाव बढ़ाया, जबकि आलू और टमाटर की कीमतों में सालाना आधार पर गिरावट रही।

Quick Read

  • अगस्त में CPI आधारित खुदरा महंगाई 4.82% रही, जो जुलाई के 4.45% से अधिक है।
  • खाद्य महंगाई 5.95% पर पहुंची; प्याज की महंगाई दर 48.27% रही।
  • ग्रामीण महंगाई 5.23% और शहरी महंगाई 4.31% रही।
  • महंगाई लगातार तीसरे महीने RBI के 4% के मध्य लक्ष्य से ऊपर रही।

नई दिल्ली। अगस्त 2026 में आम लोगों के घरेलू बजट पर महंगाई का दबाव और बढ़ गया। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई जुलाई के 4.45% से बढ़कर अगस्त में 4.82% हो गई। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक यह नई CPI सीरीज में अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।

महंगाई में यह बढ़ोतरी लगातार तीसरे महीने हुई है। मई में खुदरा महंगाई 3.93%, जून में 4.38%, जुलाई में 4.45% और अगस्त में 4.82% रही। इस तरह अगस्त की दर RBI के 4% के मध्य लक्ष्य से लगातार तीसरे महीने ऊपर रही। अगस्त की दर RBI के 2026-27 की दूसरी तिमाही के 4.7% के अनुमान से भी अधिक रही।

खाने-पीने की चीजों ने बढ़ाया दबाव

अगस्त में खाद्य महंगाई सबसे बड़ी चिंता बनी रही। Consumer Food Price Index यानी CFPI आधारित खाद्य महंगाई जुलाई के 5.52% से बढ़कर अगस्त में 5.95% हो गई। ग्रामीण इलाकों में खाद्य महंगाई 6.13% और शहरी इलाकों में 5.64% रही।

सब्जियों और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में एक जैसी तेजी नहीं रही। प्याज की कीमतों में सालाना आधार पर 48.27% की महंगाई दर्ज हुई, जो जुलाई के 22.54% से काफी ज्यादा है। लहसुन की महंगाई 43.60% और अदरक की 73.82% रही।

हालांकि, आलू की कीमतें बढ़ने की तस्वीर पूरे देश के CPI आंकड़ों में नहीं दिखती। अगस्त में आलू की सालाना महंगाई दर -13.14% रही, यानी एक साल पहले की तुलना में इसके दाम कम थे। टमाटर की कीमतों में भी 31.09% की गिरावट दर्ज हुई। इसलिए अगस्त की खाद्य महंगाई का दबाव मुख्य रूप से प्याज और दूसरी खाद्य वस्तुओं से आया।

गांवों में महंगाई शहरों से ज्यादा

अगस्त में ग्रामीण परिवारों पर महंगाई का दबाव शहरी परिवारों की तुलना में ज्यादा रहा। ग्रामीण खुदरा महंगाई 5.23% रही, जबकि शहरी महंगाई 4.31% दर्ज की गई। जुलाई में ग्रामीण महंगाई 4.84% और शहरी महंगाई 3.96% थी।

इसका मतलब है कि अगस्त में कीमतों में बढ़ोतरी का असर ग्रामीण उपभोक्ताओं पर अपेक्षाकृत ज्यादा पड़ा। खाने-पीने की वस्तुओं का घरेलू खर्च में बड़ा हिस्सा होने के कारण खाद्य कीमतों में बदलाव का असर सीधे परिवारों के बजट पर दिखाई देता है।

सिर्फ खाद्य वस्तुएं ही वजह नहीं

अगस्त की महंगाई में खाद्य वस्तुओं के साथ कुछ सेवाओं और अन्य वस्तुओं की कीमतों ने भी दबाव बढ़ाया। व्यक्तिगत देखभाल, सामाजिक सुरक्षा और अन्य वस्तुओं एवं सेवाओं की श्रेणी में महंगाई 15.17% रही। रेस्तरां और आवास सेवाओं में यह 8.38% रही। परिवहन से जुड़ी महंगाई 4.60% और शिक्षा सेवाओं की महंगाई 3.73% दर्ज की गई।

सोने-चांदी की कीमतों में तेजी का असर भी CPI की कुछ श्रेणियों में दिखाई दिया। अगस्त में चांदी के आभूषणों की महंगाई 107.11% रही, जबकि सोना, हीरा और प्लैटिनम आभूषणों की महंगाई 35.53% दर्ज हुई।

RBI के लिए क्यों महत्वपूर्ण है 4% का आंकड़ा?

RBI महंगाई को 4% के मध्य लक्ष्य के आसपास रखने की नीति अपनाता है, जबकि इसके लिए 2% से 6% की सहनशीलता सीमा तय है। अगस्त में 4.82% की खुदरा महंगाई अभी इस ऊपरी सीमा के भीतर है, लेकिन लगातार तीसरे महीने 4% से ऊपर रहना कीमतों के दबाव को लेकर चिंता बढ़ाता है।

RBI ने 2026-27 के लिए औसत CPI महंगाई का अनुमान 5% रखा है। दूसरी तिमाही के लिए 4.7%, तीसरी तिमाही के लिए 5.9% और चौथी तिमाही के लिए 5.5% का अनुमान दिया गया है। अगस्त का आंकड़ा दूसरी तिमाही के अनुमान से ऊपर रहा है।

आम आदमी पर क्या असर पड़ता है?

महंगाई बढ़ने का सबसे सीधा असर परिवार के मासिक बजट पर पड़ता है। अगर खाने-पीने की वस्तुओं, बाहर खाना, परिवहन या रोजमर्रा की सेवाओं की कीमतें बढ़ती हैं तो समान आय में परिवार को पहले की तुलना में कम सामान या सेवाएं मिलती हैं।

लंबे समय तक महंगाई ऊंची रहने पर बचत और खर्च के फैसलों पर भी असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, महंगाई के दबाव को देखते हुए RBI ब्याज दरों के जरिए मांग और कीमतों को प्रभावित करने की कोशिश कर सकता है। इसका असर आगे चलकर कर्ज की लागत और निवेश पर भी पड़ सकता है।

महंगाई कैसे बढ़ती-घटती है?

महंगाई को समझने के लिए CPI को देखा जाता है। इसमें घरों द्वारा खरीदी जाने वाली अलग-अलग वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में समय के साथ होने वाले बदलाव को मापा जाता है। खाद्य पदार्थ, कपड़े, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन और दूसरी जरूरतों को एक तय भार के साथ CPI में शामिल किया जाता है।

किसी वस्तु की कीमत बढ़ने से अकेले पूरी खुदरा महंगाई जरूरी नहीं कि उतनी ही बढ़े। उसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि वह CPI की टोकरी में कितना वजन रखती है और दूसरी वस्तुओं की कीमतों में क्या बदलाव आया है। इसी वजह से अगस्त में प्याज की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बावजूद आलू और टमाटर की कीमतों में गिरावट रही, फिर भी कुल खाद्य महंगाई बढ़ी।

अगस्त के CPI आंकड़े अभी अस्थायी हैं। सितंबर 2026 की खुदरा महंगाई के आंकड़े अक्टूबर में जारी किए जाएंगे।

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