✍️ विशेष संवाददाता•Published On 7th Sept, 2026 @ 8:17 PM
रीवा के Super Specialty Hospital के Cardiology Department ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। अस्पताल की ओर से जारी Press Release के अनुसार, मैहर जिले के अमरपाटन निवासी 72 वर्षीय महिला मरीज में विंध्य क्षेत्र का पहला CRT-P (Cardiac Resynchronization Therapy-Pacemaker) Device सफलतापूर्वक Implant किया गया। मरीज सांस फूलने, कमजोरी, जल्दी थकान और बार-बार Hospitalization की शिकायत के साथ अस्पताल पहुंची थीं। जांच में Heart की Pumping Capacity कम होने के साथ Electrical Coordination में समस्या सामने आई। वरिष्ठ Interventional Cardiologist डॉ. एस.के. त्रिपाठी के नेतृत्व में प्रक्रिया पूरी की गई और अस्पताल के अनुसार मरीज की Post-Procedure स्थिति संतोषजनक है।
रीवा: विंध्य क्षेत्र में Advanced Cardiac Treatment को लेकर रीवा के Super Specialty Hospital ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। अस्पताल की ओर से जारी Press Release के अनुसार, Cardiology Department में मैहर जिले के अमरपाटन निवासी 72 वर्षीय महिला मरीज में CRT-P (Cardiac Resynchronization Therapy-Pacemaker) Device का सफलतापूर्वक Implantation किया गया है। अस्पताल ने इसे विंध्य क्षेत्र में इस प्रकार की पहली सफल प्रक्रिया बताया है।
यह प्रक्रिया वरिष्ठ Interventional Cardiologist एवं Professor डॉ. एस.के. त्रिपाठी के नेतृत्व में की गई। अस्पताल के अनुसार प्रक्रिया के बाद मरीज की स्थिति संतोषजनक है और वह चिकित्सकीय निगरानी में स्वास्थ्य लाभ कर रही हैं।
सांस फूलने और कमजोरी की शिकायत लेकर पहुंची थीं मरीज
अस्पताल की Press Release के मुताबिक 72 वर्षीय महिला मरीज पिछले दिनों अमरपाटन, जिला मैहर से रीवा Super Specialty Hospital के Cardiology Department की OPD में पहुंची थीं। उन्हें सांस फूलने, कमजोरी, जल्दी थकान होने और बार-बार अस्पताल में भर्ती होने जैसी शिकायतें थीं।
Cardiology विभाग में मरीज की विस्तृत जांच की गई। ECG और Echocardiography सहित आवश्यक मूल्यांकन के बाद यह सामने आया कि मरीज के Heart की Pumping Capacity कम थी। साथ ही Heart के अलग-अलग हिस्सों के बीच Electrical Activity में Coordination की समस्या भी बताई गई।
Heart के दोनों Ventricles की Timing में थी समस्या
अस्पताल की जानकारी के अनुसार मरीज के Heart के दोनों निचले कक्ष यानी Ventricles एक ही समय पर ठीक तरह से Contract नहीं कर पा रहे थे। इससे Heart की Pumping Efficiency प्रभावित हो रही थी।
ऐसी स्थिति में Heart के निचले कक्षों की धड़कन को अधिक Coordinated तरीके से काम कराने के लिए Cardiac Resynchronization Therapy का इस्तेमाल किया जाता है। CRT-P एक विशेष प्रकार का Pacemaker है, जो Ventricles को Electrical Signals देकर उनकी Contraction Timing को Synchronize करने में मदद करता है। Mayo Clinic के अनुसार CRT कुछ चुनिंदा Heart Failure मरीजों में इस्तेमाल की जाती है, खासकर जब Ventricles की Electrical Coordination प्रभावित हो। 2
CRT-P क्या है और यह सामान्य Pacemaker से कैसे अलग है?
