✍️ विशेष संवाददाता•Published On 6th Sept, 2026 @ 11:40 AM
Updated On 7th Sept, 2026 @ 1:04 AM
मध्यप्रदेश के सागर जिले के बंडा क्षेत्र में संदिग्ध जहरीली शराब से मौतों का आंकड़ा 12 तक पहुंच गया है। रविवार रात की समीक्षा में कलेक्टर प्रतिभा पाल के मुताबिक 109 प्रभावित मरीजों का उपचार चल रहा था, जिनमें 12 ICU में थे और एक गंभीर मरीज को Air Ambulance से AIIMS भोपाल भेजा गया। मामले में बंडा और विनायका थाना क्षेत्रों में कुल 30 नामजद आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है, जिनमें 10 को हिरासत में लिया गया है। वहीं लापरवाही के आरोप में आबकारी और पुलिस विभाग के 5 अधिकारी निलंबित किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में शराब में Methanol की मिलावट की आशंका/जानकारी सामने आई है और सप्लाई नेटवर्क का कनेक्शन उत्तर प्रदेश के ललितपुर तक पहुंच रहा है।
सागर में संदिग्ध जहरीली शराब से हुई मौतों का मामला अब और गंभीर हो गया है। मध्यप्रदेश के सागर जिले की बंडा तहसील में शराब पीने के बाद बीमार हुए लोगों में से अब तक 12 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। रविवार रात हुई समीक्षा बैठक में कलेक्टर प्रतिभा पाल के मुताबिक प्रभावित कुल 109 मरीजों का उपचार चल रहा था। इनमें बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) में 85, जिला चिकित्सालय में 17 और बंडा सिविल अस्पताल में 7 मरीज बताए गए। 12 मरीज ICU में हैं, जबकि एक गंभीर मरीज को Air Ambulance से AIIMS भोपाल भेजा गया है।
मामले में प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई भी तेज हो गई है। बंडा थाना क्षेत्र में 20 नामजद आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है, जिनमें से 10 को हिरासत में लिया गया है। वहीं विनायका थाना क्षेत्र में भी 10 आरोपियों के खिलाफ नामजद प्रकरण दर्ज किया गया है। इस तरह दोनों थाना क्षेत्रों में कुल 30 लोगों के खिलाफ नामजद केस की जानकारी सामने आई है।
12 मौतों के बाद प्रशासन में बड़ा एक्शन
घटना के बाद सरकार ने आबकारी और पुलिस विभाग के अधिकारियों पर भी कार्रवाई की है। सहायक आबकारी आयुक्त कीर्ति दुबे, जिला आबकारी अधिकारी दिलीप खंडाते, बंडा के आबकारी उप निरीक्षक रोशनी उरेते, गूगरा चौकी प्रभारी ASI पूरन सिंह और बंडा थाना प्रभारी राजेंद्र कुशवाहा को निलंबित किया गया है।
इसके अलावा संभागीय फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी और उपायुक्त स्तर की अधिकारी नीरजा श्रीवास्तव को ग्वालियर मुख्यालय अटैच किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों में इन कार्रवाइयों को घटना की निगरानी और अवैध शराब के खिलाफ विभागीय स्तर पर बरती गई कथित लापरवाही से जोड़कर बताया गया है। हालांकि, निलंबन अपने आप में किसी अधिकारी की अंतिम दोषसिद्धि नहीं है।
109 प्रभावित मरीजों का इलाज, 12 ICU में
रविवार रात उप मुख्यमंत्री और सागर जिले के प्रभारी मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने BMC पहुंचकर मरीजों के इलाज की स्थिति की समीक्षा की। स्थानीय अपडेट के मुताबिक कलेक्टर प्रतिभा पाल ने बताया कि कुल 109 प्रभावित मरीजों का उपचार चल रहा था। इनमें 85 मरीज BMC में, 17 जिला अस्पताल में और 7 बंडा सिविल अस्पताल में उपचाररत बताए गए।
इनमें से 12 मरीजों को ICU में रखा गया है। एक गंभीर मरीज की हालत को देखते हुए उसे Air Ambulance से AIIMS भोपाल भेजा गया। अस्पतालों में गंभीर मरीजों के लिए Dialysis और अन्य आवश्यक जांच एवं उपचार की व्यवस्था की गई है।
हालांकि, अलग-अलग समय पर जारी रिपोर्टों में अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या अलग-अलग बताई गई है। इसलिए 109 के आंकड़े को इस खबर में “प्रभावित मरीजों का उपचार” माना गया है, न कि एक ही समय में सभी के अस्पताल में भर्ती होने का आंकड़ा।
शरीर नीला पड़ने और अकड़न जैसे लक्षण
इस घटना ने चिंता इसलिए भी बढ़ाई है क्योंकि कुछ मरीजों में गंभीर लक्षण सामने आए हैं। अधिकारियों और डॉक्टरों के मुताबिक कुछ मरीजों के शरीर में नीला पड़ना यानी Cyanosis और अकड़न जैसे लक्षण देखे गए हैं। उल्टी, सिरदर्द और बुखार जैसे लक्षणों के बाद भी लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया।
प्रशासन ने प्रभावित गांवों में Medical Teams तैनात कर घर-घर Screening शुरू की है। जिन लोगों ने पिछले 24 से 48 घंटे में शराब का सेवन किया है और उनमें किसी तरह के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, उन्हें तत्काल स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर जांच कराने की अपील की गई है।
पोस्टमॉर्टम में Methanol Poisoning का शक
मामले की जांच में सबसे गंभीर कड़ी Methanol की सामने आई है। प्रारंभिक जांच और कुछ Postmortem Findings में Methanol Alcohol Poisoning की आशंका जताई गई है। Times of India ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि प्रारंभिक Autopsy Findings में Methanol Poisoning को मौत का Prima Facie कारण माना गया है।
