✍️ राधेश्याम शर्मा की रिपोर्ट•Published On 20th Aug, 2026 @ 11:56 AM
एमपी और यूपी के लबालब बांधों से लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद त्योंथर में नदियां उफान पर; चाकघाट का शिव मंदिर डूबा, बेलन नदी का डीह पुल तीसरे दिन भी बंद, रेस्क्यू के लिए पहुंची एनडीआरएफ।
TCE रीवा न्यूज डेस्क। रीवा जिले में पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और मध्य प्रदेश सहित पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के बांधों से लगातार छोड़े जा रहे भारी जलप्रवाह के कारण त्योंथर और तराई अंचल में भीषण बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। तमस (टोंस), बेलन, नैना और गोरमा नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। स्थिति की गंभीरता और नदी किनारे बसे गांवों में पानी घुसने के खतरे को देखते हुए रीवा जिला प्रशासन ने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की मदद मांगी है। वाराणसी (बनारस) से अत्याधुनिक रेस्क्यू और बचाव उपकरणों से लैस 40 सदस्यीय विशेष NDRF टीम रीवा पहुंच रही है, जो स्थिति पूरी तरह सामान्य होने तक जिले में तैनात रहेगी।
बीहर, बकिया, मेजा और अंदवा बांधों से छोड़ा गया भारी पानी
लगातार बारिश के कारण विंध्य और यूपी के सभी प्रमुख जलाशय पूरी तरह लबालब भर चुके हैं, जिसके चलते सुरक्षा कारणों से बांधों के गेट खोलने पड़े हैं:
- बकिया बराज: बुधवार को 10 गेट खोलकर 1347 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिसका जलस्तर 279.90 मीटर दर्ज किया गया।
- बीहर बराज: बराज के 4 गेट खोलकर 139.80 क्यूसेक पानी नदी में प्रवाहित किया जा रहा है।
- मेजा बांध (UP): 7 गेट खोलकर 12,321.30 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
- अंदवा बांध (UP): 6 गेट खोलकर 3,704.30 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के बांधों से छोड़े गए भारी पानी के कारण त्योंथर क्षेत्र में सबसे ज्यादा तबाही की स्थिति बन रही है। जानकारों के अनुसार, जब यूपी का पानी बेलन नदी से होकर त्योंथर के पास तमस नदी के पानी से टकराता है, तो पानी का बैक-फ्लो (टेक मारना) होता है और आगे निकासी न मिलने से पूरा पानी तटीय रिहायशी इलाकों और खेतों में फैल जाता है।
चाकघाट का शिव मंदिर जलमग्न, सिर्फ गुंबद दिख रहा
तमस नदी ने बीहर और बकिया से पानी छोड़े जाने के बाद रौद्र रूप धारण कर लिया है। नदी किनारे बसे गांवों में दहशत का माहौल है। चाकघाट स्थित प्रसिद्ध शिव मंदिर, जहां एक दिन पूर्व तक घुटने तक पानी भरा था, वह अब पूरी तरह से जलमग्न हो गया है। मंदिर का केवल ऊपरी गुंबद ही पानी के बाहर दिखाई दे रहा है। प्रशासन ने नदी के घाटों और निचले किनारों पर बसे लोगों को तत्काल सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर जाने की हिदायत दी है।
डीह पुल तीसरे दिन भी बंद, कैथा-परसिया मार्ग अवरुद्ध
बेलन नदी के उफान पर होने के कारण उस पर बना प्रमुख डीह पुल लगातार तीसरे दिन भी पानी में डूबा रहा, जिससे सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया है। पहाड़ों से उतर रहे भारी पानी के चलते तराई क्षेत्र के कई बरसाती नाले और रपटे डूब चुके हैं, जिससे कैथा और परसिया मार्ग पर आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है।
सोनौरी अंचल में बाढ़ का असर सर्वाधिक देखा जा रहा है। बेलन की सहायक नदियां नैना और गोरमा भी पूरे वेग से बह रही हैं। बुधवार शाम से ही प्रशासनिक अमला और पुलिस टीमें प्रभावित गांवों में गश्त कर रही हैं और मुनादी कराकर लोगों को सतर्क कर रही हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. रीवा में बाढ़ राहत के लिए NDRF की टीम कहां से बुलाई गई है?
बाढ़ के हालात से निपटने और रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए वाराणसी (बनारस) से 40 सदस्यीय विशेष NDRF टीम को रीवा बुलाया गया है।
2. त्योंथर क्षेत्र में बाढ़ की मुख्य वजह क्या है?
लगातार बारिश के साथ-साथ एमपी के बकिया-बीहर बराज और यूपी के मेजा व अंदवा बांधों से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण तमस और बेलन नदियां उफान पर हैं।
3. बेलन नदी का डीह पुल कब से बंद है?
बेलन नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर रहने के कारण डीह पुल पिछले तीन दिनों से जलमग्न और बंद है।
4. तराई अंचल के कौन-से मार्ग जलभराव से प्रभावित हुए हैं?
रपटे और नाले डूबने के कारण कैथा और परसिया मार्ग पर आवागमन पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है।