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कालसर्प दोष क्या है: कुंडली में कैसे बनता है, 12 प्रकार, निवारण और पूजा कहां कराएं

✍️ विशेष संवाददाताPublished On 21st Aug, 2026 @ 1:00 AM
धर्म-ज्योतिष | Astro: कालसर्प दोष क्या है: कुंडली में कैसे बनता है, 12 प्रकार, निवारण और पूजा कहां कराएं
कालसर्प दोष क्या है: कुंडली में कैसे बनता है, 12 प्रकार, निवारण और पूजा कहां कराएंसाभार: The City Express

कालसर्प दोष को लेकर लोगों के मन में डर और कई तरह की धारणाएं हैं। जानिए ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार यह योग कैसे बनता है, इसके 12 प्रकार क्या हैं, निवारण के उपाय और त्र्यंबकेश्वर, उज्जैन समेत प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पूजा से जुड़ी जरूरी जानकारी।

📌 इस खबर की बड़ी बातें (Quick Read)

  • कालसर्प दोष की प्रचलित ज्योतिषीय परिभाषा, कुंडली में बनने की स्थिति और पूरी कुंडली देखने की जरूरत समझें।
  • अनंत से शेषनाग तक 12 प्रकारों की सूची और राहु-केतु की भाव स्थिति का संबंध जानिए।
  • शिव पूजा, राहु-केतु शांति, नाग देवता की आराधना और धार्मिक उपायों की प्रचलित विधि।
  • त्र्यंबकेश्वर, उज्जैन, श्रीकालहस्ती और कुक्के सुब्रमण्य जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पूजा कराने से पहले क्या जांचें।
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कालसर्प दोष का नाम आते ही बहुत से लोगों के मन में एक ही सवाल उठता है—क्या मेरी कुंडली में भी यह दोष है? कहीं इसी वजह से नौकरी में रुकावट, विवाह में देरी, कारोबार में नुकसान या जीवन में बार-बार आने वाली परेशानियां तो नहीं हो रही हैं?

ज्योतिष की दुनिया में कालसर्प दोष या कालसर्प योग सबसे चर्चित और सबसे अधिक डर पैदा करने वाले विषयों में से एक है। लेकिन अनुभवी ज्योतिषियों की मानें तो केवल किसी एक परेशानी, सपने या ऑनलाइन कुंडली रिपोर्ट के आधार पर कालसर्प दोष का निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं है। इसकी गणना के लिए राहु-केतु की स्थिति के साथ पूरी जन्मकुंडली का अध्ययन जरूरी माना जाता है।

धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इसके निवारण के लिए भगवान शिव की आराधना, राहु-केतु शांति, नाग देवता की पूजा और कुछ विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। हालांकि यहां एक बात पहले ही स्पष्ट कर देना जरूरी है कि कालसर्प दोष ज्योतिष और धार्मिक आस्था का विषय है, इसे आधुनिक विज्ञान द्वारा सिद्ध कारण-परिणाम के रूप में स्थापित नहीं किया गया है।

कालसर्प दोष क्या होता है?

प्रचलित ज्योतिषीय गणना के अनुसार जब जन्मकुंडली के सात प्रमुख ग्रह—सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि—राहु और केतु के बीच एक ही ओर स्थित हों, तो इसे कालसर्प योग या कालसर्प दोष कहा जाता है।

राहु और केतु हमेशा एक-दूसरे के विपरीत माने जाते हैं। इस कारण जन्मकुंडली में दोनों एक अक्ष बनाते हैं। यदि सभी सात ग्रह इस राहु-केतु अक्ष के एक ही भाग में आ जाएं, तो प्रचलित ज्योतिषीय परंपरा में कालसर्प योग की स्थिति मानी जाती है।

लेकिन यहीं सबसे महत्वपूर्ण बात आती है। कालसर्प योग की गणना को लेकर सभी ज्योतिषीय परंपराओं में पूरी तरह एक जैसी राय नहीं है। कुछ विद्वान ग्रहों की वास्तविक डिग्री को महत्वपूर्ण मानते हैं, कुछ राहु या केतु के साथ ग्रह की युति को अलग तरीके से देखते हैं, जबकि कुछ अपूर्ण स्थिति को आंशिक कालसर्प योग मानते हैं।

इसलिए केवल मोबाइल ऐप में दिखाई गई एक रिपोर्ट देखकर घबराना उचित नहीं है। सही निष्कर्ष के लिए जन्म समय, जन्म स्थान, ग्रहों की डिग्री, लग्न और पूरी कुंडली का अध्ययन जरूरी है।

क्या कालसर्प दोष का उल्लेख प्राचीन ज्योतिष ग्रंथों में मिलता है?

