✍️ विशेष संवाददाता•Published On 9th Sept, 2026 @ 1:37 AM
कांग्रेस विधायक ने जयस्तंभ चौराहे के प्रदर्शन में लगाए गंभीर आरोप, बयान का वीडियो सामने आने के बाद विवाद; अब तक किसी विशिष्ट मामले, FIR या आधिकारिक जांच से दावे की पुष्टि नहीं
रीवा। संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल को लेकर कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा के एक बेहद गंभीर बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। मंगलवार को रीवा के जयस्तंभ चौराहे पर कांग्रेस के धरना-प्रदर्शन के दौरान सेमरिया विधायक ने अस्पताल की Postmortem व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि यदि किसी सुंदर महिला की मौत होती है और उसका शव Postmortem के लिए संजय गांधी अस्पताल लाया जाता है, तो Postmortem Room में उसके साथ दुष्कर्म किया जाता है।
विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि Postmortem के नाम पर मृतकों के परिजनों से पैसे लिए जाते हैं। उनके बयान का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में है। हालांकि, इन दोनों गंभीर आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अब तक सामने नहीं आई है। उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों में किसी विशिष्ट महिला, घटना, FIR, पुलिस जांच या आधिकारिक दस्तावेज की जानकारी नहीं मिलती, जो विधायक के दावे को स्थापित तथ्य के रूप में साबित करे।
अभय मिश्रा ने क्या आरोप लगाया?
धरना-प्रदर्शन के दौरान अस्पताल की व्यवस्थाओं और Postmortem प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अभय मिश्रा ने दावा किया कि यदि किसी सुंदर महिला की मौत हो जाती है और उसके परिजन Postmortem Room में मौजूद नहीं रहते, तो उसके शव के साथ दुष्कर्म किया जाता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शव के परिजनों को वहां मौजूद रहने के लिए पैसे देने पड़ते हैं।
विधायक ने Postmortem के नाम पर कथित तौर पर पैसे लिए जाने का आरोप भी लगाया। उनके बयान के बाद अस्पताल की सुरक्षा, शवों की निगरानी और Postmortem प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
सबसे बड़ा सवाल—दावे का आधार क्या है?
विधायक का आरोप बेहद गंभीर है, लेकिन फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी में ऐसा कोई विशिष्ट मामला सामने नहीं आया है, जिसमें किसी महिला के शव के साथ कथित दुष्कर्म की FIR दर्ज हुई हो, पुलिस ने जांच की हो या अस्पताल अथवा प्रशासन की किसी जांच रिपोर्ट ने इस दावे की पुष्टि की हो।
इसी तरह Postmortem के नाम पर पैसे लिए जाने के आरोप की भी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस समय इसे “अस्पताल में ऐसा होता है” के रूप में प्रस्तुत करना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा। इसे स्पष्ट रूप से “विधायक द्वारा लगाया गया आरोप” ही माना जाना चाहिए।
क्या विधायक ने किसी खास घटना का हवाला दिया?
