कटनी के चर्चित जमीन सौदा मामले में निलंबित CSP नेहा पच्चीसिया समेत तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अदालत ने वारंट जारी किए हैं। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मनीषा जैन तिवारी की अदालत ने नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज बारापात्रे और मारूफ अहमद हनफी के खिलाफ अलग-अलग गिरफ्तारी वारंट जारी किए। पुलिस को तीनों को 25 सितंबर तक गिरफ्तार कर सक्षम मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
कुठला थाने में 19 अगस्त 2026 को तीनों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। मामले की जांच के लिए SIT गठित की गई है। FIR दर्ज होने के बाद से तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी। इसी बीच SIT ने अदालत में गिरफ्तारी वारंट जारी करने के लिए आवेदन दिया था।
SIT के आवेदन पर अदालत ने जारी किए वारंट
जमीन सौदा मामले की जांच कर रही SIT ने जिला न्यायालय में तीनों आरोपियों के खिलाफ मियादी गिरफ्तारी वारंट जारी करने की मांग की थी। शुक्रवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में आवेदन पर सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने तीनों के खिलाफ अलग-अलग गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए।
वारंट की मियाद 25 सितंबर तक रखी गई है। पुलिस को इस अवधि में तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर सक्षम मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होगा।
क्या है पूरा जमीन सौदा मामला?
शिकायत और जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार कटनी के कन्हवारा क्षेत्र में जमीन के सौदे के दौरान प्रभाव और दबाव का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि जमीन को उसकी बताई गई कीमत से काफी कम राशि में खरीदने की प्रक्रिया कराई गई। मामले में नेहा पच्चीसिया के अलावा क्षितिज राज बारापात्रे और मारूफ अहमद हनफी को भी आरोपी बनाया गया है।
जमीन की कीमत और रजिस्ट्री की रकम को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। NDTV की रिपोर्ट में शिकायत के हवाले से जमीन का सौदा करीब 1.07 करोड़ रुपये में तय होने और करीब 18.20 लाख रुपये में रजिस्ट्री कराने का आरोप बताया गया है। सरकारी गाइडलाइन में जमीन की कीमत करीब 82.87 लाख रुपये बताई गई थी। ये आंकड़े मामले में लगाए गए आरोप और जांच से जुड़े हैं। अदालत ने अभी इन आरोपों को अंतिम रूप से सही नहीं ठहराया है।
हत्या के मामले से जुड़े दबाव का भी आरोप
शिकायतकर्ता पक्ष ने आरोप लगाया है कि जमीन के मालिक परिवार पर एक हत्या के मामले को लेकर दबाव बनाया गया था। आरोप है कि इसी दबाव के बीच जमीन का सौदा कराया गया। SIT और पुलिस इस पूरे घटनाक्रम में आरोपियों की भूमिका और कथित संलिप्तता की जांच कर रही है।
FIR दर्ज होना या गिरफ्तारी वारंट जारी होना आरोपों के साबित होने के बराबर नहीं है। मामले में आरोप सही हैं या नहीं, यह जांच और आगे होने वाली न्यायिक कार्यवाही से तय होगा।
तीनों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो चुकी है
रिपोर्टों के अनुसार नेहा पच्चीसिया समेत तीनों आरोपियों ने जिला अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था। अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास तेज किए।
पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा की ओर से तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। इसके साथ ही लुकआउट नोटिस जारी किए जाने की बात कही गई थी।
हाईकोर्ट में नेहा पच्चीसिया की याचिका पर सुनवाई
गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बीच नेहा पच्चीसिया से जुड़ा मामला जबलपुर हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है। उनकी ओर से FIR निरस्त करने और अंतरिम राहत देने की मांग को लेकर याचिका दायर की गई है।
जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को प्रस्तावित है। इस दौरान राज्य सरकार के जवाब के बाद याचिका और अंतरिम राहत की मांग पर आगे सुनवाई हो सकती है।
सरकार ने जांच में सहयोग नहीं करने की बात कही
हाईकोर्ट में हुई कार्यवाही से जुड़ी हालिया रिपोर्ट के अनुसार राज्य सरकार ने अदालत में कहा है कि नेहा पच्चीसिया जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं। सरकार ने उनके संभावित विदेश जाने को लेकर भी चिंता जताई है। लुकआउट सर्कुलर की प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात भी सामने आई है। यह राज्य सरकार की ओर से अदालत में रखा गया पक्ष है।
25 सितंबर तक गिरफ्तारी की समय-सीमा
अदालत से गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद पुलिस के सामने तीनों आरोपियों को 25 सितंबर तक गिरफ्तार कर सक्षम मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की समय-सीमा है। दूसरी ओर नेहा पच्चीसिया की हाईकोर्ट याचिका पर 21 सितंबर को होने वाली सुनवाई भी मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल जमीन सौदा मामले की जांच जारी है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम कानूनी स्थिति जांच और अदालतों में चल रही कार्यवाही के परिणाम के बाद ही स्पष्ट होगी।