✍️ विशेष संवाददाता•Published On 19th Aug, 2026 @ 12:38 AM
पीएम केयर्स फंड की ताजा ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार घरेलू और विदेशी दोनों तरह के चंदों में गिरावट दर्ज की गई है, हालांकि कुल फंड बैलेंस बढ़कर 8,452 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।
TCE नेशनल डेस्क। प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और आपात स्थिति राहत कोष (PM CARES Fund) की वित्तीय वर्ष 2024-25 की ताजा ऑडिट रिपोर्ट जारी हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, फंड में मिलने वाले स्वैच्छिक योगदान में गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में पीएम केयर्स फंड में मिलने वाला घरेलू दान (Domestic Donation) करीब 30 प्रतिशत घटकर लगभग 479 करोड़ रुपये रह गया है। वहीं, विदेशी योगदान में भी 18 प्रतिशत की कमी आई है और यह घटकर मात्र 92.8 लाख रुपये पर आ गया है। हालांकि, ब्याज और पुराने संचित कोष के चलते फंड का कुल कॉर्पस बढ़कर 8,452 करोड़ रुपये हो गया है।
घरेलू और विदेशी चंदे के आंकड़े
ऑडिट रिपोर्ट के आंकड़ों की तुलना करें तो इससे पूर्व 2023 में पीएम केयर्स फंड को घरेलू स्रोतों से 681 करोड़ रुपये और विदेशी स्रोतों से 1.13 करोड़ रुपये का चंदा प्राप्त हुआ था। वर्ष 2024 में फंड में मौजूद कुल राशि 7,173 करोड़ रुपये दर्ज की गई थी, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 8,452 करोड़ रुपये हो गई है।
PM Care में घरेलू दान
| साल |
घरेलू दान |
| 2020-21 |
7184 करोड़ |
| 2021-22 |
1896 करोड़ |
| 2022-23 |
909 करोड़ |
| 2023-24 |
681.8 करोड़ |
| 2024-25 |
479 करोड़ रुपए |
विदेशी फंडिंग में भारी गिरावट का रुझान
पीएम केयर्स फंड में विदेशी दान (Foreign Contribution) का प्रवाह शुरुआती वर्षों की तुलना में काफी कम हुआ है:
- 2020-21: शुरुआती वित्त वर्ष में विदेशों से रिकॉर्ड 495 करोड़ रुपये का दान मिला था।
- 2021-22 और 2022-23: अगले दो वित्त वर्षों में विदेशी दान तेजी से घटकर क्रमशः 40 करोड़ रुपये और 2.57 करोड़ रुपये रह गया।
- 2023-24: इस वित्त वर्ष में 1.13 करोड़ रुपये की विदेशी सहायता मिली।
- 2024-25: विदेशी योगदान घटकर 92.8 लाख रुपये रहा, जो 2019-20 (39.7 लाख रुपये) के बाद का सबसे निचला स्तर है।
कोविड संकट, ऑक्सीजन प्लांट और बच्चों की योजनाओं पर खर्च
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मार्च 2020 में कोरोना महामारी के प्रकोप के बाद आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए पीएम केयर्स फंड की स्थापना की थी। प्रधानमंत्री इस ट्रस्ट के पदेन अध्यक्ष होते हैं। इस फंड को सरकारी बजट से कोई वित्तीय आवंटन नहीं मिलता बल्कि यह पूरी तरह स्वैच्छिक दान पर निर्भर है।
फंड का उपयोग समय-समय पर आपातकालीन स्वास्थ्य अधोसंरचना तैयार करने में किया गया है:
- ऑक्सीजन प्लांट और वेंटिलेटर: 2021-22 के दौरान प्रेशर स्विंग ऐड्सॉर्प्शन (PSA) मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए 1,703 करोड़ रुपये और वेंटिलेटर खरीद के लिए 835 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। उस वर्ष फंड का कुल व्यय लगभग 1,938 करोड़ रुपये रहा था।
- पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन: कोविड में अनाथ हुए बच्चों की सहायता के लिए शुरू की गई इस योजना पर 2023 में 15.37 करोड़ रुपये और 2024 में 15.6 करोड़ रुपये का खर्च किया गया।
आरटीआई का दायरा और स्वतंत्र ऑडिट व्यवस्था
पीएम केयर्स फंड को औपचारिक रूप से सरकारी फंड नहीं माना गया है। केंद्र सरकार का पक्ष रहा है कि यह एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट (Public Charitable Trust) है, जिसके चलते यह सीधे तौर पर सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) के दायरे में नहीं आता। हालांकि, इस व्यवस्था और फंड को आरटीआई के दायरे में लाने की मांग से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
इस फंड का ऑडिट भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) द्वारा नहीं किया जाता, बल्कि एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) फर्म द्वारा इसका वार्षिक ऑडिट संपन्न कराया जाता है। ट्रस्ट के नियमों के अनुसार इसका उपयोग केवल महामारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं, स्वास्थ्य आपातकाल और अन्य गंभीर मानवीय संकटों में राहत कार्यों के लिए किया जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. वर्ष 2025 में पीएम केयर्स फंड में कितना घरेलू और विदेशी दान मिला?
वर्ष 2025 में घरेलू दान करीब ₹479 करोड़ (30% की गिरावट) और विदेशी दान ₹92.8 लाख (18% की गिरावट) रहा।
2. पीएम केयर्स फंड में कुल कितनी रकम जमा है?
ताजा ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में फंड का कुल संचित कॉर्पस बढ़कर ₹8,452 करोड़ हो गया है, जो 2024 में ₹7,173 करोड़ था।
3. क्या पीएम केयर्स फंड का ऑडिट CAG द्वारा किया जाता है?
नहीं, पीएम केयर्स फंड का ऑडिट सीएजी (CAG) द्वारा नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म द्वारा किया जाता है।
4. क्या पीएम केयर्स फंड आरटीआई (RTI) के दायरे में आता है?
सरकार के अनुसार यह एक चैरिटेबल ट्रस्ट होने के कारण सीधे आरटीआई के दायरे में नहीं आता, हालांकि यह मामला शीर्ष अदालत में विचाराधीन है।