गणेश उत्सव का पांचवां दिन शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के दिन गणपति स्थापना के बाद पांच दिन की पूजा पूरी करने वाले परिवार इस दिन नियमित पूजा के साथ गणपति बप्पा को विदाई भी दे सकते हैं। हालांकि पांचवें दिन विसर्जन करना सभी भक्तों के लिए जरूरी नहीं है। गणपति को अलग-अलग परिवारों में डेढ़, तीन, पांच, सात या दस दिनों तक रखने की परंपरा है।
पांचवें दिन की पूजा में भगवान गणेश के उसी स्थापित स्वरूप की आराधना की जाती है। अलग-अलग परंपराओं में गणपति के नाम और स्वरूप के अनुसार पूजा का विधान बदल सकता है। इसलिए किसी एक स्वरूप को पांचवें दिन के लिए अनिवार्य मानने के बजाय परिवार की परंपरा के अनुसार गणपति पूजन करना उचित माना जाता है।
पांचवें दिन किस स्वरूप की पूजा करें?
गणेश जी को विघ्नहर्ता, सिद्धिविनायक, एकदंत, लंबोदर और गणपति जैसे अनेक नामों से पूजा जाता है। पांचवें दिन के लिए किसी एक स्वरूप की पूजा का ऐसा सार्वभौमिक नियम नहीं है, जो पूरे देश में समान रूप से लागू हो। घर में जिस स्वरूप में गणपति की स्थापना की गई है, उसी स्वरूप की पूजा जारी रखी जा सकती है।
पूजा के दौरान गणपति को विघ्नों को दूर करने और परिवार में सुख-शांति, बुद्धि, समृद्धि तथा मंगल की कामना के साथ पूजा जाता है। धार्मिक परंपराओं में गणेश जी को किसी भी शुभ कार्य से पहले प्रथम पूज्य माना जाता है।
18 सितंबर को गणपति विसर्जन का शुभ मुहूर्त
जिन भक्तों ने गणपति की स्थापना पांच दिनों के लिए की है, वे 18 सितंबर को विसर्जन कर सकते हैं। उपलब्ध पंचांग गणनाओं में अलग-अलग स्थानों के अनुसार मुहूर्त में कुछ अंतर है। एक पंचांग के अनुसार 18 सितंबर को सुबह 6:26 बजे से 11:01 बजे तक शुभ समय बताया गया है, जबकि एक अन्य गणना में सुबह 6:11 से 10:45 बजे, दोपहर 12:17 से 1:48 बजे और शाम 4:51 से 6:22 बजे तक अलग-अलग शुभ चौघड़िया दिए गए हैं। स्थानीय शहर के पंचांग के अनुसार समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।
इसलिए रीवा या किसी अन्य शहर में विसर्जन करने वाले श्रद्धालु स्थानीय पंचांग में दिए गए समय को प्राथमिकता दे सकते हैं। पांचवें दिन विसर्जन करना धार्मिक रूप से सभी गणपति स्थापनाओं के लिए अनिवार्य नहीं है। जिस अवधि के लिए स्थापना की गई है, उसी परंपरा के अनुसार विसर्जन किया जा सकता है।
गणेश जी की पूजा की पूरी विधि
सबसे पहले पूजा स्थान की सफाई करें और गणपति की प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं। इसके बाद हाथ में जल लेकर पूजा का संकल्प लें। गणपति का ध्यान करते हुए उन्हें पुष्प और अक्षत अर्पित करें।
- आवाहन और ध्यान: भगवान गणेश का ध्यान करके पूजा शुरू करें।
- स्नान और श्रृंगार: यदि स्थापित प्रतिमा की परंपरा में संभव हो तो जल या पंचामृत से प्रतीकात्मक स्नान कराएं और वस्त्र, चंदन व सिंदूर अर्पित करें।
- दूर्वा और फूल: गणपति को दूर्वा और लाल फूल अर्पित करें। दूर्वा गणेश पूजा की प्रमुख सामग्री मानी जाती है।
- धूप और दीप: धूप तथा दीप प्रज्ज्वलित कर भगवान गणेश की आराधना करें।
- नैवेद्य: मोदक, लड्डू, फल या घर में तैयार सात्विक प्रसाद अर्पित करें।
- मंत्र जाप: गणेश मंत्र का जाप करें और अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें।
- आरती: अंत में गणेश जी की आरती करें और परिवार के सभी सदस्य भगवान का आशीर्वाद लें।
गणेश जी को क्या भोग लगाएं?
गणपति पूजा में मोदक और लड्डू का विशेष महत्व माना जाता है। इसके अलावा केला, नारियल, अन्य फल और घर में तैयार सात्विक प्रसाद अर्पित किया जा सकता है। गणेश पूजा में दूर्वा और लाल फूल भी प्रमुख रूप से चढ़ाए जाते हैं।
कई परंपराओं में 21 दूर्वा और 21 मोदक अर्पित करने की परंपरा भी मिलती है। हालांकि इसकी संख्या परिवार और स्थानीय पूजा-पद्धति के अनुसार अलग हो सकती है।
गणेश जी के प्रमुख मंत्र
गणेश मूल मंत्र:
ॐ गं गणपतये नमः॥
वक्रतुण्ड मंत्र:
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
गणेश गायत्री मंत्र:
ॐ एकदन्ताय विद्धमहे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ति प्रचोदयात्॥
गणेश जी की आरती
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एकदंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
पान चढ़े, फल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
अगर पांचवें दिन विसर्जन करना है तो क्या करें?
विसर्जन से पहले गणपति की नियमित पूजा करें। भगवान को फूल, दूर्वा, फल और भोग अर्पित करें। इसके बाद आरती करें और परिवार के साथ गणपति से जाने-अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें।
इसके बाद प्रतिमा को सम्मानपूर्वक विसर्जन स्थल तक ले जाएं। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए मिट्टी की प्रतिमा का विसर्जन घर पर बने कृत्रिम टैंक या निर्धारित विसर्जन स्थल पर किया जा सकता है। सार्वजनिक विसर्जन के लिए स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए।
धार्मिक मान्यता के अनुसार विसर्जन के समय भक्त गणपति बप्पा से अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना करते हैं। पांचवें दिन विसर्जन की परंपरा कई परिवारों में प्रचलित है, लेकिन जिन लोगों ने सात या दस दिनों के लिए गणपति स्थापित किए हैं, वे अपनी निर्धारित अवधि तक पूजा जारी रखेंगे। 2026 में अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को है।
पांचवें दिन पूजा का महत्व
गणेश उत्सव के दौरान प्रतिदिन गणपति की पूजा, आरती और नैवेद्य अर्पित करने की परंपरा है। पांचवें दिन पूजा करने वाले श्रद्धालु परिवार की सुख-शांति, समृद्धि, स्वास्थ्य और कार्यों में सफलता की प्रार्थना करते हैं। पांच दिन की स्थापना वाले परिवारों के लिए यह दिन पूजा के समापन और गणपति विसर्जन से जुड़ा होता है।
गणेश उत्सव की अवधि परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए पांचवें दिन पूजा करने वाले श्रद्धालु अपनी स्थापित परंपरा के अनुसार पूजा और विसर्जन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।