✍️ रीवा से अर्पित तिवारी की रिपोर्ट•Published On 19th Aug, 2026 @ 10:50 AM
Updated On 19th Aug, 2026 @ 10:52 AM
रीवा में टेस्टिंग लैब मैनेजर से रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए लोक निर्माण विभाग के प्रभारी चीफ इंजीनियर कैलाश कुमार लच्छे को विभाग ने निलंबित कर प्रमुख अभियंता कार्यालय भोपाल मुख्यालय नियत किया।
TCE रीवा न्यूज डेस्क। मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के प्रभारी मुख्य अभियंता कैलाश कुमार लच्छे पर शासन ने निलंबन की बड़ी कार्रवाई की है। रीवा में पदस्थ रहे कैलाश कुमार लच्छे को करीब सप्ताह भर पहले लोकायुक्त पुलिस की टीम ने 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा था। इस गंभीर भ्रष्टाचार के मामले का संज्ञान लेते हुए विभाग ने उनके इस कृत्य को मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियमों के घोर विपरीत माना और उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय कार्यालय प्रमुख अभियंता लोक निर्माण विभाग, भोपाल निर्धारित किया गया है।
₹1 लाख की मासिक रिश्वत की मांग, ₹50 हजार लेते पकड़ाए थे
लोकायुक्त पुलिस द्वारा दर्ज प्रकरण के अनुसार, प्रभारी मुख्य अभियंता कैलाश कुमार लच्छे पर टेस्टिंग लैब पीवीपी एलटीडी (PVP LTD) के मैनेजर सोनू सिंह से काम के एवज में हर महीने 1 लाख रुपये की बंधी (रिश्वत) मांगने का आरोप है। शिकायतकर्ता के अनुसार, मांगी गई राशि में से 50 हजार रुपये का आधा हिस्सा पहले ही दिया जा चुका था।
शेष बचे 50 हजार रुपये की दूसरी किस्त लेते समय लोकायुक्त पुलिस रीवा की विशेष टीम ने जाल बिछाकर कैलाश कुमार लच्छे को उनके निजी सहयोगी धर्मवीर भारती (निवासी विदिशा) के साथ रंगे हाथ दबोच लिया था। लोकायुक्त पुलिस ने दोनों आरोपियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर विवेचना में लिया है।
मूल पद ईई, लेकिन संभाल रहे थे चीफ इंजीनियर का प्रभार
कैलाश कुमार लच्छे के पद और प्रभार को लेकर विभागीय स्तर पर लंबे समय से विवाद और सवाल उठते रहे हैं। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार उनका मूल पद कार्यपालन यंत्री (EE) है। लेकिन नियमों को दरकिनार करते हुए उन्हें पहले अधीक्षण यंत्री (SE) और उसके बाद सीधे प्रभारी मुख्य अभियंता (Chief Engineer) जैसे अति-महत्वपूर्ण और संवेदनशील पद का प्रभार सौंप दिया गया था। इसके अतिरिक्त उन पर टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता और पक्षपात से जुड़े कई गंभीर आरोप भी पूर्व में लगते रहे हैं।
विधानसभा के मानसून सत्र में भी गूंजा था लच्छे के प्रभार का मुद्दा
विभागीय पदोन्नति और प्रभार के इस खेल का मुद्दा मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान भी जोर-शोर से गूंजा था। सेमरिया से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने सदन में ध्यानाकर्षण के माध्यम से कैलाश कुमार लच्छे को ईई से सीधे अधीक्षण यंत्री और फिर प्रभारी मुख्य अभियंता बनाए जाने का मामला प्रमुखता से उठाया था। विधायक ने सदन में सवाल किया था कि विभाग में कई वरिष्ठ और पात्र अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद कनिष्ठ अधिकारी को इतने बड़े पद का प्रभार किस आधार पर दिया गया। अब लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाई और शासन के निलंबन आदेश के बाद विभागीय कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों पर मुहर लग गई है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. पीडब्ल्यूडी के प्रभारी मुख्य अभियंता कैलाश कुमार लच्छे को क्यों निलंबित किया गया?
उन्हें टेस्टिंग लैब के मैनेजर से ₹50,000 की रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त पुलिस द्वारा रंगे हाथ पकड़े जाने के बाद भ्रष्टाचार और आचरण नियमों के उल्लंघन पर निलंबित किया गया है।
2. निलंबन अवधि में लच्छे का मुख्यालय कहां नियत किया गया है?
शासन के आदेशानुसार निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय प्रमुख अभियंता कार्यालय, लोक निर्माण विभाग भोपाल तय किया गया है।
3. लोकायुक्त ने इस मामले में और किसे आरोपी बनाया है?
लोकायुक्त पुलिस ने कैलाश कुमार लच्छे के साथ उनके प्राइवेट सहयोगी धर्मवीर भारती (निवासी विदिशा) के खिलाफ भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।
4. क्या विधानसभा में भी लच्छे के प्रभार को लेकर सवाल उठे थे?
हां, विधानसभा के मानसून सत्र में कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने वरिष्ठ अधिकारियों की अनदेखी कर ईई स्तर के अधिकारी को मुख्य अभियंता का प्रभार दिए जाने पर सरकार से जवाब मांगा था।