CRT-P यानी Cardiac Resynchronization Therapy-Pacemaker एक विशेष प्रकार का Biventricular Pacemaker है। इसका उद्देश्य Heart के निचले दोनों कक्षों की धड़कन को बेहतर तरीके से Synchronize करना होता है। इसके लिए Device से Heart तक Leads पहुंचाई जाती हैं, जिनके माध्यम से Electrical Signals दिए जाते हैं।
American Heart Association के अनुसार Biventricular Pacemaker यानी CRT में आम तौर पर तीन Leads का इस्तेमाल होता है, जिन्हें Right Atrium, Right Ventricle और Left Ventricle की ओर स्थापित किया जाता है। इससे Heart के निचले कक्षों की Contraction Timing को Coordinate करने में मदद मिलती है। 3
यहां यह समझना भी जरूरी है कि CRT-P और CRT-D एक ही Device नहीं हैं। CRT-D में Pacemaker के साथ Defibrillator की सुविधा भी होती है, जबकि CRT-P मुख्य रूप से Resynchronization के लिए Pacemaker Therapy देता है। 4
रीवा में कैसे किया गया यह जटिल Implantation?
अस्पताल की Press Release के अनुसार, प्रक्रिया के दौरान Collar Bone के नीचे Chest में Pacemaker Device के लिए स्थान निर्धारित किया गया। इसके बाद Veins के माध्यम से Heart तक पहुंच बनाई गई।
प्रक्रिया में पहली और दूसरी Lead को क्रमशः Right Atrium और Right Ventricle में स्थापित किया गया। तीसरी Lead को Coronary Sinus में स्थापित किया गया, जिसका उद्देश्य Left Ventricle को Electrical Stimulation उपलब्ध कराना था।
इस तरह तीन Leads वाले CRT-P System को स्थापित किया गया। इसके बाद Device को उचित तरीके से स्थापित और जांचा गया। अस्पताल के अनुसार प्रक्रिया सफल रही और मरीज की स्थिति Post-Procedure संतोषजनक रही।
पहले बड़े शहरों पर निर्भर थे मरीज
इस उपलब्धि का महत्व इसलिए भी है क्योंकि CRT जैसी Advanced Cardiac Therapy के लिए विंध्य क्षेत्र के मरीजों को अब तक बड़े Medical Centres और महानगरों का रुख करना पड़ता था। अस्पताल का कहना है कि यह सुविधा रीवा में उपलब्ध होने से गंभीर Cardiac Patients को अपने ही क्षेत्र में Advanced Treatment की सुविधा मिल सकेगी।
इससे मरीजों और उनके परिवारों के लिए Travel, Treatment Coordination और बड़े शहरों में इलाज से जुड़ी अतिरिक्त परेशानियां कम हो सकती हैं। हालांकि किसी मरीज के लिए CRT-P उपयुक्त है या नहीं, इसका निर्णय उसकी Medical Evaluation और Treating Cardiologist की सलाह के आधार पर ही किया जाता है।
डॉ. एस.के. त्रिपाठी के नेतृत्व में पूरी हुई प्रक्रिया
इस जटिल प्रक्रिया का नेतृत्व Senior Interventional Cardiologist एवं Professor डॉ. एस.के. त्रिपाठी ने किया। अस्पताल की ओर से जारी जानकारी में इसे Cardiology Team की सामूहिक मेहनत और समर्पण का परिणाम बताया गया है।
डॉ. त्रिपाठी ने इस उपलब्धि का श्रेय पूरी Team की मेहनत, समर्पण और Patient-Centric Service को दिया। Press Release में उन्होंने उप मुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ल के मार्गदर्शन और स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के प्रयासों का भी उल्लेख किया।
Nursing और Cath Lab Team की भी अहम भूमिका
ऐसी जटिल Cardiac Procedure केवल एक डॉक्टर के स्तर पर पूरी नहीं होती। इसके लिए Cardiology, Cath Lab, Nursing और Technical Support की Coordinated Team की जरूरत होती है।
अस्पताल की Press Release में Nursing Staff से सत्येंद्र और स्वाति तथा Cath Lab Team से जय नारायण मिश्र, मनीष, सोनाली, सुधांश और अमन के योगदान का उल्लेख किया गया है।
अस्पताल प्रबंधन ने पूरी Cardiology Team, Cath Lab, Nursing Staff और Technical Experts को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है।
अस्पताल प्रबंधन ने इसे माना महत्वपूर्ण उपलब्धि
इस सफलता पर चिकित्सा महाविद्यालय के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं अधिष्ठाता डॉ. एस.पी. गर्ग तथा Super Specialty Hospital के अधीक्षक डॉ. अक्षय श्रीवास्तव ने Cardiology Department और पूरी सहयोगी Team को बधाई दी।
अस्पताल प्रबंधन ने विश्वास जताया कि Super Specialty Hospital, रीवा आगे भी Advanced Medical Services के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल करेगा और विंध्य क्षेत्र के मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में काम जारी रखेगा।
मरीज की अब कैसी स्थिति है?
