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गुरु उदय 2026: कर्क राशि में उदित हुए देवगुरु बृहस्पति, 'हंस राजयोग' से 3 राशियों पर बरसेगा धन और वैभव

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ज्योतिष-ग्रह गोचर / नई दिल्ली: गुरु उदय 2026: कर्क राशि में उदित हुए देवगुरु बृहस्पति, 'हंस राजयोग' से 3 राशियों पर बरसेगा धन और वैभव
गुरु उदय 2026: कर्क राशि में उदित हुए देवगुरु बृहस्पति, 'हंस राजयोग' से 3 राशियों पर बरसेगा धन और वैभवसाभार: The City Express

मुख्य बिंदुQuick Read

  • ​14 अगस्त को हुआ गुरु उदय: ज्ञान, संतान, धर्म और धन के कारक ग्रह देवगुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में उदित हो चुके हैं।
  • हंस राजयोग और पांडित्य योग का निर्माण: कर्क राशि में गुरु के उच्च होने से पंचमहापुरुष राजयोगों में से एक 'हंस राजयोग' तथा सूर्य-बुध के तालमेल से 'पांडित्य योग' का शुभ प्रभाव शुरू।

TCE धर्म डेस्क। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में ज्ञान, धर्म, संतान, सुख-समृद्धि और धन के अधिष्ठाता ग्रह देवगुरु बृहस्पति का उदय होना अत्यंत कल्याणकारी और शुभ माना जाता है। पंचांगीय गणनाओं के अनुसार, 14 अगस्त 2026 को देवगुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में विधिवत उदित हो चुके हैं। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, जब गुरु ग्रह अस्त होते हैं तो उनके शुभ प्रभाव क्षीण हो जाते हैं, जिससे मांगलिक कार्यों, वैवाहिक चर्चाओं और आर्थिक तरक्की में रुकावटें आने लगती हैं। लेकिन 14 अगस्त को गुरु के उदित होने के साथ ही जातकों के जीवन में सुख, वैभव, प्रतिष्ठा और ऐश्वर्य के नए द्वार खुल गए हैं।

हंस राजयोग और पांडित्य योग का बना दुर्लभ महासंयोग

देवगुरु बृहस्पति का यह उदय साधारण नहीं है, बल्कि इस दौरान अंतरिक्ष में ग्रहों का एक अत्यंत दुर्लभ और शक्तिशाली महासंयोग निर्मित हो रहा है:

  • हंस राजयोग का प्रभाव: गुरु ग्रह अपनी उच्च राशि कर्क में विराजमान हैं, जिससे ज्योतिष के पंच महापुरुष राजयोगों में से एक अत्यंत शुभ 'हंस राजयोग' का निर्माण हो रहा है। यह योग मान-सम्मान, उच्च पद और अपार धन संपदा प्रदान करने वाला माना जाता है।
  • पांडित्य योग का निर्माण: कर्क राशि में सूर्य और बुध की युति के साथ गुरु का उदय होना प्रशासनिक, कूटनीतिक और बौद्धिक क्षमताओं को असाधारण मजबूती देगा। इस योग से शोध, लेखन, अध्यापन और नीतिगत निर्णयों से जुड़े लोगों को विशेष ख्याति मिलेगी।

ग्रहों के इस अद्भुत तालमेल से मुख्य रूप से 3 राशियों के जातकों को करियर, वित्तीय स्थिति और पारिवारिक जीवन में बंपर लाभ मिलने के प्रबल योग बन रहे हैं।

इन 3 भाग्यशाली राशियों की खुलेगी किस्मत

1. सिंह राशि (Leo)

सिंह राशि के जातकों के लिए गुरु का उदय स्वर्णिम अवसर लेकर आया है। नौकरीपेशा जातकों को कार्यक्षेत्र में पदोन्नति (प्रमोशन), वेतन वृद्धि और वरिष्ठ अधिकारियों का भरपूर सहयोग प्राप्त होगा। व्यापार के क्षेत्र में नए साझेदारों और सहयोगियों के जुड़ने से कारोबार का दायरा बढ़ेगा।

