✍️ विशेष संवाददाता•Published On 7th Sept, 2026 @ 5:34 PM
मध्य प्रदेश पुलिस को भविष्य के लिए नए नेतृत्व देने की दिशा में DSP के 46वें बैच की Basic Training शुरू हो गई है। भोपाल स्थित मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी, भौंरी में शुरू हुए इस बैच में 17 प्रशिक्षु अधिकारी शामिल हैं, जिनमें 11 महिलाएं और 6 पुरुष हैं। Training में Traditional Policing के साथ BNS, BNSS, Human Rights, Crime Investigation, Technology और आधुनिक Police Management पर विशेष जोर रहेगा।
भोपाल: मध्य प्रदेश पुलिस में नई पीढ़ी के अधिकारियों को तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। भोपाल स्थित मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी, भौंरी में उप पुलिस अधीक्षक यानी DSP के 46वें बैच की Basic Training शुरू हो गई है। इस बैच में कुल 17 प्रशिक्षु अधिकारी शामिल हैं, जिनमें 11 महिला और 6 पुरुष अधिकारी हैं।
इस बैच की खास बात यह है कि महिला अधिकारियों की भागीदारी पुरुष अधिकारियों से अधिक है। कुल प्रशिक्षु अधिकारियों में करीब 65 प्रतिशत महिलाएं हैं। ऐसे में यह बैच मध्य प्रदेश Police Force में बदलती लैंगिक भागीदारी और महिला नेतृत्व की बढ़ती भूमिका की भी तस्वीर पेश करता है।
Training में Traditional Policing के साथ Modern Policing पर फोकस
DSP के 46वें बैच की Training को केवल पारंपरिक Police व्यवस्था तक सीमित नहीं रखा गया है। बदलते अपराध और Technology के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए प्रशिक्षु अधिकारियों को Modern, Technology-Based और Public-Centric Policing की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।
मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी के निदेशक एवं विशेष पुलिस महानिदेशक रवि कुमार गुप्ता ने प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए Effective Policing के लिए अच्छा Listener बनने, Field Work को समझने, Work Management, Administrative Decision Making, Law & Order Management और Scientific तरीके से Crime Investigation पर जोर दिया।
उन्होंने अधिकारियों को Discipline, Duty और जरूरतमंद लोगों की सहायता को Police Service का अभिन्न हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया। बदलती परिस्थितियों के अनुसार Innovation और Modern Technology अपनाकर परिणामदायी Policing करने पर भी जोर दिया गया।
BNS, BNSS और Evidence Law की होगी पढ़ाई
देश में नई Criminal Justice व्यवस्था लागू होने के बाद Police Officers के लिए नए कानूनों की समझ बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए DSP Training में भारतीय न्याय संहिता यानी BNS, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS और भारतीय साक्ष्य अधिनियम से जुड़े प्रावधानों को Training Curriculum में शामिल किया गया है।
प्रशिक्षुओं को Crime Investigation, Evidence Collection और Investigation को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने की प्रक्रिया भी समझाई जाएगी। उद्देश्य यह है कि Field में तैनाती के बाद अधिकारी नई कानूनी व्यवस्था के तहत कार्रवाई और Investigation को सही तरीके से अंजाम दे सकें।
Cyber Crime और Digital Evidence भी Training का हिस्सा
आज Crime का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। Fraud, Cyber Crime, Digital Communication और Online Evidence से जुड़े मामलों में Police Investigation की भूमिका पहले से कहीं अधिक Technical हो गई है। ऐसे में नए DSP Officers को आधुनिक Investigation Techniques से परिचित कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।
Training में Digital Evidence से जुड़ी प्रक्रिया, Cyber Crime Investigation और आधुनिक Forensic Tools की जानकारी शामिल की गई है। खुले स्रोतों से उपयोगी जानकारी जुटाने और उसे Investigation में इस्तेमाल करने जैसी आधुनिक तकनीकों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
