✍️ विशेष संवाददाता•Published On 8th Sept, 2026 @ 10:21 AM
रीवा के श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन विभाग के नेतृत्व में बदलाव किया गया है। नए Dean के आने के बाद डॉ. प्रदीप बघेल को विभागाध्यक्ष पद से हटाकर डॉ. मनोज इंदुरकर को जिम्मेदारी दी गई है। यह बदलाव उस घटना के कुछ दिन बाद हुआ है, जिसमें संजय गांधी अस्पताल में एक जीवित मरीज को मृत घोषित कर दिया गया था और बाद में उसकी सांसें चलती मिली थीं।
रीवा: श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में प्रशासनिक बदलाव के बाद अब मेडिसिन विभाग में भी जिम्मेदारी बदली गई है। विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप बघेल को पद से हटाकर डॉ. मनोज इंदुरकर को मेडिसिन विभाग का विभागाध्यक्ष बनाया गया है। यह बदलाव उस समय हुआ है, जब संजय गांधी अस्पताल में एक मरीज को जीवित होने के बावजूद मृत घोषित किए जाने का मामला चर्चा में है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार नए Dean के कार्यभार संभालने के बाद मेडिसिन विभाग में बदलाव किया गया। डॉ. इंदुरकर को विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आदेश जारी होने के बाद डॉ. बघेल के अवकाश पर चले जाने की जानकारी भी सामने आई है।
जिंदा मरीज को मृत घोषित करने के बाद उठे थे सवाल
संजय गांधी अस्पताल के मेडिसिन विभाग में 5 सितंबर को एक बुजुर्ग मरीज को इलाज के दौरान मृत घोषित किए जाने का मामला सामने आया था। परिजनों को मृत्यु की जानकारी देने और शव ले जाने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद मरीज में सांस और हरकत महसूस हुई। इसके बाद उसे दोबारा अस्पताल में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया।
मामले में विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप बघेल ने प्रथम दृष्टया चिकित्सकीय स्तर पर चूक की बात स्वीकार की थी। उन्होंने जांच कराने और लापरवाही सामने आने पर संबंधित चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी। इस घटना की स्वतंत्र रिपोर्टों में भी पुष्टि हुई है।
डॉ. इंदुरकर को मिली जिम्मेदारी
मेडिसिन विभाग में अब डॉ. मनोज इंदुरकर को विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह बदलाव नए Dean के आने के बाद किया गया है। डॉ. इंदुरकर इससे पहले मेडिकल कॉलेज में महत्वपूर्ण प्रशासनिक और चिकित्सकीय जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
डॉ. इंदुरकर को जिम्मेदारी दिए जाने के बाद विभाग की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की उम्मीद है। मरीजों के उपचार, सीनियर डॉक्टरों की निगरानी और विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर मेडिकल कॉलेज प्रबंधन पहले ही समीक्षा के दौर में है।
क्या मरीज को मृत घोषित करने के मामले में हुई कार्रवाई?
मेडिसिन विभागाध्यक्ष बदलने का घटनाक्रम मरीज को मृत घोषित किए जाने के मामले के बाद सामने आया है। हालांकि उपलब्ध प्रशासनिक जानकारी में यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा गया है कि डॉ. बघेल को हटाना इसी घटना में दंडात्मक कार्रवाई है। इसलिए दोनों घटनाओं के बीच सीधा कारण-परिणाम संबंध स्थापित करना फिलहाल उचित नहीं होगा।
हालांकि, जिस समय यह बदलाव हुआ है, वह संजय गांधी अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों के बीच महत्वपूर्ण है। अस्पताल प्रबंधन पर मरीजों के उपचार और निगरानी व्यवस्था को लेकर लगातार दबाव बना हुआ है।
अस्पताल में उपचार व्यवस्था की निगरानी पर जोर
इस बीच उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने मेडिकल कॉलेज में उपचार व्यवस्था की निगरानी को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने विभागाध्यक्ष और Dean को मिलकर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने तथा सीनियर डॉक्टरों की जिम्मेदारियों और वार्ड निरीक्षण की व्यवस्था को बेहतर तरीके से लागू करने पर जोर दिया है।
मेडिकल कॉलेज और संजय गांधी अस्पताल में मरीजों के उपचार की निगरानी के लिए बेहतर व्यवस्था तैयार करने की बात भी सामने आई है। प्रशासनिक स्तर पर अस्पताल की कार्यप्रणाली की समीक्षा का दौर जारी है।
कल्पना मिश्रा की मौत के बाद पहले भी हुई कार्रवाई
संजय गांधी अस्पताल में प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन पर कार्रवाई का सिलसिला शुरू हुआ था। दो डॉक्टरों और दो Nursing Officers को निलंबित किया गया था। इसके बाद अस्पताल के अधीक्षक को भी बदला गया और 6 सितंबर को मेडिकल कॉलेज के Dean डॉ. सुनील कुमार अग्रवाल का तबादला कर डॉ. शशिधर प्रसाद गर्ग को रीवा की जिम्मेदारी दी गई।
अब मेडिसिन विभागाध्यक्ष का बदलाव अस्पताल की व्यवस्था में किए जा रहे लगातार प्रशासनिक फेरबदल की अगली कड़ी माना जा रहा है। हालांकि अलग-अलग कार्रवाइयों के औपचारिक कारणों को संबंधित आदेशों के आधार पर ही अंतिम रूप से जोड़ा जाना चाहिए।
मरीज की स्थिति पर भी निगरानी
जिस मरीज को मृत घोषित किए जाने का मामला सामने आया था, उसका बाद में दोबारा उपचार शुरू किया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मरीज की हालत गंभीर थी और उसे चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया था। घटना की जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि मृत्यु घोषित करने से पहले निर्धारित Medical Protocol का पालन किस स्तर तक किया गया था।
फिलहाल मेडिसिन विभाग की कमान डॉ. मनोज इंदुरकर को सौंपे जाने के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली और मरीजों की उपचार व्यवस्था पर प्रशासन की निगरानी आगे भी जारी रहने की संभावना है।