कालसर्प योग को लेकर ज्योतिष जगत में मतभेद का एक बड़ा कारण इसका शास्त्रीय आधार भी है। आधुनिक और लोकप्रिय ज्योतिषीय परंपराओं में कालसर्प योग की अवधारणा व्यापक रूप से प्रचलित है, लेकिन प्रमुख प्राचीन ज्योतिष ग्रंथों में आज प्रचलित रूप में “कालसर्प दोष” और इसके 12 प्रकारों का स्पष्ट, सर्वमान्य वर्णन मिलने को लेकर विद्वानों के बीच एकमत नहीं है।

यही कारण है कि किसी जिम्मेदार ज्योतिषीय विश्लेषण में इसे जीवन को बर्बाद कर देने वाला शाप बताना उचित नहीं माना जाता। अनुभवी ज्योतिषी आमतौर पर केवल एक योग के आधार पर जीवन का फैसला नहीं करते, बल्कि पूरी कुंडली में मौजूद शुभ-अशुभ ग्रह स्थिति, दशा-अंतर्दशा और अन्य योगों को भी देखते हैं।

कालसर्प दोष कैसे बनता है? आसान भाषा में समझें

इसे एक सरल उदाहरण से समझा जा सकता है। मान लीजिए राहु और केतु आपकी कुंडली में एक-दूसरे के सामने स्थित हैं। इनके बीच दो अलग-अलग दिशाओं में 180 डिग्री का क्षेत्र बनता है। अगर सूर्य से लेकर शनि तक सभी सात ग्रह इनमें से केवल एक ही हिस्से में आ जाएं, तो प्रचलित परिभाषा के अनुसार कालसर्प योग बन सकता है।

लेकिन किसी ग्रह का राहु या केतु के बिल्कुल पास होना, उसी राशि में होना या वास्तविक डिग्री के आधार पर अक्ष के किस ओर होना—ये सभी बातें गणना को प्रभावित कर सकती हैं। यही वजह है कि विशेषज्ञ बिना विस्तृत कुंडली देखे “100 प्रतिशत कालसर्प दोष” जैसा निष्कर्ष देने से बचने की सलाह देते हैं।

कालसर्प दोष के 12 प्रकार कौन-कौन से हैं?

लोकप्रिय ज्योतिषीय परंपरा में राहु की 12 भावों में स्थिति के आधार पर कालसर्प योग के 12 प्रकार बताए जाते हैं। इनके नाम और राहु-केतु की स्थिति इस प्रकार समझी जाती है:

  • 1. अनंत कालसर्प योग: राहु प्रथम भाव और केतु सप्तम भाव में।
  • 2. कुलिक कालसर्प योग: राहु द्वितीय भाव और केतु अष्टम भाव में।
  • 3. वासुकी कालसर्प योग: राहु तृतीय भाव और केतु नवम भाव में।
  • 4. शंखपाल कालसर्प योग: राहु चतुर्थ भाव और केतु दशम भाव में।
  • 5. पद्म कालसर्प योग: राहु पंचम भाव और केतु एकादश भाव में।
  • 6. महापद्म कालसर्प योग: राहु षष्ठम भाव और केतु द्वादश भाव में।
  • 7. तक्षक कालसर्प योग: राहु सप्तम भाव और केतु प्रथम भाव में।
  • 8. कर्कोटक कालसर्प योग: राहु अष्टम भाव और केतु द्वितीय भाव में।
  • 9. शंखचूड़ कालसर्प योग: राहु नवम भाव और केतु तृतीय भाव में।
  • 10. घातक कालसर्प योग: राहु दशम भाव और केतु चतुर्थ भाव में।
  • 11. विषधर कालसर्प योग: राहु एकादश भाव और केतु पंचम भाव में।
  • 12. शेषनाग कालसर्प योग: राहु द्वादश भाव और केतु षष्ठम भाव में।

यह वर्गीकरण लोकप्रिय आधुनिक ज्योतिषीय पद्धति में व्यापक रूप से इस्तेमाल होता है। अलग-अलग विद्वानों के यहां कुछ नामों की वर्तनी या व्याख्या में अंतर भी मिल सकता है।

क्या कालसर्प दोष हमेशा अशुभ होता है?

