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[ट्रेंडिंग खबर]गणेश उत्सव का 7वां दिन आज: गणपति के किस स्वरूप की पूजा करें? शुभ मुहूर्त और विधि; जानें मंत्र, भोग और आरती

Ganesh Utsav 2026 के सातवें दिन गणपति पूजा, मंत्र, भोग और विसर्जन मुहूर्त
गणेश उत्सव के सातवें दिन गणपति पूजा और विसर्जन की तैयारी करते श्रद्धालु।साभार: The City Express

मुख्य बिंदुQuick Read

  • 20 सितंबर 2026 को गणेश उत्सव का सातवां दिन।
  • सातवें दिन किसी एक गणेश स्वरूप की पूजा अनिवार्य नहीं; स्थापित गणपति की नियमित पूजा की जा सकती है।
  • ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करें।
  • दूर्वा, फूल, मोदक और सात्त्विक नैवेद्य अर्पित कर आरती करें।

गणेश उत्सव 2026 का सातवां दिन: रविवार, 20 सितंबर को गणेश उत्सव का सातवां दिन मनाया जाएगा। जिन भक्तों ने गणपति बप्पा की स्थापना सात दिनों के लिए की है, वे इस दिन पूजा-अर्चना के बाद विसर्जन कर सकते हैं। वहीं जिन घरों और गणेश मंडलों में स्थापना की अवधि लंबी है, वहां गणपति की नियमित पूजा जारी रहेगी और अनंत चतुर्दशी पर विसर्जन किया जा सकता है।

गणेश उत्सव के सातवें दिन किसी एक विशेष स्वरूप की पूजा पूरे देश में अनिवार्य रूप से निर्धारित नहीं है। अलग-अलग गणेश उपासना परंपराओं में दिन के अनुसार स्वरूप और पूजा पद्धति अलग मिलती है। इसलिए घर में स्थापित गणपति की उसी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार पूजा करना उचित माना जाता है। इस दिन भक्त गणपति को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता के रूप में स्मरण कर परिवार की सुख-समृद्धि और बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना कर सकते हैं।

गणेश उत्सव का 7वां दिन कब है?

गणेश चतुर्थी पर 14 सितंबर 2026 को गणपति स्थापना हुई थी। इसके बाद 20 सितंबर को उत्सव का सातवां दिन पड़ रहा है। सात दिन के लिए गणपति स्थापित करने वाले परिवार इस दिन उत्तर पूजा और आरती के बाद विसर्जन कर सकते हैं। अलग-अलग परिवारों में डेढ़ दिन, तीसरे, पांचवें, सातवें दिन या अनंत चतुर्दशी पर विसर्जन की परंपरा भी मिलती है।

सातवें दिन गणपति के किस स्वरूप की पूजा करें?

सातवें दिन भगवान गणेश के किसी एक विशेष स्वरूप की पूजा का सार्वभौमिक नियम नहीं है। भक्त अपने घर की परंपरा के अनुसार स्थापित गणपति की पूजा कर सकते हैं। इस दिन गणपति को विघ्नहर्ता के रूप में पूजते हुए जीवन की बाधाएं दूर करने, परिवार में सुख-शांति बनाए रखने और कार्यों में सफलता की प्रार्थना की जा सकती है।

यदि घर में किसी विशेष गणेश स्वरूप की स्थापना की गई है, तो उसी स्वरूप की पूजा जारी रखना अधिक महत्वपूर्ण है। पूजा में श्रद्धा, स्वच्छता और परिवार की परंपरा का ध्यान रखा जाता है।

20 सितंबर को गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त

जिन भक्तों ने सात दिनों के लिए गणपति की स्थापना की है, उनके लिए 20 सितंबर को विसर्जन के कई शुभ समय बताए गए हैं। उपलब्ध पंचांगों में समय में स्थान के अनुसार कुछ अंतर है, इसलिए अंतिम मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता देना चाहिए।

