✍️ विशेष संवाददाता•Published On 7th Sept, 2026 @ 10:17 AM
मध्य प्रदेश में 11 IAS अधिकारियों के तबादले के बाद 2011 बैच की IAS अधिकारी नेहा मारव्या सिंह का एक संदेश चर्चा में है। उन्होंने IAS अधिकारियों के Group में कहा कि पिछले एक साल में यह उनका चौथा Transfer है और मौजूदा पद पर Joining के करीब 50 दिन बाद ही तबादला कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि कुछ कर्मचारियों ने कथित तौर पर उनके खिलाफ विद्रोह किया, Transfer कराने की धमकी दी और शिकायत के बावजूद कार्रवाई उनके खिलाफ हुई।
मध्य प्रदेश की IAS अधिकारी नेहा मारव्या सिंह का एक संदेश इन दिनों प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। 2011 बैच की IAS अधिकारी ने पिछले एक साल में चौथी बार Transfer होने पर अपने साथियों के बीच अपना दर्द साझा किया है। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा Assignment पर Joining के करीब 50 दिन बाद ही उनका फिर Transfer कर दिया गया।
नेहा मारव्या ने IAS अधिकारियों के Group में अपने संदेश में कहा कि वह सरकारी आदेशों का सम्मान करती हैं और राज्य सरकार उन्हें जहां भी Duty दे, वहां काम करने के लिए तैयार हैं। लेकिन इस बार का Transfer उन्हें बेहद निराशाजनक लगा। उनके मुताबिक, कम समय में बार-बार Posting बदलने से किसी अधिकारी को किसी Assignment को समझने और प्रभावी ढंग से काम करने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाता।
‘एक साल में चौथी बार Transfer’
नेहा मारव्या ने अपने संदेश में कहा कि पिछले एक साल में यह चौथी बार है जब उनका नाम Transfer List में आया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसी अधिकारी को किसी पद की जिम्मेदारी संभालने और वहां के कामकाज को समझने में समय लगता है, तो महज कुछ महीनों में उसे बदल देने से वह प्रभावी तरीके से काम कैसे कर पाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि कई बार उनका Tenure केवल 2-3 महीने का रह जाता है। उनके मुताबिक, जब तक वह किसी पद की जिम्मेदारियों और कामकाज को समझ पाती हैं, तब तक Transfer हो जाता है।
‘मेरी टेबल पर हाथ पटका और Transfer की धमकी दी’
अपने संदेश में Neha Marvya ने कुछ कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि संबंधित कर्मचारियों का Establishment Control सीधे उनके पास नहीं था, फिर भी उन्होंने कथित तौर पर उनके साथ अनुशासनहीनता की और Transfer कराने की धमकी दी।
उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारी उनकी टेबल पर आए, हाथ पटका और उन्हें Transfer कराने की बात कही। Neha के मुताबिक, उन्होंने कर्मचारियों की कथित Insubordination, Files रोकने और अपने साथ हुए दुर्व्यवहार की जानकारी उचित माध्यम से वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई थी।
उनका कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि शिकायत पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी, लेकिन उनके मुताबिक इसके बजाय उनका ही Transfer कर दिया गया।
‘क्या IAS अधिकारी इतना कमजोर है?’
Neha Marvya ने अपने संदेश में व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या कोई IAS अधिकारी इतना कमजोर हो सकता है कि उसके साथ काम करने वाले कर्मचारी ही उसके खिलाफ विद्रोह करके उसका Transfer कराने में सफल हो जाएं?