हालांकि, पूरे मामले में अंतिम चिकित्सकीय और कानूनी निष्कर्ष जांच तथा सभी रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। Methanol अत्यधिक जहरीला Industrial Alcohol है और इसके सेवन से गंभीर Metabolic Poisoning, आंखों की रोशनी जाने, Organ Failure और मौत तक की स्थिति हो सकती है।
ललितपुर तक पहुंची शराब की Supply Chain
पुलिस की शुरुआती जांच में संदिग्ध शराब की Supply Chain का कनेक्शन उत्तर प्रदेश के ललितपुर से सामने आया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि शराब कहां तैयार हुई, किसने उसे सागर तक पहुंचाया और किन लोगों ने उसे गांवों में बेचने का काम किया।
पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया के निर्देश पर अलग-अलग टीमें संदिग्ध ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस अब केवल शराब बेचने वालों तक सीमित न रहकर पूरे निर्माण-सप्लाई-बिक्री नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 4 मई को दर्ज एक FIR में भी नकली शराब के ऐसे नेटवर्क का उल्लेख था, जिसमें सागर और मध्यप्रदेश के अन्य इलाकों तक कथित सप्लाई का जिक्र किया गया था। अब सागर मामले में सामने आए Lalitpur Connection की उस पुराने नेटवर्क से कड़ी जुड़ती है या नहीं, इसकी जांच की जा रही है।
7 शराब दुकानें सील, सैंपल जांच के लिए भेजे
एहतियातन प्रभावित क्षेत्र की 7 शराब दुकानों को सील किया गया है। इनमें बरेठी, बंडा, शाहगढ़, मगरधा, विनायका, दलपतपुर और बरायठा की दुकानें शामिल हैं। अधिकारियों ने दुकानों से शराब के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे हैं।
प्रशासन यह भी जांच रहा है कि जिन लोगों ने शराब का सेवन किया, उन्हें शराब किस स्रोत से मिली थी और क्या अलग-अलग स्थानों से मिली शराब का स्रोत एक ही था।
नौराज और गूगरा खुर्द पहुंचे बड़े अधिकारी
मौतों की सूचना के बाद सागर संभाग के वरिष्ठ अधिकारी प्रभावित गांवों में पहुंचे। कमिश्नर, IG, कलेक्टर और SP ने नौराज तथा गूगरा खुर्द में पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और अस्पतालों में भर्ती मरीजों की स्थिति की जानकारी ली।
स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित इलाकों में लगातार Screening कर रही हैं, ताकि ऐसे लोगों की पहचान की जा सके जिन्होंने संदिग्ध शराब का सेवन किया है लेकिन अभी अस्पताल नहीं पहुंचे हैं।
“आधे घंटे में मौत” का दावा
एक मृतक के रिश्तेदार रामकुमार दांगी ने बताया कि उनके चचेरे भाई समेत गांव में चार लोगों की मौत हुई। उनके मुताबिक तीन लोगों ने साथ में शराब पी थी, जिसके बाद उनकी हालत तेजी से बिगड़ी और शरीर ठंडा पड़ने के बाद करीब आधे घंटे में मौत हो गई।
यह बयान परिजनों के अनुभव पर आधारित है। मौत का चिकित्सकीय कारण जांच और Medical Reports से ही अंतिम रूप से स्थापित होगा।
CM मोहन यादव ने कहा- दोषियों को नहीं बख्शेंगे
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटना को गंभीर बताते हुए अधिकारियों और प्रभारी मंत्री को तत्काल मौके पर जाकर जांच के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे मामलों को बर्दाश्त नहीं करेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, उप मुख्यमंत्री और प्रभारी मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने भी समीक्षा के दौरान अवैध शराब के कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाने और जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।
विपक्ष ने उठाए संरक्षण और प्रशासनिक लापरवाही के सवाल
घटना के बाद कांग्रेस ने सरकार पर हमला तेज कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सवाल उठाया कि अवैध शराब का कारोबार किसके संरक्षण में चल रहा है और शराब माफिया बेखौफ क्यों हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी मरीजों की गंभीर स्थिति का हवाला देते हुए इसे अवैध शराब कारोबार और प्रशासनिक लापरवाही से जुड़ा मामला बताया।
इन राजनीतिक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, सरकार की ओर से मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।
अब जांच के सामने सबसे बड़े सवाल
सागर की यह घटना अब केवल शराब पीने से हुई मौतों की जांच तक सीमित नहीं रह गई है। जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि Methanol या संदिग्ध शराब की Supply Chain कहां से शुरू हुई, किसने उसे तैयार किया, किसने सागर पहुंचाया और स्थानीय स्तर पर किस नेटवर्क ने उसे बेचा।
साथ ही यह भी जांच का विषय है कि अवैध शराब की बिक्री की पहले कोई शिकायत या सूचना प्रशासन के पास पहुंची थी या नहीं और यदि पहुंची थी तो उस पर क्या कार्रवाई की गई। अधिकारियों के निलंबन से विभागीय जवाबदेही की शुरुआत हो गई है, लेकिन पूरे नेटवर्क की अंतिम जिम्मेदारी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल सागर में सबसे बड़ी चुनौती नए मरीजों की पहचान, गंभीर मरीजों का इलाज और संदिग्ध शराब की Supply Chain को पूरी तरह तोड़ना है। 12 मौतों और बड़ी संख्या में प्रभावित मरीजों के बाद अब जांच का दायरा सागर से निकलकर उत्तर प्रदेश के ललितपुर तक पहुंच चुका है।