नहीं, केवल कालसर्प योग जैसी एक स्थिति देखकर किसी व्यक्ति का भविष्य खराब घोषित करना उचित नहीं है। यही बात ज्योतिष के गंभीर अध्ययन में सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।

किसी भी जन्मकुंडली में लग्न, लग्नेश, चंद्रमा की स्थिति, गुरु और शुक्र की शक्ति, अन्य शुभ योग, ग्रहों की दृष्टि, महादशा और अंतर्दशा जैसे कई कारक परिणाम बदल सकते हैं।

कई ज्योतिषी कालसर्प योग को संघर्ष, देरी या जीवन में असामान्य उतार-चढ़ाव से जोड़कर देखते हैं, लेकिन इसे हर व्यक्ति के लिए एक जैसे परिणाम देने वाला नियम नहीं माना जा सकता।

इसलिए यदि किसी ने आपको यह कह दिया है कि “आपकी कुंडली में कालसर्प दोष है, इसलिए जीवन में कभी सफलता नहीं मिलेगी”, तो ऐसी बात पर बिना जांच के विश्वास करना ठीक नहीं है।

कालसर्प दोष के नाम पर किन परेशानियों को जोड़ा जाता है?

लोकप्रिय ज्योतिषीय मान्यताओं में कालसर्प योग को कई तरह की जीवन स्थितियों से जोड़ा जाता है। इनमें करियर में रुकावट, काम में देरी, आर्थिक उतार-चढ़ाव, संबंधों में तनाव, मानसिक बेचैनी और अचानक बदलाव जैसी बातें शामिल हैं।

लेकिन यहां एक सावधानी बेहद जरूरी है। नौकरी न लगना, शादी में देरी होना, व्यापार में घाटा या सांप का सपना आना अपने आप में कालसर्प दोष का प्रमाण नहीं है। इन सभी स्थितियों के व्यावहारिक, सामाजिक, आर्थिक या स्वास्थ्य संबंधी कारण भी हो सकते हैं।

कालसर्प दोष का निवारण कैसे किया जाता है?

धार्मिक परंपराओं में कालसर्प योग से जुड़े उपाय मुख्य रूप से भगवान शिव, राहु-केतु और नाग देवता की आराधना से जुड़े बताए जाते हैं। व्यक्ति अपनी आस्था और पारिवारिक परंपरा के अनुसार इनमें से किसी उपाय को अपना सकता है।

1. भगवान शिव की पूजा

कालसर्प से जुड़े उपायों में भगवान शिव की आराधना को प्रमुख माना जाता है। श्रद्धालु सोमवार या अपनी सुविधा के अनुसार शिवलिंग पर जल अर्पित कर पूजा कर सकते हैं।

2. रुद्राभिषेक

कई शिव मंदिरों में रुद्राभिषेक कराया जाता है। इसे विशेष रूप से भगवान शिव की उपासना से जुड़ा धार्मिक अनुष्ठान माना जाता है। पूजा की विधि मंदिर और स्थानीय परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।

3. महामृत्युंजय मंत्र का जप

भगवान शिव से जुड़े धार्मिक उपायों में महामृत्युंजय मंत्र का जप भी किया जाता है। मंत्र जप की संख्या और विधि को लेकर अलग-अलग परंपराएं हैं, इसलिए बड़े अनुष्ठान के लिए योग्य आचार्य की सलाह ली जा सकती है।

4. राहु-केतु शांति पूजा

कुछ धार्मिक परंपराओं में राहु और केतु से संबंधित विशेष पूजा या शांति अनुष्ठान कराया जाता है। इसकी सामग्री और विधि स्थान तथा परंपरा के अनुसार बदल सकती है।

5. नाग देवता की आराधना

नाग देवता की पूजा भारतीय धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। नाग पंचमी जैसे अवसरों पर श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना करते हैं।

कालसर्प दोष पूजा की सामान्य विधि क्या होती है?