इसका सीधा उद्देश्य यह है कि भविष्य के Police Officers केवल पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि Technology और Scientific Investigation को साथ लेकर Crime Cases को Handle कर सकें।
Human Rights और Police Ethics पर भी जोर
DSP Training में केवल कानून और अपराध जांच ही केंद्र में नहीं हैं। प्रशिक्षु अधिकारियों को भारतीय संविधान, Human Rights, Police Ethics और Moral Values से जुड़े विषय भी पढ़ाए जाएंगे।
Police Service में Law Enforcement के साथ Public Trust भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी वजह से अधिकारियों को लोगों के साथ संवेदनशील व्यवहार, जिम्मेदार Decision Making और जरूरतमंदों की सहायता जैसे पहलुओं के लिए भी तैयार किया जा रहा है।
Personality Development और Public Communication भी जरूरी
एक Police Officer के लिए केवल कानून की जानकारी पर्याप्त नहीं होती। उसे जनता से संवाद करने, तनावपूर्ण परिस्थितियों में निर्णय लेने और अलग-अलग सामाजिक परिस्थितियों को समझने की क्षमता भी विकसित करनी होती है।
इसी को देखते हुए Training में Personality Development और Human Behaviour से जुड़े विषयों को भी शामिल किया गया है। अधिकारियों को बेहतर Communication और Public-Centric Policing के लिए तैयार करने पर जोर रहेगा।
Field Work से समझेंगे Ground Reality
DSP Training का एक महत्वपूर्ण हिस्सा Practical और Field-Based Learning भी है। प्रशिक्षु अधिकारियों को केवल Classroom में कानून और Police Procedure पढ़ाने के बजाय वास्तविक Field Situation को समझने के लिए तैयार किया जाएगा।
Law & Order, Crime Investigation, Police Administration और अलग-अलग परिस्थितियों में Decision Making जैसी जिम्मेदारियों को Practical तरीके से समझना Training का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा।
महिला अधिकारियों की बड़ी भागीदारी क्यों महत्वपूर्ण?
इस बैच की सबसे उल्लेखनीय विशेषताओं में महिला अधिकारियों की बड़ी संख्या भी शामिल है। 17 प्रशिक्षु अधिकारियों में 11 महिलाएं हैं। यानी इस बैच में महिला अधिकारियों की हिस्सेदारी करीब 65 प्रतिशत है।
महिला Police Officers की बढ़ती भागीदारी का असर महिला सुरक्षा, संवेदनशील मामलों की Investigation, Public Grievance Handling और Community Policing जैसे क्षेत्रों में भी दिखाई दे सकता है। हालांकि इस बैच के वास्तविक प्रभाव का आकलन अधिकारियों की Training पूरी होने और Field Posting के बाद ही किया जा सकेगा।
Training पूरी होने के बाद संभालेंगे Police की जिम्मेदारी
Basic Training पूरी करने के बाद इन प्रशिक्षु अधिकारियों को Police Service की अलग-अलग जिम्मेदारियों के लिए तैयार किया जाएगा। Training का उद्देश्य ऐसे Officers तैयार करना है जो कानून-व्यवस्था संभालने के साथ Crime Investigation, Administration, Technology और Public Dealing में भी सक्षम हों।
मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी के अनुसार इस बैच की Training में Traditional Police Knowledge के साथ Modern और Citizen-Centric Policing को प्रमुखता दी जा रही है। आने वाले समय में यही अधिकारी प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में Police व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल सकते हैं।
DSP के 46वें बैच की शुरुआत ऐसे समय में हुई है जब MP Police के सामने Traditional Crime के साथ Cyber Crime और Technology-Based Investigation जैसी नई चुनौतियां भी हैं। 17 प्रशिक्षु अधिकारियों में 11 महिलाओं की भागीदारी इस बैच को खास बनाती है, जबकि BNS, BNSS, Human Rights, Scientific Investigation और Digital Evidence पर फोकस इसे Modern Police Training की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बनाता है।