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रीवा के चाकघाट CMO शंखधर पांडेय निलंबित: महिला कर्मचारी से डिमांड रखी, 'दो घंटे कमरे में रहो, किसी को नहीं पता चलेगा'; ऑडियो वायरल होने के बाद हुई कार्रवाई

चाकघाट नगर परिषद CMO पर महिला कर्मचारी से आपत्तिजनक बातचीत के आरोप
चाकघाट नगर परिषद के CMO शंखधर पांडेय पर महिला कर्मचारी से आपत्तिजनक बातचीत के आरोप; कथित ऑडियो के बाद प्रशासनिक कार्रवाई।साभार: The City Express

महिला कंप्यूटर ऑपरेटर ने नौकरी से हटाने और वेतन-EPF रोकने के भी आरोप लगाए; कलेक्टर ने SDM से कराई प्रारंभिक जांच, कमिश्नर स्तर पर निलंबन की कार्रवाई

Quick Read

  • चाकघाट नगर परिषद के CMO शंखधर पांडेय पर महिला कंप्यूटर ऑपरेटर ने आपत्तिजनक बातचीत और दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं।
  • सामने आए कथित ऑडियो में महिला को निजी तौर पर मिलने के लिए कहे जाने की बातचीत बताई जा रही है; कलेक्टर के अनुसार प्रारंभिक जांच में आवाज CMO की होने की पुष्टि हुई।
  • महिला ने आरोप लगाया कि कथित मांग नहीं मानने के बाद उसे नौकरी से हटा दिया गया और उसकी ऑनलाइन उपस्थिति आईडी भी बंद कर दी गई।
  • उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के अनुसार मामले में CMO के निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है और उन्हें संयुक्त संचालक कार्यालय, रीवा से अटैच किए जाने की जानकारी सामने आई है।

रीवा। चाकघाट नगर परिषद के प्रभारी मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) शंखधर पांडेय पर महिला कंप्यूटर ऑपरेटर ने आपत्तिजनक बातचीत और अनुचित दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले से जुड़ा एक कथित ऑडियो सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू की। रीवा कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी के अनुसार, SDM स्तर की प्रारंभिक जांच में ऑडियो में सुनाई देने वाली आवाज CMO की होने की पुष्टि हुई है। इसके बाद मामले में प्रशासनिक कार्रवाई की गई।

ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, CMO शंखधर पांडेय को निलंबित कर संयुक्त संचालक कार्यालय, रीवा से अटैच किया गया है। हालांकि, महिला द्वारा लगाए गए सभी आरोपों और कथित बातचीत के पूरे संदर्भ की विस्तृत जांच अभी अलग-अलग स्तर पर जारी रह सकती है।



महिला ने क्या आरोप लगाए?

महिला कंप्यूटर ऑपरेटर ने शिकायत में आरोप लगाया कि CMO ने उससे निजी तौर पर मिलने और कुछ समय कमरे में साथ रहने के लिए कहा। शिकायत के अनुसार, उसे यह भरोसा भी दिलाया गया कि इस मुलाकात की जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को नहीं होगी। मामले से जुड़ा एक ऑडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें अधिकारी की आवाज होने का दावा किया जा रहा है।

महिला का आरोप है कि उसने इस तरह की मांग मानने से इनकार किया तो उसके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई और बाद में उसे नौकरी से हटा दिया गया।

कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि महिला स्वयं शिकायत लेकर उनके पास पहुंची थी। उनके निर्देश पर SDM से प्रारंभिक जांच कराई गई। प्रशासन की ओर से सामने आए बयान के अनुसार, जांच में कथित ऑडियो में आवाज CMO की होने की पुष्टि की गई।

2018 से नगर परिषद में काम करने का दावा

महिला ने अपनी शिकायत में बताया कि वह 15 मार्च 2018 से चाकघाट नगर परिषद में दैनिक वेतन पर कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में काम कर रही थी। उसके अनुसार, 18 जून 2026 को कार्यालय में उसकी टेबल पर रखा कंप्यूटर नगर परिषद अध्यक्ष और CMO उठाने लगे। महिला ने इस दौरान अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज किए जाने का आरोप लगाया है।

महिला का कहना है कि उसे नौकरी से हटाने की धमकी भी दी गई थी। उसने इस घटना की पुष्टि के लिए नगर परिषद कार्यालय में लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने और जांच में शामिल करने की मांग की है। ये आरोप शिकायतकर्ता के हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि का दावा उपलब्ध जानकारी में नहीं है।