पूजा की पूरी प्रक्रिया मंदिर, क्षेत्र और पुरोहित की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। हालांकि सामान्य रूप से विशेष पूजा में निम्न चरण शामिल हो सकते हैं:

  • यजमान द्वारा संकल्प
  • गणेश पूजन
  • कलश स्थापना और देवताओं का आवाहन
  • भगवान शिव की पूजा
  • राहु-केतु से संबंधित मंत्रोच्चार
  • नाग देवता का पूजन
  • रुद्राभिषेक या संबंधित अनुष्ठान
  • हवन और पूर्णाहुति

हर जगह पूजा बिल्कुल इसी क्रम में हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए किसी भी पूजा के लिए पहले यह पूछना चाहिए कि अनुष्ठान में क्या-क्या शामिल होगा, कितनी अवधि होगी और कौन-सी परंपरा के अनुसार पूजा कराई जाएगी।

कालसर्प दोष की पूजा कहां कराएं?

भारत में कई प्रमुख धार्मिक स्थल हैं जहां राहु-केतु, नाग देवता या शिव उपासना से जुड़े विशेष अनुष्ठान कराए जाते हैं। इनमें सबसे अधिक चर्चित स्थानों में त्र्यंबकेश्वर, उज्जैन, श्रीकालहस्ती और कुक्के सुब्रमण्य शामिल हैं।

त्र्यंबकेश्वर, महाराष्ट्र

नासिक जिले के त्र्यंबक क्षेत्र में स्थित त्र्यंबकेश्वर भगवान शिव के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। यह स्थान विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के लिए भी प्रसिद्ध है।

यहां पूजा कराने के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि श्रद्धालु केवल विश्वसनीय और सत्यापित पुरोहित या अधिकृत व्यवस्था से ही संपर्क करें। त्र्यंबकेश्वर देवस्थान ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन पूजा सेवाओं में वर्तमान में रुद्राभिषेक और लघुरुद्र जैसी सेवाओं की जानकारी उपलब्ध है। वहीं क्षेत्र के पुरोहित संघ से जुड़े स्रोतों पर कालसर्प पूजा सहित अन्य पारंपरिक अनुष्ठानों की जानकारी दी जाती है।

सावधानी: इंटरनेट पर त्र्यंबकेश्वर के नाम से कई निजी वेबसाइट और एजेंट सक्रिय हैं। इसलिए किसी को अग्रिम भुगतान करने से पहले उसकी प्रामाणिकता, पूजा की प्रक्रिया और रसीद की व्यवस्था जरूर जांचें।

महाकालेश्वर, उज्जैन

उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के प्रमुख तीर्थों में शामिल है। मंदिर की आधिकारिक पूजा व्यवस्था में रुद्राभिषेक, लघुरुद्राभिषेक, महारुद्राभिषेक और महामृत्युंजय जाप जैसी विभिन्न सेवाएं शामिल हैं।

यदि कोई व्यक्ति “महाकाल मंदिर में कालसर्प दोष की विशेष पूजा” कराने की योजना बना रहा है, तो पहले मंदिर प्रशासन या आधिकारिक पूजा व्यवस्था से इसकी पुष्टि जरूर कर लें। किसी निजी व्यक्ति के केवल दावे के आधार पर भुगतान करना उचित नहीं है।

श्रीकालहस्ती, आंध्र प्रदेश

श्रीकालहस्ती मंदिर राहु-केतु से संबंधित पूजा परंपराओं के कारण भी व्यापक रूप से जाना जाता है। दक्षिण भारत में राहु-केतु पूजा कराने के लिए श्रद्धालु इस क्षेत्र का रुख करते हैं।

यात्रा से पहले मंदिर की आधिकारिक व्यवस्था, पूजा का समय, टिकट या बुकिंग प्रक्रिया की पुष्टि करना जरूरी है, क्योंकि व्यवस्था समय के साथ बदल सकती है।

कुक्के सुब्रमण्य, कर्नाटक

कर्नाटक का कुक्के श्री सुब्रमण्य मंदिर सर्प देवता और सर्प संबंधी धार्मिक अनुष्ठानों के लिए प्रसिद्ध है। यहां सरपा संस्कार और आश्लेषा बली जैसे विशेष अनुष्ठानों की धार्मिक परंपरा है।