  • सुबह: लगभग 7:42 बजे से दोपहर 12:16 बजे तक
  • दोपहर: लगभग 1:47 बजे से 3:18 बजे तक
  • शाम: लगभग 6:21 बजे से रात 10:47 बजे तक

इनमें सुबह का समय चर, लाभ और अमृत तथा दोपहर का समय शुभ चौघड़िया के रूप में बताया गया है। शाम के समय भी शुभ, अमृत और चर चौघड़िया का संयोग बताया गया है। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के कारण समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।

सातवें दिन गणपति की पूजा कैसे करें?

सुबह स्नान कर साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थान की सफाई करें। गणपति की प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं। इसके बाद गणेश जी को जल, अक्षत, सिंदूर, फूल और दूर्वा अर्पित करें। गणपति को मोदक या अपनी श्रद्धा के अनुसार सात्त्विक नैवेद्य चढ़ाएं।

इसके बाद गणपति मंत्र का जाप करें और परिवार के सभी सदस्यों के साथ आरती करें। पूजा के दौरान परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य, समृद्धि और सभी बाधाओं से मुक्ति की प्रार्थना की जा सकती है।

गणपति का कौन सा मंत्र पढ़ें?

सातवें दिन गणेश जी की पूजा के दौरान इस सरल मंत्र का जाप किया जा सकता है:

ॐ गं गणपतये नमः।

भक्त अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार गणेश स्तोत्र, गणपति अथर्वशीर्ष या अन्य प्रचलित गणेश मंत्रों का पाठ भी कर सकते हैं।

गणपति को क्या भोग लगाएं?

भगवान गणेश को मोदक का भोग विशेष रूप से लोकप्रिय है। इसके अलावा चावल की खीर, सूजी का हलवा, फल, नारियल और अन्य सात्त्विक नैवेद्य भी अर्पित किए जा सकते हैं। सातवें दिन के लिए चावल की खीर और मोदक को भोग के विकल्प के तौर पर बताया गया है।

भोग के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों और अन्य श्रद्धालुओं में वितरित करें।

गणपति की आरती

पूजा के अंत में श्रद्धा के साथ “जय गणेश देवा” आरती की जा सकती है। आरती के बाद गणपति बप्पा से परिवार पर कृपा बनाए रखने और सभी विघ्न दूर करने की प्रार्थना करें।

अगर सातवें दिन विसर्जन करना है तो क्या करें?

विसर्जन वाले दिन पहले गणपति की उत्तर पूजा करें। भगवान को फूल, दूर्वा, अक्षत, सिंदूर और नैवेद्य अर्पित करें। आरती के बाद परिवार के सभी सदस्य गणपति से जाने-अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा मांगें और अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना करें।

इसके बाद गणपति की प्रतिमा को सम्मानपूर्वक विसर्जन स्थल तक ले जाएं। पर्यावरण की दृष्टि से घर पर या निर्धारित स्थान पर स्वच्छ जल वाले पात्र में विसर्जन करना बेहतर विकल्प है। विसर्जन के दौरान श्रद्धालु “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” का जयघोष कर सकते हैं।

क्या सातवें दिन विसर्जन करना जरूरी है?

नहीं। सातवें दिन विसर्जन उन्हीं परिवारों के लिए है जिन्होंने गणपति स्थापना की अवधि सात दिन तय की है। जिन परिवारों ने अधिक दिनों के लिए गणपति स्थापित किए हैं, वे अपनी परंपरा के अनुसार पूजा जारी रख सकते हैं। वर्ष 2026 में अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को है और यह गणेश विसर्जन का प्रमुख दिन माना जाता है।

इसलिए गणेश उत्सव के सातवें दिन पूजा करते समय सबसे महत्वपूर्ण बात घर की परंपरा, स्थापना के समय लिए गए संकल्प और स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा-विसर्जन का समय तय करना है।

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