रीवा | मानव तस्करी/बंधक बनाए जाने के आरोप की जांचरीवा

काम दिलाने के नाम पर महाराष्ट्र ले जाए गए 10 लोग रेस्क्यू: सतारा में बंधक बनाए रखने का आरोप, इनमें 3 नाबालिग; रीवा कलेक्टर को फोन कर मांगी थी मदद

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रीवा के सोहागी बड़ागांव से महाराष्ट्र ले जाए गए 10 लोगों के रेस्क्यू से जुड़ी प्रतीकात्मक तस्वीर
रीवा के बड़ागांव से महाराष्ट्र ले जाए गए 10 लोगों को सतारा जिले से रेस्क्यू किया गया।साभार: The City Express

मुख्य बिंदुQuick Read

  • बड़ागांव से 10 लोगों को काम दिलाने के नाम पर महाराष्ट्र ले जाया गया था।
  • सतारा जिले की खंडाला तहसील में बंधक बनाए रखने का आरोप।
  • बाहर जाने और दूसरे लोगों को फोन करने से रोकने की बात सामने आई।
  • लोगों ने चुपके से रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी को फोन कर मदद मांगी।

रीवा जिले के सोहागी थाना क्षेत्र के बड़ागांव से काम दिलाने के नाम पर महाराष्ट्र ले जाए गए 10 लोगों को सतारा जिले से रेस्क्यू किया गया है। आरोप है कि सतारा जिले की खंडाला तहसील में इन लोगों को बंधक जैसी स्थिति में रखा गया था और उन्हें बाहर जाने के साथ-साथ दूसरे लोगों से फोन पर संपर्क करने से भी रोका जा रहा था।

मामले की जानकारी मिलने के बाद रीवा प्रशासन ने पुलिस के सहयोग से टीम महाराष्ट्र भेजी। टीम ने सतारा जिले में कार्रवाई कर सभी 10 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। फिलहाल उन्हें सतारा थाने में सुरक्षित रखा गया है और मामले की आगे जांच की जा रही है।

किसी तरह कलेक्टर को किया फोन

जानकारी के मुताबिक, महाराष्ट्र ले जाए गए लोगों ने किसी तरह रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी से संपर्क किया। उन्होंने फोन पर अपनी स्थिति बताते हुए मदद की गुहार लगाई। इसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर पुलिस टीम को महाराष्ट्र भेजा गया।

पुलिस टीम सतारा जिले पहुंची और वहां से सभी 10 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया। सोहागी थाना प्रभारी कमलेश साहू के मुताबिक, सभी लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है और मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।

बाहर निकलने और फोन करने से रोकने का आरोप

रेस्क्यू किए गए लोगों की ओर से आरोप लगाया गया है कि उन्हें जिस स्थान पर रखा गया था, वहां से बाहर जाने की अनुमति नहीं थी। इसके अलावा किसी अन्य व्यक्ति को फोन करने से भी रोका जा रहा था। इसी वजह से उन्होंने किसी तरह रीवा प्रशासन से संपर्क किया।

हालांकि, उन्हें वहां किस परिस्थिति में रखा गया था, काम की क्या शर्तें थीं, मजदूरी तय हुई थी या नहीं और उन्हें वास्तव में बाहर जाने से किसने रोका—इन सभी बिंदुओं की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

रेस्क्यू किए गए लोगों में 3 नाबालिग

रेस्क्यू किए गए 10 लोगों में विनीत साहू, विनोद साहू (22), अनेक साहू, अमन तिवारी (16), विनय आदिवासी (22), गीत साहू (22), अमित आदिवासी (16), सत्यवान आदिवासी (16), सुनीता साहू और दीपक साहू शामिल हैं।

इनमें अमन तिवारी, अमित आदिवासी और सत्यवान आदिवासी की उम्र 18 वर्ष से कम बताई गई है। नाबालिगों की मौजूदगी के कारण पुलिस के लिए मामले में यह भी जांच का महत्वपूर्ण बिंदु होगा कि उन्हें किस आधार पर काम के लिए दूसरे राज्य ले जाया गया था और उनके साथ वहां क्या व्यवहार किया गया।

ठेकेदार बृजेश पाल की भूमिका जांच के दायरे में

पुलिस के मुताबिक, इन लोगों को बृजेश पाल नाम का ठेकेदार महाराष्ट्र लेकर गया था। अब उसकी भूमिका भी जांच के दायरे में है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि लोगों को किस काम के लिए महाराष्ट्र ले जाया गया था, उन्हें कहां रखा गया, काम और मजदूरी को लेकर क्या समझौता हुआ था और वहां उनकी आवाजाही पर रोक क्यों लगाई गई।

जांच के दौरान पुलिस लोगों के बयान, उनके महाराष्ट्र पहुंचने की परिस्थितियों, ठेकेदार से संपर्क और वहां उनके रहने-कार्य से जुड़े रिकॉर्ड की भी पड़ताल कर सकती है। यदि जांच में किसी तरह का अपराध सामने आता है तो उसी आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

क्या यह मानव तस्करी या बंधुआ मजदूरी का मामला है?

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे सीधे तौर पर मानव तस्करी या बंधुआ मजदूरी का मामला घोषित करना जल्दबाजी होगी। लोगों को कथित तौर पर बंधक बनाए रखने, उनकी आवाजाही रोकने और काम के नाम पर दूसरे राज्य ले जाने जैसे आरोपों की पुलिस जांच कर रही है।

मामले की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इसमें कौन-कौन से कानूनी प्रावधान लागू होते हैं और आरोपों के पीछे वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं।

10 लोगों की सुरक्षित वापसी अब प्राथमिकता

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि महाराष्ट्र में फंसे सभी 10 लोगों को रेस्क्यू कर लिया गया है और वे सुरक्षित बताए गए हैं। प्रशासन और पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटा रहे हैं। खास तौर पर नाबालिगों को दूसरे राज्य ले जाने और वहां उनकी स्थिति को लेकर जांच महत्वपूर्ण रहेगी।

पुलिस की जांच से यह भी साफ होगा कि लोगों को रोजगार के नाम पर किन परिस्थितियों में महाराष्ट्र ले जाया गया और क्या उनके साथ उनके मूल समझौते के मुताबिक व्यवहार किया गया था।

संपादकीय लेखक एवं रिपोर्टर
सत्यापित रिपोर्टर
विशेष संवाददाता

मध्य प्रदेश, विंध्य, बुंदेलखंड और राष्ट्रीय घटनाक्रमों पर द सिटी एक्सप्रेस की विशेष रिपोर्टिंग टीम।

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