ध्यान रखें कि हर सर्प संबंधी पूजा को कालसर्प दोष पूजा कहना सही नहीं है। हर मंदिर की अपनी अलग धार्मिक परंपरा और अनुष्ठान पद्धति होती है।

कालसर्प दोष की पूजा कराने से पहले ये 7 बातें जरूर पूछें

  • पहला: क्या वास्तव में पूरी कुंडली देखकर कालसर्प योग की पुष्टि हुई है?
  • दूसरा: जन्म समय कितना सटीक है?
  • तीसरा: ग्रहों की वास्तविक डिग्री देखकर गणना की गई है या सिर्फ राशि देखकर?
  • चौथा: पूजा मंदिर की आधिकारिक व्यवस्था से हो रही है या किसी निजी एजेंट के माध्यम से?
  • पांचवां: पूजा में कौन-कौन सी सामग्री और अनुष्ठान शामिल हैं?
  • छठा: कुल दक्षिणा या शुल्क कितना है? क्या इसकी पहले से स्पष्ट जानकारी और रसीद मिलेगी?
  • सातवां: क्या आपको “तुरंत पूजा नहीं कराई तो अनर्थ हो जाएगा” कहकर डराया जा रहा है?

आखिरी सवाल सबसे महत्वपूर्ण है। धार्मिक आस्था और भय दिखाकर आर्थिक दबाव बनाने में अंतर होता है। कोई भी पूजा अपनी श्रद्धा और आर्थिक क्षमता के अनुसार ही करानी चाहिए।

घर पर कालसर्प दोष के लिए क्या किया जा सकता है?

जो लोग किसी बड़े अनुष्ठान के बजाय नियमित धार्मिक साधना करना चाहते हैं, वे अपनी आस्था के अनुसार भगवान शिव की पूजा, शिव मंत्रों का जप और सकारात्मक धार्मिक आचरण अपना सकते हैं।

  • सोमवार को भगवान शिव की पूजा करें।
  • शिवलिंग पर अपनी परंपरा के अनुसार जल अर्पित करें।
  • महामृत्युंजय मंत्र या अन्य शिव मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें।
  • नाग देवता के प्रति श्रद्धा रखें और नाग पंचमी जैसे पर्व पर परंपरा अनुसार पूजा करें।
  • दान, सेवा और जरूरतमंदों की सहायता जैसे सकारात्मक कार्यों को जीवन का हिस्सा बनाएं।

क्या जीवित सांप को दूध पिलाना चाहिए?

धार्मिक मान्यता और वन्यजीवों के साथ व्यवहार को अलग-अलग समझना जरूरी है। किसी जीवित सांप को पकड़ने, छेड़ने या उसके पास जाकर प्रयोग करने की कोशिश न करें। यह व्यक्ति और सांप दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है।

धार्मिक आस्था के लिए मंदिर, नाग देवता की प्रतिमा या स्थापित पूजा स्थल पर पूजा की जा सकती है। वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाना या उनके प्राकृतिक व्यवहार में हस्तक्षेप करना उचित नहीं है।

क्या कालसर्प दोष की पूजा से जीवन की सारी समस्याएं खत्म हो जाती हैं?

इस सवाल का सीधा जवाब है—ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि किसी विशेष पूजा से जीवन की हर समस्या निश्चित रूप से समाप्त हो जाएगी।

धार्मिक दृष्टि से पूजा व्यक्ति को मानसिक शांति, विश्वास और आध्यात्मिक संतुलन दे सकती है। लेकिन नौकरी, कारोबार, स्वास्थ्य, विवाह, कानूनी विवाद या आर्थिक परेशानी के वास्तविक कारणों पर व्यावहारिक रूप से काम करना भी उतना ही जरूरी है।

स्वास्थ्य समस्या हो तो डॉक्टर की सलाह लें। आर्थिक परेशानी हो तो सही वित्तीय योजना बनाएं। कानूनी मामले में विशेषज्ञ से सलाह लें और मानसिक तनाव बढ़ रहा हो तो योग्य विशेषज्ञ की मदद लेने में संकोच न करें।

