रीवा | श्याम शाह मेडिकल कॉलेजरीवा

रीवा मेडिकल कॉलेज की डॉ. बीनू सिंह पर कार्रवाई: तीन वेतनवृद्धियां रोकीं; निजी Nursing Home में इलाज कराने का दबाव बनाने का मामला

रीवा मेडिकल कॉलेज की डॉ. बीनू सिंह कुशवाह की तीन वेतनवृद्धियां रोकने का आदेश
श्याम शाह मेडिकल कॉलेज रीवा की प्रोफेसर डॉ. बीनू सिंह कुशवाह के खिलाफ 2023 की विभागीय जांच से जुड़े मामले में तीन वेतनवृद्धियां असंचयी प्रभाव से रोकने का आदेश।साभार: The City Express

मुख्य बिंदुQuick Read

  • डॉ. बीनू सिंह (कुशवाह) की तीन वेतनवृद्धियां असंचयी प्रभाव से रोकी गईं।
  • मामला 2023 में मरीज को निजी Nursing Home भेजे जाने की शिकायत से जुड़ा है।
  • चार सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति ने 1 मार्च 2023 को जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।
  • 16 सितंबर 2026 के आदेश में कार्रवाई का आधार मध्यप्रदेश स्वशासी चिकित्सा एवं दंत चिकित्सा महाविद्यालयीन शैक्षणिक आदर्श सेवा नियम, 2018 के प्रावधानों को बनाया गया है।

रीवा के श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. बीनू सिंह (कुशवाह) के खिलाफ वर्षों से चल रही विभागीय कार्रवाई में अब फैसला हुआ है। महाविद्यालय के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं अधिष्ठाता की ओर से 16 सितंबर 2026 को जारी आदेश में डॉ. बीनू सिंह की तीन वेतनवृद्धियां असंचयी प्रभाव से रोकने का निर्णय लिया गया है।

यह मामला वर्ष 2023 में सामने आई उस शिकायत से संबंधित है, जिसमें श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय, रीवा से संबंधित एक मरीज को निजी Nursing Home भेजे जाने की शिकायत की गई थी। शिकायत के बाद मध्यप्रदेश शासन के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने चार सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति गठित कर मामले की जांच कराई थी।

2023 में हुई थी शिकायत

आदेश के अनुसार श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय, रीवा से संबंधित अस्पताल में पदस्थ चिकित्सकों द्वारा मरीजों को Nursing Home भेजे जाने की शिकायत शासन को प्राप्त हुई थी। इस शिकायत के बाद मध्यप्रदेश शासन, चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 7 फरवरी 2023 के आदेश से चार सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया।

समिति ने मामले की जांच के बाद 1 मार्च 2023 को अपनी रिपोर्ट आयुक्त, रीवा संभाग के माध्यम से शासन को भेजी। यह रिपोर्ट 7 मार्च 2023 को संबंधित महाविद्यालय के कार्यालय को उपलब्ध कराई गई।

जांच समिति ने डॉ. बीनू सिंह के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की

जांच रिपोर्ट के निष्कर्ष के आधार पर डॉ. बीनू सिंह, तत्कालीन विभागाध्यक्ष एवं प्राध्यापक, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग, श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय, रीवा के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई थी।

इसके बाद 7 मार्च 2023 को शासन स्तर से जारी पत्र के आधार पर डॉ. बीनू सिंह की तीन वेतनवृद्धियां असंचयी प्रभाव से रोकने का निर्णय लिया गया था। आदेश में उल्लेख है कि इस कार्रवाई के लिए संबंधित सेवा नियमों के तहत प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

डॉ. बीनू सिंह से मांगा गया था स्पष्टीकरण

विभागीय प्रक्रिया के तहत डॉ. बीनू सिंह को कारण बताओ सूचना पत्र जारी कर अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए समय दिया गया। आदेश में दर्ज विवरण के अनुसार उनसे 10 दिन के भीतर अपना पक्ष और स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था।

डॉ. बीनू सिंह ने 16 मार्च 2023 को अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया। इसके बाद मामले को आगे की विभागीय प्रक्रिया के लिए कार्यकारिणी समिति के समक्ष रखा गया। 29 मार्च 2023 की बैठक में भी इस मामले पर विचार किया गया।

मामले की दोबारा जांच के लिए समिति बनी

आदेश में दर्ज घटनाक्रम के अनुसार डॉ. बीनू सिंह के स्पष्टीकरण के बाद भी मामले की प्रक्रिया आगे जारी रही। 5 जून 2023 के कार्यालयीन आदेश के माध्यम से एक समिति का गठन किया गया। इस समिति ने 14 जून 2023 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।