अस्पताल की Press Release के अनुसार CRT-P Implantation के बाद मरीज की स्थिति संतोषजनक है और वह Medical Monitoring में हैं। उपलब्ध जानकारी में यह नहीं बताया गया है कि मरीज को Hospital से कब Discharge किया जाएगा या आगे कितने समय तक Follow-up की जरूरत होगी।
CRT-P Implantation के बाद Device की नियमित Monitoring और Treating Team के निर्देशों का पालन महत्वपूर्ण होता है। Mayo Clinic के अनुसार CRT Device लगने के बाद Medical Team Device की Functioning और मरीज की Clinical स्थिति के अनुसार Follow-up करती है। 5
विंध्य की Cardiac Healthcare में क्यों अहम है यह उपलब्धि?
रीवा Super Specialty Hospital विंध्य क्षेत्र के मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण Tertiary Care Centre के रूप में विकसित हुआ है। Cardiology में Advanced Device Implantation जैसी सुविधा का विस्तार होने से क्षेत्र के गंभीर मरीजों के लिए स्थानीय स्तर पर उपचार के विकल्प बढ़ते हैं।
हालांकि किसी एक प्रक्रिया की सफलता को पूरे क्षेत्र की Cardiac Healthcare व्यवस्था में व्यापक बदलाव का प्रमाण मानना जल्दबाजी होगी। लेकिन अस्पताल में ऐसी Advanced Procedure का सफलतापूर्वक किया जाना निश्चित रूप से स्थानीय Medical Infrastructure और Specialist Services के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
अब आगे क्या?
इस उपलब्धि के बाद सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि ऐसी Advanced Cardiac Procedures की सुविधा को नियमित रूप से उपलब्ध कराया जाए और जरूरतमंद मरीजों के लिए उचित Referral, Evaluation, Implantation और Follow-up की पूरी व्यवस्था मजबूत बनी रहे।
CRT-P जैसी Therapy हर Heart Patient के लिए जरूरी नहीं होती। यह विशिष्ट Clinical Conditions वाले मरीजों के लिए इस्तेमाल की जाती है और इसके लिए Cardiologist द्वारा विस्तृत Evaluation जरूरी होता है। 6
रीवा Super Specialty Hospital की यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अस्पताल के अनुसार यहां पहली बार विंध्य क्षेत्र में CRT-P Implantation सफलतापूर्वक किया गया है। अमरपाटन की 72 वर्षीय महिला मरीज की कम Heart Pumping Capacity और Electrical Coordination की समस्या के मूल्यांकन के बाद डॉ. एस.के. त्रिपाठी के नेतृत्व में तीन Leads वाला CRT-P System Implant किया गया। मरीज की Post-Procedure स्थिति संतोषजनक बताई गई है। यह उपलब्धि रीवा में Advanced Cardiac Treatment की बढ़ती क्षमता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।