कालसर्प दोष पर अंतिम बात

कालसर्प दोष को लेकर सबसे पहले डर नहीं, बल्कि सही जानकारी जरूरी है। प्रचलित ज्योतिषीय परिभाषा के अनुसार यह राहु-केतु अक्ष और सात ग्रहों की एक विशेष स्थिति से जुड़ा योग है, लेकिन इसकी गणना और प्रभावों को लेकर अलग-अलग ज्योतिषीय मत मौजूद हैं।

इसलिए किसी भी व्यक्ति को केवल एक ऑनलाइन रिपोर्ट या किसी डराने वाली भविष्यवाणी के आधार पर महंगी पूजा कराने का फैसला नहीं करना चाहिए। पहले पूरी कुंडली की जांच कराएं, जरूरत हो तो एक से अधिक योग्य ज्योतिषियों की राय लें और फिर अपनी श्रद्धा व सामर्थ्य के अनुसार निर्णय करें।

भगवान शिव की आराधना, नियमित साधना, सकारात्मक आचरण और जीवन की वास्तविक समस्याओं के लिए व्यावहारिक प्रयास—इन सभी को संतुलित दृष्टि से अपनाना ही सबसे समझदारी भरा रास्ता है।

FAQs: कालसर्प दोष से जुड़े जरूरी सवाल

कालसर्प दोष क्या होता है?

प्रचलित ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार जब सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि राहु-केतु अक्ष के एक ही भाग में स्थित हों, तो कालसर्प योग की स्थिति मानी जाती है।

क्या कालसर्प दोष हमेशा अशुभ होता है?

नहीं। केवल एक योग देखकर पूरी कुंडली का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। ग्रहों की शक्ति, दशा-अंतर्दशा और अन्य योगों का भी अध्ययन जरूरी माना जाता है।

कालसर्प दोष के कितने प्रकार होते हैं?

लोकप्रिय ज्योतिषीय वर्गीकरण में इसके 12 प्रकार बताए जाते हैं—अनंत, कुलिक, वासुकी, शंखपाल, पद्म, महापद्म, तक्षक, कर्कोटक, शंखचूड़, घातक, विषधर और शेषनाग।

कालसर्प दोष की पूजा कहां कराई जा सकती है?

त्र्यंबकेश्वर, उज्जैन, श्रीकालहस्ती और कुक्के सुब्रमण्य जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल राहु-केतु, शिव या सर्प संबंधी पूजा परंपराओं के लिए प्रसिद्ध हैं। पूजा कराने से पहले संबंधित मंदिर या अधिकृत व्यवस्था से जानकारी की पुष्टि जरूर करें।

क्या महाकाल मंदिर में कालसर्प दोष पूजा की आधिकारिक सेवा उपलब्ध है?

महाकालेश्वर मंदिर की आधिकारिक पूजा व्यवस्था में रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय जाप सहित कई सेवाएं उपलब्ध हैं। “कालसर्प दोष पूजा” के नाम से किसी विशेष सेवा की उपलब्धता की पुष्टि सीधे मंदिर प्रशासन या आधिकारिक माध्यम से करना बेहतर है।

क्या कालसर्प दोष के नाम पर डरना चाहिए?

नहीं। बिना पूरी कुंडली की जांच के किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए। डर दिखाकर तुरंत महंगी पूजा कराने का दबाव बनाया जाए तो सावधानी बरतें।

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13 घंटे पहले|सीधी
मध्यप्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट: रीवा-मऊगंज समेत 15 जिलों में गरज-चमक और 40 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाओं का खतरा
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मध्यप्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट: रीवा-मऊगंज समेत 15 जिलों में गरज-चमक और 40 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाओं का खतरा

मौसम विभाग (IMD) ने 20 और 21 अगस्त को पूरे मध्य प्रदेश, विशेषकर पूर्वी अंचल में बहुत भारी बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है; नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह।

1 दिन पहले|दमोह
एमपी के 13 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट: सीधी, मऊगंज और डिंडौरी में 8 इंच तक पानी गिरने की चेतावनी, जानें अगले 48 घंटों का मौसम पूर्वानुमान

एमपी के 13 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट: सीधी, मऊगंज और डिंडौरी में 8 इंच तक पानी गिरने की चेतावनी, जानें अगले 48 घंटों का मौसम पूर्वानुमान

