✍️ विशेष संवाददाता•Published On 13th Sept, 2026 @ 10:55 PM
Updated On 14th Sept, 2026 @ 12:44 AM
पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्यव्यापी सर्वे के बाद 252 मदरसों को बंद करने के लिए नोटिस/आदेश जारी किया है। करीब 100 अन्य मदरसों को कारण बताओ नोटिस दिया गया है। सरकार के अनुसार कार्रवाई का आधार जरूरी मंजूरी, बुनियादी ढांचे, शिक्षक-छात्र संख्या और नियमों के पालन से जुड़ी कमियां हैं।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में मदरसों को लेकर राज्य सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। राज्यव्यापी सर्वे और सत्यापन के बाद 252 मदरसों को बंद करने के लिए नोटिस/आदेश जारी किए गए हैं। इसके अलावा करीब 100 अन्य मदरसों को कारण बताओ नोटिस भेजकर उनसे उनकी स्थिति और संचालन से जुड़े दस्तावेजों के बारे में जवाब मांगा गया है।
अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के अनुसार यह कार्रवाई राज्यभर में किए गए सर्वे के बाद की गई। सर्वे में मदरसों की सरकारी मंजूरी, पंजीकरण, बुनियादी सुविधाएं, शिक्षक और छात्र संख्या, पाठ्यक्रम तथा प्रशासनिक नियमों के पालन जैसी चीजों की जांच की गई।
252 मदरसों पर क्यों हुई कार्रवाई?
सरकार के अनुसार बंद करने की कार्रवाई वाले 252 संस्थानों में न्यूनतम बुनियादी ढांचा और जरूरी अनुमोदन से जुड़ी कमियां पाई गईं। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि कुछ संस्थानों में निर्धारित शैक्षणिक व्यवस्था और प्रशासनिक नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था।
अल्पसंख्यक मामलों एवं मदरसा शिक्षा विभाग के मंत्री खुदीराम टुडू के अनुसार, जिन मदरसों को कारण बताओ नोटिस दिया गया है, उन्हें अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो उनके खिलाफ भी आगे की कार्रवाई की जाएगी।
किन जिलों में सबसे ज्यादा कार्रवाई?
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 252 मदरसों में सबसे ज्यादा कार्रवाई मालदा जिले में हुई है। यहां करीब 44 से 45 मदरसों को बंद करने का नोटिस दिया गया। इसके बाद उत्तर दिनाजपुर में करीब 37 और दक्षिण 24 परगना में करीब 32 मदरसों के खिलाफ कार्रवाई हुई। नदिया और मुर्शिदाबाद में करीब 25-25 संस्थानों को नोटिस दिए गए हैं।
100 मदरसों को Show Cause Notice
सरकार ने करीब 100 अन्य मदरसों को तत्काल बंद करने के बजाय पहले Show Cause Notice जारी किया है। इन संस्थानों से पूछा गया है कि उनके संचालन को नियमों के अनुरूप क्यों माना जाए। विभाग जवाबों की समीक्षा के बाद आगे का निर्णय लेगा।
राज्य में मदरसों की स्थिति पर सर्वे
रिपोर्टों के मुताबिक राज्य में सर्वे के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे मदरसों की जानकारी सामने आई, जिनके पास आवश्यक सरकारी या बोर्ड स्तर का Registration/Affiliation नहीं था। प्रशासन ने विशेष रूप से ऐसे स्वतंत्र संस्थानों की भी जांच की, जो सरकारी नियंत्रण या सहायता के बाहर संचालित होते हैं।
कुछ प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से कुछ संस्थानों में कथित तौर पर 'भारत विरोधी' शिक्षा दिए जाने और छात्रों के कथित कट्टरपंथीकरण जैसे आरोपों का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि ऐसे गंभीर आरोपों को किसी संस्था के खिलाफ तथ्य के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय प्रशासनिक दावे के रूप में देखना जरूरी है और कार्रवाई के लिए संबंधित संस्थानों के खिलाफ ठोस प्रमाण तथा कानून के अनुरूप प्रक्रिया आवश्यक होगी।
सरकार का क्या कहना है?
सरकार का कहना है कि जिन मदरसों के पास आवश्यक मंजूरी और नियमों के अनुरूप व्यवस्था है, उन्हें बंद नहीं किया जाएगा। कार्रवाई का उद्देश्य ऐसे संस्थानों पर नियंत्रण और नियमन सुनिश्चित करना है जो आवश्यक मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं।
सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि मदरसों की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी तथा अनधिकृत या नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
क्या सभी 252 मदरसे तुरंत बंद हो गए?
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। उपलब्ध रिपोर्टों में 252 मदरसों के लिए Closure Notice/बंद करने की कार्रवाई की बात कही गई है। वहीं करीब 100 अन्य मदरसों को पहले कारण बताओ नोटिस दिया गया है। इसलिए 100 संस्थानों पर अभी अंतिम कार्रवाई उनके जवाब की समीक्षा के बाद तय होनी है।