तीसरे दिन भी विराजमान गणपति की ही पूजा का विधान; किसी एक विशेष स्वरूप की पूजा अनिवार्य नहीं, श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार विघ्नहर्ता, सिद्धिविनायक या गणपति के अन्य स्वरूप का ध्यान कर सकते हैं
रीवा। गणेश चतुर्थी के साथ घरों और पंडालों में विराजे गणपति बप्पा की पूजा का क्रम जारी है। 14 सितंबर 2026 को गणेश स्थापना के बाद 15 सितंबर को दूसरे दिन की पूजा हुई और अब 16 सितंबर को गणेशोत्सव का तीसरा दिन मनाया जाएगा। रीवा के पंचांग के अनुसार 16 सितंबर को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि रहेगी।
तीसरे दिन की पूजा को लेकर कई भक्तों के मन में यह सवाल रहता है कि गणपति के किस स्वरूप की पूजा करनी चाहिए, कौन-सा भोग लगाना चाहिए और पूजा का शुभ समय क्या रहेगा। धार्मिक परंपराओं में तीसरे दिन के लिए भगवान गणेश के किसी एक विशेष स्वरूप की पूजा अनिवार्य नहीं मानी जाती। घर में पहले से स्थापित गणपति की ही विधि-विधान से पूजा की जाती है। परिवार की परंपरा के अनुसार विघ्नहर्ता, सिद्धिविनायक, गणपति या लंबोदर स्वरूप का ध्यान किया जा सकता है।
तीसरे दिन गणपति के किस स्वरूप की पूजा करें?
गणेशोत्सव के तीसरे दिन भगवान गणेश की उसी स्थापित प्रतिमा का पूजन करना चाहिए, जिसकी चतुर्थी के दिन विधिवत स्थापना की गई है। किसी विशेष दिन के लिए अलग गणेश प्रतिमा या स्वरूप बदलना आवश्यक नहीं है।
पूजा के दौरान भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, सिद्धिदाता और मंगलकर्ता के रूप में स्मरण कर सकते हैं। यदि परिवार में किसी विशेष गणपति स्वरूप की परंपरा है, तो उसी के अनुसार पूजा करना भी उचित है।
रीवा में 16 सितंबर का शुभ मुहूर्त
रीवा के पंचांग के अनुसार 16 सितंबर 2026 को सूर्योदय लगभग सुबह 5:51 बजे और सूर्यास्त लगभग शाम 6:08 बजे रहेगा। दिन में अमृत चौघड़िया सुबह 7:23 से 8:56 बजे तक और शुभ चौघड़िया 10:28 बजे से दोपहर 12 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त लगभग 11:35 बजे से 12:24 बजे तक बताया गया है।
हालांकि 16 सितंबर को रीवा में राहुकाल दोपहर 12 बजे से 1:32 बजे तक रहेगा। इसलिए नियमित गणपति पूजा के लिए सुबह का अमृत चौघड़िया या 10:28 बजे से दोपहर 12 बजे तक का शुभ समय सुविधाजनक विकल्प हो सकता है। अलग-अलग पंचांग और स्थान के अनुसार मुहूर्त में कुछ अंतर संभव है।
गणेश जी को कौन-सा भोग लगाएं?
भगवान गणेश को मोदक विशेष प्रिय माना जाता है। तीसरे दिन की पूजा में श्रद्धालु मोदक, बेसन या बूंदी के लड्डू, गुड़-नारियल, फल, केला और अन्य सात्त्विक मिठाइयों का भोग लगा सकते हैं। घर में उपलब्ध मौसमी फलों को भी नैवेद्य में शामिल किया जा सकता है।
पूजा में दूर्वा का विशेष महत्व माना जाता है। फूल, अक्षत, चंदन, सिंदूर, धूप और दीप के साथ दूर्वा अर्पित की जा सकती है। पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार भोग में बदलाव हो सकता है।
गणेश पूजा में ये सामग्री रखें
- दूर्वा
- लाल या पीले फूल
- सिंदूर और चंदन
- अक्षत
- धूप और दीप
- कपूर
- फल और नारियल
- मोदक या लड्डू
- पंचामृत
- कलश और शुद्ध जल
पूजा सामग्री परिवार की परंपरा और उपलब्धता के अनुसार कम या अधिक हो सकती है। गणेश पूजा में मोदक और दूर्वा को विशेष महत्व दिया जाता है।
तीसरे दिन गणेश पूजा की सरल विधि
1. पूजा स्थल की सफाई: सबसे पहले पूजा स्थान को साफ कर गणपति की प्रतिमा के सामने दीप जलाएं।
2. संकल्प: भगवान गणेश का ध्यान करते हुए परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य, समृद्धि और सभी कार्यों में सफलता की कामना के साथ संकल्प लें।
3. आचमन और ध्यान: शुद्ध जल से आचमन कर भगवान गणेश का ध्यान करें।
4. आवाहन और पूजन: गणपति को चंदन, सिंदूर, अक्षत, फूल और दूर्वा अर्पित करें।
5. नैवेद्य: मोदक, लड्डू, फल या घर में तैयार सात्त्विक प्रसाद भगवान को अर्पित करें।
6. मंत्र जाप: कम से कम 11, 21 या 108 बार गणेश मंत्र का जाप किया जा सकता है।
7. आरती: धूप और दीप से भगवान गणेश की आरती करें और अंत में परिवार के सभी सदस्यों को प्रसाद वितरित करें।
गणेश जी का मुख्य मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः।
यह गणपति का सरल और प्रचलित मंत्र है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार इसका जाप 11, 21 या 108 बार कर सकते हैं।
गणेश जी का ध्यान मंत्र
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव शुभकार्येषु सर्वदा॥
पूजा की शुरुआत या आरती से पहले इस मंत्र का पाठ किया जा सकता है।
गणेश जी की आरती
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एकदंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
हार चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतवारी।
कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
पूजा में किन बातों का ध्यान रखें?
गणपति पूजा में श्रद्धा और स्वच्छता को प्राथमिकता दें। दूर्वा और ताजे फूल अर्पित करें तथा सात्त्विक नैवेद्य चढ़ाएं। तुलसी दल को लेकर अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में मान्यताएं हैं, लेकिन सामान्य गणेश पूजा में दूर्वा को प्राथमिकता दी जाती है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि तीसरे दिन पूजा के लिए किसी नए या अनिवार्य विशेष स्वरूप की आवश्यकता नहीं है। घर में स्थापित गणपति की नियमित पूजा, मंत्र जाप, नैवेद्य और आरती के साथ श्रद्धापूर्वक आराधना की जा सकती है।
गणेशोत्सव कितने दिनों तक रखा जाएगा और विसर्जन किस दिन होगा, यह परिवार या आयोजन की परंपरा पर निर्भर करता है। 2026 में कई स्थानों पर डेढ़ दिन, तीन दिन, पांच दिन, सात दिन और अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जन की परंपरा के अनुसार कार्यक्रम होंगे।