बंगाल की खाड़ी में बने मजबूत मानसूनी सिस्टम के कारण मध्य प्रदेश के पूर्वी संभागों में तेज बारिश का दौर शुरू हो गया है, सीधी-मऊगंज और डिंडौरी में ऑरेंज अलर्ट जारी।

3 दिन पहले|दमोह

भोपाल की बड़ी खबरें

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मध्यप्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट: रीवा-मऊगंज समेत 15 जिलों में गरज-चमक और 40 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाओं का खतरा
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मध्यप्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट: रीवा-मऊगंज समेत 15 जिलों में गरज-चमक और 40 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाओं का खतरा

मौसम विभाग (IMD) ने 20 और 21 अगस्त को पूरे मध्य प्रदेश, विशेषकर पूर्वी अंचल में बहुत भारी बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है; नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह।

1 दिन पहले|शिवपुरी
मध्य प्रदेश में 4 IAS अधिकारियों के तबादले: भारती ओगरे को उच्च शिक्षा तो मनीषा सेतिया को पर्यटन विभाग की जिम्मेदारी, आदेश जारी

मध्य प्रदेश में 4 IAS अधिकारियों के तबादले: भारती ओगरे को उच्च शिक्षा तो मनीषा सेतिया को पर्यटन विभाग की जिम्मेदारी, आदेश जारी

सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने मंत्रालय स्तर पर पदस्थ भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 4 अधिकारियों की नवीन पदस्थापना सूची जारी की; मुख्य सचिव के हस्ताक्षर से जारी हुआ आदेश।

1 दिन पहले|मध्य प्रदेश
50 हजार की रिश्वत लेते पकड़े गए PWD के चीफ इंजीनियर निलंबित: रीवा लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाई के बाद शासन का एक्शन, भोपाल अटैच

50 हजार की रिश्वत लेते पकड़े गए PWD के चीफ इंजीनियर निलंबित: रीवा लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाई के बाद शासन का एक्शन, भोपाल अटैच

रीवा में टेस्टिंग लैब मैनेजर से रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए लोक निर्माण विभाग के प्रभारी चीफ इंजीनियर कैलाश कुमार लच्छे को विभाग ने निलंबित कर प्रमुख अभियंता कार्यालय भोपाल मुख्यालय नियत किया।

1 दिन पहले|मध्य प्रदेश

इंदौर की बड़ी खबरें

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मध्यप्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट: रीवा-मऊगंज समेत 15 जिलों में गरज-चमक और 40 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाओं का खतरा
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मध्यप्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट: रीवा-मऊगंज समेत 15 जिलों में गरज-चमक और 40 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाओं का खतरा

मौसम विभाग (IMD) ने 20 और 21 अगस्त को पूरे मध्य प्रदेश, विशेषकर पूर्वी अंचल में बहुत भारी बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है; नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह।

1 दिन पहले|जबलपुर
एमपी के 13 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट: सीधी, मऊगंज और डिंडौरी में 8 इंच तक पानी गिरने की चेतावनी, जानें अगले 48 घंटों का मौसम पूर्वानुमान

एमपी के 13 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट: सीधी, मऊगंज और डिंडौरी में 8 इंच तक पानी गिरने की चेतावनी, जानें अगले 48 घंटों का मौसम पूर्वानुमान

बंगाल की खाड़ी में बने मजबूत मानसूनी सिस्टम के कारण मध्य प्रदेश के पूर्वी संभागों में तेज बारिश का दौर शुरू हो गया है, सीधी-मऊगंज और डिंडौरी में ऑरेंज अलर्ट जारी।

3 दिन पहले|शहडोल
MP Weather Alert: 18 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, जबलपुर-रीवा-शहडोल में बना स्ट्रांग सिस्टम

MP Weather Alert: 18 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, जबलपुर-रीवा-शहडोल में बना स्ट्रांग सिस्टम

मध्य प्रदेश में मानसून फिर सक्रिय है। जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग समेत कई 18 जिलों में भारी बारिश की संभावना है, जबकि 16 से 19 अगस्त तक मौसम सक्रिय रहने का अनुमान है।

4 दिन पहले|शहडोल