उन्होंने यह भी कहा कि किसी अधिकारी के Join करने के कुछ ही समय बाद इस तरह का माहौल बनना सामान्य स्थिति नहीं हो सकती। उनके अनुसार, यदि कर्मचारियों को यह भरोसा हो जाए कि अधिकारी उनकी इच्छा के अनुसार काम नहीं करेगा तो वे उसका Transfer करा सकते हैं, तो इसका असर पूरी प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ सकता है।
‘मैंने लंबे समय तक चुप्पी और धैर्य रखा’
IAS अधिकारी ने अपने संदेश में कहा कि उन्होंने लंबे समय तक चुप्पी और धैर्य बनाए रखा। उनका दावा है कि उन्हें लंबे समय तक पर्याप्त काम नहीं दिया गया और वह उम्मीद करती रहीं कि परिस्थितियां समय के साथ बेहतर होंगी।
लेकिन उनके मुताबिक स्थिति सुधरने के बजाय और खराब होती गई। उन्होंने कहा कि अब स्थिति यहां तक पहुंच गई कि उनके मातहत कर्मचारी ही उन्हें Transfer कराने की धमकी देने लगे।
नए Transfer Order में Neha Marvya को क्या जिम्मेदारी मिली?
मध्य प्रदेश सरकार ने 5 सितंबर 2026 को 11 IAS अधिकारियों के Transfer और Posting Orders जारी किए। इस फेरबदल में Neha Marvya Singh को उनके पहले के Tribal Development से जुड़े कई पदों से हटाकर Managing Director, MP Scheduled Tribes Finance & Development Corporation की जिम्मेदारी दी गई है।
Transfer Order के अनुसार यह पद Additional Secretary के समकक्ष है। उनके पुराने पदों में Director, Tribal Area Development Schemes, Managing Director, MAPCET, Managing Director, MP Scheduled Tribes Finance & Development Corporation और Director, Tribal Research & Development Institute शामिल थे।
Transfer की सरकारी वजह और Neha के आरोप अलग-अलग हैं
इस मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि उपलब्ध Transfer and Posting Order में Neha Marvya के Transfer का कोई विस्तृत कारण दर्ज नहीं है। दूसरी ओर, कुछ मीडिया रिपोर्टों ने कर्मचारियों के साथ कथित मतभेद को Transfer से जोड़कर रिपोर्ट किया है। इसलिए इसे Government द्वारा आधिकारिक रूप से घोषित कारण मानना उचित नहीं होगा।
Neha Marvya के आरोप उनके अपने संदेश में किए गए दावों पर आधारित हैं। उपलब्ध जानकारी में अभी ऐसा कोई स्वतंत्र आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है जो उनके द्वारा लगाए गए आरोपों को प्रमाणित करता हो। इसलिए कर्मचारियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को फिलहाल आरोप/दावा के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
पहले भी रही हैं चर्चा में
Neha Marvya Singh का प्रशासनिक Career इससे पहले भी चर्चा में रहा है। वह 2025 में Dindori की Collector बनी थीं। इसके बाद उनका Transfer हुआ और बाद में उन्हें Tribal Development से जुड़े महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी दी गई।
उनकी Posting को लेकर पहले भी प्रशासनिक स्तर पर विवाद और चर्चाएं सामने आती रही हैं। हालांकि पुराने विवादों को वर्तमान Transfer की वजह मानना उचित नहीं होगा, जब तक Government या किसी आधिकारिक जांच में ऐसा स्पष्ट न किया जाए।
अब बड़ा सवाल: बार-बार छोटे Tenure से प्रशासन पर क्या असर?
Neha Marvya के मामले ने एक व्यापक प्रशासनिक सवाल भी खड़ा किया है—क्या अधिकारियों के बहुत छोटे Tenure से शासन और योजनाओं के Implementation पर असर पड़ता है?
किसी भी विभाग में अधिकारी को व्यवस्था समझने, लंबित मामलों की समीक्षा करने, टीम के साथ Coordination बनाने और अपनी कार्ययोजना लागू करने में समय लगता है। ऐसे में बार-बार Transfer होने पर Continuity प्रभावित हो सकती है। हालांकि किसी अधिकारी को कहां और कितने समय के लिए पदस्थ करना है, यह सरकार के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र का विषय है।
फिलहाल Neha Marvya का संदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने खुद अपने Transfer और प्रशासनिक अनुभव को लेकर सवाल उठाए हैं। अब देखना होगा कि उनके आरोपों पर IAS ASSOCIATION, सरकार या संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण सामने आता है या नहीं।