✍️ विशेष संवाददाता•Published On 11th Sept, 2026 @ 7:04 PM
उत्तराखंड के ऋषिकेश में एक बेहद असामान्य मामला सामने आया है। गीता नगर निवासी साईं राम को इलाज के बाद मृत घोषित किए जाने पर परिवार अंतिम संस्कार की तैयारी में जुट गया था। अंतिम यात्रा के लिए शव वाहन भी बुक हो चुका था। परिवार के मुताबिक, श्यामपुर रेलवे फाटक के पास एंबुलेंस का पहिया सड़क के गहरे गड्ढे में जाने से जोरदार झटका लगा। इसके बाद साईं राम की आंखें खुलीं और सांस चलने के संकेत दिखाई दिए। अंतिम संस्कार रोककर उन्हें दोबारा AIIMS ऋषिकेश ले जाया गया, जहां उन्हें भर्ती किया गया। AIIMS के जनसंपर्क अधिकारी ने भी बताया कि जीवन के संकेत मिलने के बाद उन्हें दोबारा अस्पताल में भर्ती किया गया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सड़क के झटके से ही उनकी सांसें वापस आईं।
ऋषिकेश में मृत घोषित व्यक्ति की सांसें चलने का मामला: उत्तराखंड के ऋषिकेश से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने परिवार से लेकर स्थानीय लोगों तक को हैरान कर दिया। गीता नगर गली नंबर-5 निवासी साईं राम को इलाज के बाद मृत घोषित कर दिया गया था। इसके बाद परिवार ने उनके अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी और अंतिम यात्रा के लिए शव वाहन भी बुक कर लिया।
परिवार के मुताबिक, जब साईं राम को अंतिम यात्रा के लिए ले जाया जा रहा था, तभी श्यामपुर रेलवे फाटक के पास एंबुलेंस का पहिया सड़क के एक गहरे गड्ढे में चला गया। वाहन को जोरदार झटका लगा। इसी के बाद परिजनों ने साईं राम की आंखें खुली देखीं और उनमें सांस चलने के संकेत महसूस किए। इसके बाद अंतिम संस्कार रोक दिया गया और उन्हें वापस AIIMS ऋषिकेश ले जाया गया।
क्या है पूरा मामला?
साईं राम ऋषिकेश के गीता नगर, गली नंबर-5 के निवासी बताए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनकी तबीयत खराब थी और उनका इलाज चल रहा था। परिवार की ओर से बताया गया कि उनकी स्थिति गंभीर थी और उन्हें अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया।
मृत घोषित किए जाने के बाद परिवार ने अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दीं। अंतिम यात्रा के लिए मुक्तिधाम सेवा समिति से शव वाहन भी बुक कराया गया। यानी परिवार उस समय पूरी तरह अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के लिए तैयार था।
अंतिम यात्रा के दौरान अचानक क्या हुआ?
परिजन साईं राम को लेकर अस्पताल से घर की ओर जा रहे थे। रास्ते में एंबुलेंस श्यामपुर रेलवे फाटक के पास पहुंची। इसी दौरान सड़क के एक गहरे गड्ढे में वाहन का पहिया चला गया और एंबुलेंस को तेज झटका लगा।
परिजनों के मुताबिक, इस झटके के बाद उनका ध्यान साईं राम की ओर गया। उन्होंने उनकी आंखें खुली देखीं और सांस चलने के संकेत महसूस किए। परिवार के लिए यह बेहद चौंकाने वाला क्षण था, क्योंकि कुछ समय पहले ही उन्हें मृत घोषित किया जा चुका था।
मुक्तिधाम सेवा समिति से जुड़े समाजसेवी पंकज गुप्ता ने बताया कि परिवार की ओर से अंतिम यात्रा के लिए वाहन बुक कराया गया था। बाद में साईं राम के बेटे ने फोन कर वाहन की बुकिंग रद्द करने को कहा और बताया कि उनके पिता में दोबारा जीवन के संकेत दिखाई दिए हैं।
परिवार ने तुरंत अंतिम संस्कार रोका
साईं राम की आंखें खुलने और सांस चलने के संकेत मिलने के बाद परिवार ने अंतिम संस्कार का फैसला रोक दिया। उन्हें दोबारा इलाज के लिए AIIMS ऋषिकेश ले जाया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, वहां उन्हें फिर से भर्ती किया गया।
AIIMS ऋषिकेश के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. श्रीलाय मोहंती ने भी बताया कि जिस अस्पताल में साईं राम का इलाज चल रहा था, वहां उन्हें मृत घोषित किया गया था और बाद में जीवन के संकेत मिलने पर उन्हें दोबारा AIIMS ऋषिकेश में भर्ती कराया गया। 1
डॉक्टरों ने किस वजह से मृत घोषित किया था?