कथित बातचीत के बाद नौकरी से हटाने का आरोप

महिला ने आरोप लगाया कि कथित आपत्तिजनक मांग स्वीकार नहीं करने के बाद उसके खिलाफ कार्रवाई की गई। शिकायत के मुताबिक, CMO ने बैकडेट में पत्र जारी कर उसे नौकरी से हटाया। महिला का दावा है कि 24 जून 2026 से उसकी ऑनलाइन उपस्थिति आईडी भी बंद कर दी गई।

महिला ने करीब छह महीने से वेतन नहीं मिलने और लगभग ढाई साल से EPF की राशि उसके खाते में जमा नहीं किए जाने का भी आरोप लगाया है। इन वित्तीय और सेवा संबंधी दावों की अलग से जांच की जानी है।

2023 की नियुक्तियों को लेकर भी लगाए आरोप

महिला ने शिकायत में नगर परिषद में वर्ष 2023 में हुई दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की नियुक्तियों का भी उल्लेख किया है। उसके अनुसार, तत्कालीन CMO केएन सिंह के कार्यकाल में हुई इन नियुक्तियों को लेकर बाद में जांच हुई थी।

महिला का आरोप है कि इस मामले में उस पर तत्कालीन CMO केएन सिंह के खिलाफ व्यक्तिगत और चरित्र संबंधी आरोप लिखकर अधिकारियों को देने का दबाव बनाया गया था। उसने ऐसा करने से इनकार किया। महिला के मुताबिक, इसके बाद विवाद बढ़ा और उसने अधिकारियों के दबाव में स्टाफ के सामने माफी भी मांगी, लेकिन बाद में उसे नौकरी से हटा दिया गया।

नगर परिषद अध्यक्ष पर भी आरोप

महिला ने अपनी शिकायत में नगर परिषद अध्यक्ष विभव कुमार जायसवाल पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। 18 जून की कार्यालयीन घटना में अध्यक्ष और CMO दोनों की मौजूदगी का उल्लेख शिकायत में किया गया है। महिला ने इस घटना से जुड़े CCTV फुटेज की जांच की मांग की है।

हालांकि, अध्यक्ष के खिलाफ लगाए गए आरोपों और इस पूरे घटनाक्रम में उनकी भूमिका के संबंध में उपलब्ध जानकारी में किसी स्वतंत्र जांच के अंतिम निष्कर्ष की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन आरोपों को शिकायतकर्ता के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

कलेक्टर की जांच के बाद कमिश्नर स्तर पर कार्रवाई

मामला सामने आने के बाद महिला मंगलवार को रीवा कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी के पास पहुंची। कलेक्टर ने SDM को प्रारंभिक जांच के निर्देश दिए। प्रशासन के अनुसार, जांच में कथित ऑडियो की आवाज CMO शंखधर पांडेय की होने की पुष्टि हुई।

इसके बाद मामला कमिश्नर कार्यालय भेजा गया। ताजा रिपोर्टों में बताया गया है कि शंखधर पांडेय को निलंबित कर संयुक्त संचालक कार्यालय, रीवा में अटैच किया गया है

CMO के निलंबन के बाद भी महिला की शिकायत में लगाए गए अन्य आरोप—नौकरी से हटाने की प्रक्रिया, वेतन, EPF, CCTV फुटेज और नगर परिषद अध्यक्ष से जुड़े आरोप—अलग-अलग जांच का विषय हो सकते हैं।

महिला पहले भी दे चुकी है आवेदन

महिला के मुताबिक, उसने इस मामले में पहले भी चाकघाट थाना प्रभारी, श्रम पदाधिकारी रीवा, कलेक्टर, नगरीय प्रशासन विभाग के संयुक्त संचालक और पुलिस अधीक्षक को आवेदन दिए थे। अब उसने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त से मामले की विस्तृत जांच, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई, नौकरी बहाली तथा वेतन और EPF से जुड़े मामलों की जांच की मांग की है।

ऑडियो और आरोपों की जांच क्यों महत्वपूर्ण?

इस मामले में प्रशासनिक जांच में ऑडियो की आवाज को लेकर पुष्टि का दावा सामने आया है, लेकिन ऑडियो की पूरी रिकॉर्डिंग, उसकी परिस्थितियां और बातचीत का पूरा संदर्भ भी महत्वपूर्ण हैं। किसी रिकॉर्डिंग में आवाज की पहचान हो जाना अपने आप में बातचीत के हर आरोप को अंतिम रूप से सिद्ध नहीं करता।

इसी तरह महिला द्वारा नौकरी से हटाए जाने, वेतन नहीं मिलने, EPF जमा नहीं होने और अन्य अधिकारियों की भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों पर दस्तावेज, CCTV रिकॉर्डिंग, सेवा रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों के बयान महत्वपूर्ण होंगे।

फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई शुरू हो चुकी है। मामले में आगे की जांच और संबंधित अधिकारियों के निष्कर्ष के आधार पर ही आरोपों की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

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