मौजूदा सार्वजनिक रिपोर्टिंग में विधायक के बयान के साथ किसी विशिष्ट महिला का नाम, घटना की तारीख, शव का विवरण, शिकायतकर्ता, FIR नंबर या जांच दस्तावेज सामने नहीं आया है। ऐसे में इस दावे की सत्यता पर अंतिम निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है।
यदि विधायक के पास किसी विशेष घटना की जानकारी या दस्तावेज हैं, तो उनकी सार्वजनिक जानकारी सामने आने पर पुलिस और प्रशासन के लिए उनकी स्वतंत्र जांच करना महत्वपूर्ण होगा।
2024 में Postmortem Room को लेकर सामने आया था अलग विवाद
संजय गांधी अस्पताल के Postmortem Room को लेकर जुलाई 2024 में एक अलग मामला जरूर सामने आया था। एक मृत महिला के परिजनों ने आरोप लगाया था कि Postmortem के बाद महिला के गले का लॉकेट और पैर की पायल गायब थी। परिजनों ने Ward Boy और Sweeper पर शक जताया था।
उस समय अस्पताल प्रबंधन ने आरोप से इनकार किया था। तत्कालीन अस्पताल अधीक्षक ने बताया था कि अस्पताल की पुलिस चौकी में इस मामले की शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। उन्होंने CCTV फुटेज देखने और कुछ संदिग्ध मिलने पर जांच तथा कार्रवाई की बात कही थी। यह मामला जुलाई 2024 की मीडिया रिपोर्टिंग पर आधारित है।
महत्वपूर्ण: 2024 में गहने गायब होने का आरोप और 2026 में विधायक द्वारा लगाया गया दुष्कर्म का आरोप दो अलग मामले हैं। पुराने मामले को मौजूदा आरोप का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
अस्पताल पहले से कई विवादों में
अभय मिश्रा का बयान ऐसे समय आया है जब संजय गांधी अस्पताल पिछले कुछ दिनों से लगातार विवादों में है। प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। मामले के बाद अस्पताल के तत्कालीन अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को पद से हटाकर डॉ. प्रियंक शर्मा को प्रभार दिए जाने की रिपोर्ट सामने आई। राज्य सरकार के आदेश में बदलाव का कारण स्पष्ट नहीं किया गया था, जबकि विवाद के बीच कार्रवाई की खबर सामने आई।
जिंदा मरीज को मृत घोषित करने की घटना ने भी उठाए सवाल
इसी बीच अस्पताल में एक 66 वर्षीय मरीज को मृत घोषित किए जाने का मामला भी सामने आया। रिपोर्टों के अनुसार मरीज को मृत बताए जाने के बाद परिजन उसे घर ले जाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन बाद में उसमें जीवन के संकेत पाए गए और उसे दोबारा उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। संबंधित विभाग के स्तर पर जांच में चूक की बात सामने आने की रिपोर्ट है।
हालांकि, इस घटना का विधायक द्वारा लगाए गए Postmortem संबंधी आरोप से कोई प्रत्यक्ष संबंध सामने नहीं आया है। दोनों घटनाओं को जोड़कर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
कलेक्टर और SP ने किया औचक निरीक्षण
अस्पताल को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के बीच 7 सितंबर की रात कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी और पुलिस अधीक्षक गुरू करण सिंह ने संजय गांधी अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। रिपोर्टों के अनुसार अधिकारियों ने Emergency सहित कई हिस्सों में व्यवस्थाओं का जायजा लिया। सफाई व्यवस्था में खामियां मिलने पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई और संबंधित जिम्मेदार के सात दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए।
अब जांच की जरूरत क्यों?
विधायक का आरोप सामान्य प्रशासनिक शिकायत से कहीं अधिक गंभीर है। यदि उनके पास किसी विशिष्ट घटना, परिवार, कर्मचारी या दस्तावेज से जुड़ी जानकारी है तो उसे सामने लाकर पुलिस अथवा प्रशासन को सौंपना जरूरी होगा।
इसी तरह Postmortem के नाम पर पैसे लिए जाने के आरोप की भी औपचारिक जांच की जा सकती है। इसमें Postmortem प्रक्रिया में तैनात कर्मचारियों, शव की निगरानी व्यवस्था, CCTV कैमरों, प्रवेश-निकास रिकॉर्ड और किसी भी भुगतान या शिकायत से जुड़े दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण होगी।
आरोप और तथ्य के बीच अंतर रखना जरूरी
इस पूरे मामले में दो बातें स्पष्ट रूप से अलग रखना जरूरी है।
पहली—कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने संजय गांधी अस्पताल की Postmortem व्यवस्था को लेकर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।
दूसरी—इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि करने वाला कोई आधिकारिक तथ्य फिलहाल सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
2024 में Postmortem के बाद मृत महिला के आभूषण गायब होने का आरोप सामने आया था, लेकिन वह मामला भी विधायक के मौजूदा आरोप को साबित नहीं करता।
अब यदि प्रशासन इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराता है तो स्थिति साफ हो सकती है। आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई जरूरी होगी और यदि आरोपों के पीछे तथ्य नहीं मिलते हैं तो जांच के निष्कर्ष से स्थिति स्पष्ट की जा सकेगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इस मामले को गंभीर लेकिन अपुष्ट आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।