इस मामले में उपलब्ध जानकारी के अनुसार साईं राम की तबीयत पहले से गंभीर थी। परिजनों की ओर से बताया गया कि उन्हें किडनी फेल होने की समस्या और दो बार हार्ट अटैक आने की जानकारी दी गई थी। इन्हीं गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के बीच उन्हें मृत घोषित किया गया था। 2
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि मृत्यु की घोषणा के समय कौन-कौन से मेडिकल पैरामीटर देखे गए थे, कितनी देर तक उनका परीक्षण किया गया था और मेडिकल रिकॉर्ड में मृत्यु का कारण किस तरह दर्ज किया गया। इन सवालों का जवाब विस्तृत मेडिकल रिकॉर्ड या अस्पताल की आधिकारिक रिपोर्ट से ही मिल सकता है।
क्या गड्ढे के झटके से ही सांसें वापस आईं?
इस सवाल का अभी कोई प्रमाणित चिकित्सकीय जवाब उपलब्ध नहीं है। परिवार और स्थानीय लोगों की ओर से यह घटनाक्रम बताया गया है कि एंबुलेंस को गड्ढे में जोरदार झटका लगा और उसके बाद साईं राम में जीवन के संकेत दिखाई दिए। लेकिन इससे यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि सड़क के झटके ने उन्हें चिकित्सकीय रूप से जीवित कर दिया।
उपलब्ध रिपोर्टों में भी इस बात की पुष्टि नहीं है कि झटका ही सांस वापस आने का कारण था। यह केवल घटनाओं का क्रम है—पहले उन्हें मृत घोषित किया गया, फिर अंतिम यात्रा के दौरान जीवन के संकेत दिखाई दिए और उसके बाद उन्हें दोबारा अस्पताल ले जाया गया। इस घटनाक्रम की चिकित्सकीय व्याख्या के लिए मेडिकल रिकॉर्ड और डॉक्टरों की विस्तृत जांच जरूरी होगी। 3
AIIMS ने क्या बताया?
AIIMS ऋषिकेश के PRO डॉ. श्रीलाय मोहंती के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस अस्पताल में साईं राम का इलाज चल रहा था, वहां डॉक्टरों ने उन्हें सभी अंगों के फेल होने की बात कहते हुए मृत घोषित किया था। बाद में जब उनमें सांस चलने के संकेत मिले तो उन्हें वापस AIIMS ऋषिकेश में भर्ती कराया गया। 4
यह बयान इस मामले में महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे यह पुष्टि होती है कि साईं राम को दोबारा अस्पताल में भर्ती किया गया। हालांकि, उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी में यह विस्तृत रूप से सामने नहीं आया है कि उनकी दोबारा जांच में कौन-कौन से Vital Signs दर्ज हुए, ECG या अन्य जांचों में क्या पाया गया और उनकी उस समय की चिकित्सकीय स्थिति क्या थी।
अंतिम संस्कार की तैयारी पूरी हो चुकी थी
मामले का सबसे भावुक पहलू यह है कि परिवार ने साईं राम की मृत्यु मानकर अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी थी। अंतिम यात्रा के लिए वाहन की व्यवस्था की जा चुकी थी। शव को घर ले जाया जा रहा था, ताकि आगे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
इसी यात्रा के दौरान जीवन के संकेत दिखाई देने की बात सामने आने के बाद परिवार ने पूरी प्रक्रिया रोक दी और उन्हें वापस अस्पताल पहुंचाया। मुक्तिधाम सेवा समिति ने भी परिवार की सूचना के बाद पहले से की गई वाहन बुकिंग रद्द कर दी।
श्यामपुर रेलवे फाटक के पास सड़क के गड्ढे का जिक्र क्यों हो रहा?
इस घटना में सड़क की खराब स्थिति भी चर्चा का विषय बन गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक श्यामपुर रेलवे फाटक के पास एंबुलेंस का पहिया गहरे गड्ढे में जाने से वाहन को जोरदार झटका लगा था। इसी घटना के बाद साईं राम में जीवन के संकेत दिखने की बात परिवार ने बताई।
लेकिन सड़क के गड्ढे और साईं राम की स्थिति के बीच किसी चिकित्सकीय कारण-परिणाम संबंध की अभी पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे खबर में “गड्ढे के झटके के बाद सांसें चलने लगीं” के रूप में रिपोर्ट करना उचित है, जबकि “गड्ढे ने जान बचा दी” कहना अभी निष्कर्षात्मक होगा।
क्या यह मेडिकल लापरवाही का मामला है?