समिति की रिपोर्ट में पहले गठित चार सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति की 1 मार्च 2023 की जांच रिपोर्ट और उसके निष्कर्षों का भी उल्लेख किया गया। इसके बाद संबंधित सेवा नियमों के तहत डॉ. बीनू सिंह के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

16 सितंबर 2026 को कार्यकारिणी समिति ने लिया फैसला

विभागीय दस्तावेजों में दर्ज पूरी प्रक्रिया के बाद 16 सितंबर 2026 को कार्यकारिणी समिति की बैठक में मामले पर अंतिम निर्णय लिया गया। इसी निर्णय के आधार पर श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं अधिष्ठाता ने आदेश जारी किया।

आदेश में मध्यप्रदेश स्वशासी चिकित्सा एवं दंत चिकित्सा महाविद्यालयीन शैक्षणिक आदर्श सेवा नियम, 2018 के नियम 14 के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए डॉ. बीनू सिंह (कुशवाह), प्राध्यापक, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग, श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय, रीवा की तीन वेतनवृद्धियां असंचयी प्रभाव से रोकने की कार्रवाई दर्ज की गई है।

असंचयी प्रभाव का अर्थ यह है कि रोकी गई वेतनवृद्धियों का प्रभाव भविष्य की वेतनवृद्धियों में स्थायी रूप से जोड़कर नहीं लिया जाएगा। आदेश में कार्रवाई को विभागीय अनुशासनात्मक प्रक्रिया के तहत की गई कार्रवाई के रूप में दर्ज किया गया है।

डॉ. बीनू सिंह का कल्पना मिश्रा मामले से क्या संबंध है?

डॉ. बीनू सिंह का नाम हाल के कल्पना मिश्रा मामले के घटनाक्रम में भी सामने आया है, लेकिन 16 सितंबर 2026 का यह आदेश मूल रूप से 2023 की निजी Nursing Home भेजे जाने संबंधी शिकायत की विभागीय कार्रवाई से जुड़ा है। इसे कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की 26 अगस्त 2026 की मौत की जांच में दोष सिद्ध होने के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए।

कल्पना मिश्रा की मौत के मामले में अलग से मजिस्ट्रियल जांच चल रही है और उस मामले में अस्पताल के चिकित्सकों तथा कर्मचारियों के खिलाफ अलग-अलग कार्रवाई की जा चुकी है। डॉ. बीनू सिंह के खिलाफ यहां दर्ज कार्रवाई की प्रशासनिक पृष्ठभूमि 2023 की शिकायत और उसके बाद चली विभागीय जांच है।

डॉ. सोनल अग्रवाल की कार्रवाई भी इसी पुराने मामले से जुड़ी रही

इसी 2023 की शिकायत से संबंधित विभागीय कार्रवाई में डॉ. सोनल अग्रवाल का नाम भी सामने आया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार जांच समिति ने दोनों चिकित्सकों के खिलाफ अलग-अलग स्तर की अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की थी। डॉ. सोनल अग्रवाल के खिलाफ सेवा समाप्ति की कार्रवाई और डॉ. बीनू सिंह की तीन वेतनवृद्धियां रोकने का मामला इसी पुराने विभागीय घटनाक्रम से संबंधित है।

मध्यप्रदेश विधानसभा की मार्च 2023 की कार्यवाही में भी तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने रीवा मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग से संबंधित जांच का उल्लेख करते हुए डॉ. बीनू सिंह के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा और डॉ. सोनल अग्रवाल को कारण बताओ नोटिस दिए जाने की जानकारी सदन में दी थी।

2023 से 2026 तक चला विभागीय घटनाक्रम

इस पूरे मामले में शिकायत के बाद फरवरी 2023 में उच्च स्तरीय समिति का गठन हुआ। मार्च 2023 में समिति ने अपनी रिपोर्ट दी और डॉ. बीनू सिंह से स्पष्टीकरण मांगा गया। उनके स्पष्टीकरण के बाद जून 2023 में गठित समिति ने भी रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसके बाद मामला श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय की कार्यकारिणी समिति के समक्ष विचाराधीन रहा।

अब 16 सितंबर 2026 के आदेश के साथ डॉ. बीनू सिंह के खिलाफ इस विभागीय मामले में तीन वेतनवृद्धियां असंचयी प्रभाव से रोकने की कार्रवाई दर्ज की गई है। आदेश की प्रति में इसकी सूचना मध्यप्रदेश शासन के संबंधित विभागों और अधिकारियों को भी भेजे जाने का उल्लेख है।

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