यदि आप काफी समय से भूमि, भवन, नया मकान या वाहन खरीदने का विचार कर रहे थे, तो इस अवधि में आपकी योजनाएं मूर्त रूप लेंगी और संपत्ति में किया गया बड़ा निवेश भविष्य में भारी मुनाफा देगा। लंबे समय से चला आ रहा मानसिक तनाव समाप्त होगा, पुरानी स्वास्थ्य समस्याओं में सुधार होगा और आपके आत्मबल में वृद्धि होगी।

2. तुला राशि (Libra)

तुला राशि के जातकों के दशम (कर्म) भाव पर गुरु का शुभ प्रभाव पड़ने से नौकरी में मनचाहा स्थानांतरण (ट्रांसफर) या किसी प्रतिष्ठित संस्थान से नया जॉब ऑफर मिलने की प्रबल संभावनाएं हैं। जो जातक लंबे समय से नई नौकरी की तलाश में जुटे थे, उन्हें मनमुताबिक सफलता मिलेगी।

कारोबारियों के लिए आय के नए-नए स्रोत खुलेंगे। बाजार में लंबे समय से फंसा हुआ धन वापस मिल सकता है, जिससे पुराने कर्जों और देनदारियों से मुक्ति मिलेगी। छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की एकाग्रता में उल्लेखनीय सुधार होगा और अनुकूल परिणाम प्राप्त होंगे।

3. कुंभ राशि (Aquarius)

कुंभ राशि के जातकों के लिए भाग्य भाव और देवगुरु की शुभ दृष्टि जीवन में अटके हुए मामलों को नई गति प्रदान करेगी। सरकारी विभागों या अदालतों में लंबे समय से लंबित पड़ी फाइलें और कार्य तेजी से पूरे होंगे। अप्रत्याशित और अचानक धन लाभ के मजबूत योग बन रहे हैं।

संतान पक्ष की ओर से शिक्षा, उच्च अध्ययन या करियर में बड़ी सफलता मिलने से घर में उत्सव का माहौल रहेगा। पारिवारिक मतभेद पूरी तरह दूर होंगे और आपसी सामंजस्य बढ़ेगा। इस दौरान धार्मिक और तीर्थ यात्राओं के अवसर बनेंगे, जिससे समाज में आपका मान-सम्मान, सामाजिक प्रतिष्ठा और प्रभाव में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

गुरु के शुभ प्रभाव को बढ़ाने के शास्त्रीय उपाय

गुरु ग्रह की कृपा निरंतर बनाए रखने के लिए शास्त्रों में कुछ सरल उपाय बताए गए हैं:

  • प्रत्येक गुरुवार को भगवान विष्णु की आराधना करें और संभव हो तो पीले पुष्प, चने की दाल और गुड़ अर्पित करें।
  • गुरुवार के दिन मस्तक पर केसर या पीले चंदन का तिलक लगाएं और पीले वस्त्र धारण करें।
  • प्रतिदिन या गुरुवार को "ॐ बृं बृहस्पतये नमः" अथवा "ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः" मंत्र का 108 बार तुलसी या हल्दी की माला से जप करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. देवगुरु बृहस्पति कर्क राशि में कब उदित हुए हैं?

पंचांगीय गणना के अनुसार देवगुरु बृहस्पति 14 अगस्त 2026 को अपनी उच्च राशि कर्क में उदित हो चुके हैं।

2. गुरु के उच्च होने से कौन सा प्रमुख राजयोग बनता है?

गुरु जब अपनी उच्च राशि कर्क या धनु/मीन में केंद्र भावों में होते हैं, तो पंचमहापुरुष योगों में शामिल 'हंस राजयोग' का निर्माण होता है।

3. गुरु उदय से किन 3 राशियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा?

ग्रहों के इस अद्भुत गोचर से सिंह, तुला और कुंभ राशि के जातकों को करियर, व्यापार और आर्थिक मोर्चे पर सबसे अधिक लाभ मिलेगा।

4. गुरु की कृपा पाने के लिए कौन सा मंत्र जपना चाहिए?

गुरु के शुभ प्रभाव को बढ़ाने के लिए नियमित रूप से "ॐ बृं बृहस्पतये नमः" मंत्र का 108 बार जप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

संपादकीय लेखक एवं रिपोर्टर
सत्यापित रिपोर्टर
विशेष संवाददाता

मध्य प्रदेश, विंध्य, बुंदेलखंड और राष्ट्रीय घटनाक्रमों पर द सिटी एक्सप्रेस की विशेष रिपोर्टिंग टीम।

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