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे सीधे Medical Negligence कहना उचित नहीं होगा। किसी व्यक्ति को मृत घोषित करने के लिए अस्पताल में क्या जांच की गई, उस समय उनकी Heart Activity और Breathing की क्या स्थिति थी, Death Declaration किस डॉक्टर ने और किन Medical Criteria के आधार पर किया—इन सभी सवालों के जवाब जरूरी होंगे।
इसी तरह, बाद में जीवन के संकेत दिखाई देने का कारण भी Medical Evaluation के बिना तय नहीं किया जा सकता। उपलब्ध रिपोर्टों में किसी जांच समिति या आधिकारिक जांच के आदेश की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस स्तर पर डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा।
परिवार ने क्या किया?
परिजनों ने जैसे ही साईं राम में जीवन के संकेत महसूस किए, अंतिम संस्कार रोक दिया और उन्हें वापस AIIMS ऋषिकेश पहुंचाया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्हें वहां दोबारा भर्ती किया गया और उपचार शुरू किया गया।
परिवार के लिए यह स्थिति इसलिए भी असाधारण थी क्योंकि कुछ समय पहले ही वे अंतिम संस्कार की तैयारी कर चुके थे।
अभी सबसे बड़ा सवाल क्या है?
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह नहीं है कि “गड्ढे से मुर्दा जिंदा कैसे हो गया”, बल्कि यह है कि मृत्यु घोषित किए जाने के बाद व्यक्ति में जीवन के संकेत कैसे और किन परिस्थितियों में दोबारा दिखाई दिए?
इसका जवाब तभी विश्वसनीय रूप से मिल सकता है जब अस्पताल का Medical Record, Death Declaration की प्रक्रिया, Vital Signs, ECG/अन्य जांच और दोबारा अस्पताल पहुंचने के बाद की Medical Assessment सामने आए। फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी में इन सभी विवरणों का पूरा रिकॉर्ड सामने नहीं आया है।
फिलहाल साईं राम का क्या हुआ?
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार साईं राम को दोबारा AIIMS ऋषिकेश में भर्ती कराया गया है। उनकी सांस चलने और जीवन के संकेत मिलने की बात परिवार तथा स्थानीय समिति की ओर से बताई गई है और AIIMS PRO ने भी दोबारा भर्ती किए जाने की पुष्टि की है।
हालांकि, उनकी वर्तमान Medical Condition, Oxygen Level, Consciousness, Treatment Plan या आगे की स्थिति के बारे में कोई विस्तृत आधिकारिक Medical Update सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन पहलुओं पर कोई अनुमान लगाना उचित नहीं होगा। 5
घटना की पूरी Timeline
| क्रम |
घटना |
| 1 |
साईं राम की तबीयत खराब थी और उनका इलाज चल रहा था। |
| 2 |
परिजनों के मुताबिक उन्हें गंभीर स्वास्थ्य स्थिति के बीच मृत घोषित किया गया। |
| 3 |
परिवार ने अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू की। |
| 4 |
मुक्तिधाम सेवा समिति से अंतिम यात्रा के लिए वाहन बुक किया गया। |
| 5 |
अस्पताल से शव को घर ले जाया जा रहा था। |
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श्यामपुर रेलवे फाटक के पास एंबुलेंस का पहिया गहरे गड्ढे में गया और जोरदार झटका लगा। |
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परिजनों के मुताबिक साईं राम की आंखें खुलीं और सांस चलने के संकेत दिखाई दिए। |
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अंतिम संस्कार रोक दिया गया और उन्हें वापस AIIMS ऋषिकेश ले जाया गया। |
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AIIMS के PRO ने दोबारा भर्ती किए जाने की पुष्टि की। |
ऋषिकेश का यह मामला निश्चित तौर पर असामान्य है, लेकिन इसे “मुर्दा जिंदा हो गया” जैसे निष्कर्ष के साथ पेश करने के बजाय घटनाक्रम और उपलब्ध मेडिकल जानकारी के आधार पर समझना जरूरी है। साईं राम को मृत घोषित किया गया था, अंतिम संस्कार की तैयारी हुई, रास्ते में जीवन के संकेत दिखाई देने की बात सामने आई और उन्हें दोबारा AIIMS ऋषिकेश में भर्ती कराया गया—यह तथ्य उपलब्ध रिपोर्टों और AIIMS PRO के बयान से समर्थित है। लेकिन उनकी सांसें लौटने का कारण क्या था और मृत्यु की घोषणा किस चिकित्सकीय आधार पर हुई थी, इन सवालों का आधिकारिक विस्तृत जवाब अभी सार्वजनिक नहीं है।