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[ट्रेंडिंग खबर]गणेश उत्सव का 8वां दिन आज: दशमी तिथि में होगी गणपति की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त, मंत्र, भोग और आरती

गणेश उत्सव के 8वें दिन गणपति पूजा विधि और मंत्र
गणेश उत्सव के 8वें दिन गणपति की पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु।साभार: The City Express

मुख्य बिंदुQuick Read

  • 21 सितंबर 2026 को गणेश उत्सव का 8वां दिन।
  • शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि रहेगी।
  • सुबह-शाम गणपति की पूजा और आरती के साथ दूर्वा व मोदक अर्पित किए जा सकते हैं।
  • 7 दिन वाले गणेश विसर्जन की परंपरा में 21 सितंबर विसर्जन का दिन हो सकता है, लेकिन 10 दिन की स्थापना वाले घरों में पूजा जारी रहती है।

रीवा: गणेश उत्सव का आठवां दिन 21 सितंबर 2026, सोमवार को मनाया जाएगा। इस दिन भाद्रपद शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि रहेगी। रीवा के पंचांग के अनुसार 20 सितंबर को नवमी तिथि शाम 5:51 बजे तक थी, इसके बाद दशमी शुरू हुई। 21 सितंबर को दशमी तिथि शाम तक रहेगी और इसके बाद एकादशी तिथि शुरू होगी।

इस दिन गणपति की सुबह और शाम नियमित पूजा, आरती और भोग किया जा सकता है। गणेश उत्सव के आठवें दिन किसी एक विशेष गणेश स्वरूप की पूजा का देशभर में एक समान विधान नहीं है। श्रद्धालु अपने घर और स्थानीय परंपरा के अनुसार स्थापित गणपति की पूजा कर सकते हैं।

21 सितंबर को दशमी तिथि कब तक रहेगी?

रीवा के उपलब्ध पंचांग के अनुसार 20 सितंबर को नवमी तिथि शाम 5:51 बजे समाप्त हुई और इसके बाद शुक्ल पक्ष की दशमी शुरू हुई। 21 सितंबर को दशमी तिथि शाम तक रहने के बाद एकादशी शुरू होगी। अलग-अलग पंचांगों में स्थान और गणना पद्धति के कारण तिथि समाप्त होने के समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।

इसलिए किसी विशेष व्रत, संकल्प या धार्मिक अनुष्ठान के लिए रीवा के स्थानीय पंचांग में दिए गए समय को प्राथमिकता देना उचित रहेगा।

21 सितंबर को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और शोभन योग

21 सितंबर को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रहेगा। पंचांग में शोभन योग का भी उल्लेख है। नक्षत्र और योग के समाप्त होने के समय में स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है, इसलिए विशेष मुहूर्त के लिए स्थानीय गणना देखना जरूरी है।

8वें दिन किस स्वरूप की पूजा करें?

गणेश उत्सव के आठवें दिन किसी एक विशेष गणेश स्वरूप की पूजा का देशभर में समान विधान नहीं है। श्रद्धालु अपने घर या स्थानीय परंपरा के अनुसार स्थापित गणपति की पूजा कर सकते हैं। गणेश जी को दूर्वा, लाल फूल, सिंदूर और मोदक अर्पित करने की परंपरा है।

यदि परिवार में किसी विशेष गणेश स्वरूप या पूजा पद्धति का पालन किया जाता है तो उसी परंपरा के अनुसार पूजा की जा सकती है। धार्मिक परंपराओं में क्षेत्र और परिवार के अनुसार अंतर होने के कारण इसे एक ही नियम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

गणेश जी की पूजा कैसे करें?

सुबह स्नान के बाद पूजा स्थान की सफाई करें और गणपति के सामने दीपक जलाएं। गणेश जी का ध्यान करने के बाद सिंदूर, लाल फूल, दूर्वा, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें। परंपरा के अनुसार जल और पंचामृत का भी उपयोग किया जा सकता है।

गणेश जी को मोदक या अपनी परंपरा के अनुसार सात्त्विक भोग लगाएं। इसके बाद गणेश मंत्र का जाप कर आरती करें। शाम को भी दीपक जलाकर गणपति की आरती की जा सकती है।

गणेश जी का कौन सा मंत्र पढ़ें?

पूजा के दौरान “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप किया जा सकता है। श्रद्धालु अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार 11, 21 या 108 बार मंत्र का जाप कर सकते हैं।

इसके अलावा गणेश अथर्वशीर्ष, गणेश स्तुति या परिवार में प्रचलित गणेश आरती का पाठ भी किया जा सकता है।

गणपति को कौन सा भोग लगाएं?

गणेश जी को मोदक प्रिय माने जाते हैं। आठवें दिन पूजा में मोदक के साथ लड्डू, फल, नारियल और अन्य सात्त्विक नैवेद्य अर्पित किया जा सकता है। गणपति को दूर्वा चढ़ाने की भी परंपरा है।

भोग में क्या रखा जाए, यह परिवार की धार्मिक परंपरा के अनुसार तय किया जा सकता है। पूजा के बाद प्रसाद परिवार और अन्य श्रद्धालुओं में वितरित किया जा सकता है।

क्या 21 सितंबर को गणेश विसर्जन कर सकते हैं?

गणेश प्रतिमा के विसर्जन की तारीख स्थापना के समय तय की गई परंपरा पर निर्भर करती है। गणेश उत्सव में डेढ़ दिन, तीन दिन, पांच दिन, सात दिन और अनंत चतुर्दशी तक विसर्जन की परंपराएं प्रचलित हैं। इसलिए जिन परिवारों ने सात दिन के लिए गणपति स्थापित किए हैं, वे अपनी परंपरा के अनुसार 21 सितंबर को विसर्जन कर सकते हैं।

वहीं 10 दिन के लिए गणपति की स्थापना करने वाले श्रद्धालु 21 सितंबर को भी नियमित पूजा जारी रखेंगे और अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जन करेंगे। 2026 में अनंत चतुर्दशी की तिथि को लेकर उपलब्ध पंचांग स्रोतों में भी स्थानीय गणना देखना जरूरी है, इसलिए विसर्जन का अंतिम समय और मुहूर्त स्थानीय पंचांग के अनुसार ही तय करें।

पूजा और विसर्जन के समय रखें ध्यान

तिथि, नक्षत्र और मुहूर्त के समय शहर के अनुसार कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। इसलिए रीवा में पूजा या विसर्जन के लिए स्थानीय पंचांग में दिए गए समय को प्राथमिकता दें। विशेष धार्मिक अनुष्ठान या संकल्प के लिए पुरोहित से समय की पुष्टि करना भी उचित रहेगा।

गणेश उत्सव के आठवें दिन जिन परिवारों ने 10 दिन के लिए गणपति स्थापित किए हैं, उनके यहां सुबह-शाम पूजा, मंत्र जाप, भोग और आरती की परंपरा जारी रहेगी।

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