✍️ राजीव अग्निहोत्री की रिपोर्ट...•Published On 9th Sept, 2026 @ 11:15 AM
डॉ. स्वाति तिवारी सहित अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई, कोर्ट ने कहा- प्रमोशन के लिए विचार कर्मचारी का अधिकार; इंद्रा साहनी के 50% आरक्षण की सीमा को सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से पार नहीं किया जा सकता, अगली सुनवाई 1 दिसंबर को
जबलपुर। मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन में आरक्षण को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई के बीच हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों को प्रमोशन के लिए विचार किए जाने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता, लेकिन आरक्षण की 50 प्रतिशत निर्धारित सीमा का भी सख्ती से पालन करना होगा।
कोर्ट ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि राज्य के किसी भी विभाग में आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को प्रमोशन देते समय आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पार न हो। यह व्यवस्था हाईकोर्ट में लंबित याचिकाओं के निर्णय या सुप्रीम कोर्ट में लंबित संबंधित मामलों में फैसला आने तक लागू रहेगी।
कोर्ट ने क्या कहा?
डिवीजन बेंच ने कहा कि किसी कर्मचारी का प्रमोशन के लिए विचार किया जाना उसका अधिकार है। हालांकि, इसके साथ आरक्षण की संवैधानिक सीमा का पालन करना भी जरूरी है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ मामले में निर्धारित 50 प्रतिशत आरक्षण की ऊपरी सीमा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस सीमा को सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से पार नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक, मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से निगरानी करनी होगी कि किसी भी विभाग में आरक्षित वर्ग के 50 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों को प्रमोशन देकर आरक्षण की निर्धारित सीमा का उल्लंघन न हो।
डॉ. स्वाति तिवारी सहित अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई
मामले में भोपाल की वेटरनरी सर्जन डॉ. स्वाति तिवारी सहित अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से याचिकाएं दायर की गई हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज शर्मा ने कोर्ट के सामने तर्क रखा कि राज्य सरकार की ओर से लगातार प्रमोशन किए जा रहे हैं।
उनका कहना था कि एक बार किसी कर्मचारी को प्रमोशन दिए जाने के बाद बाद में उसे वापस पुराने पद पर भेजना यानी रिवर्ट करना व्यावहारिक रूप से मुश्किल हो सकता है। इसी संदर्भ में उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के पुराने R.B. Rai मामले का भी उल्लेख किया।
R.B. Rai मामले का भी आया हवाला
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि R.B. Rai मामले में अदालत द्वारा कानून की स्थिति स्पष्ट किए जाने के बावजूद अब तक प्रमोट किए गए कर्मचारियों को रिवर्ट नहीं किया गया है। याचिकाकर्ता पक्ष ने इसी वजह से मौजूदा प्रमोशन प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई।
वहीं राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के 20 अगस्त 2026 के एक आदेश का हवाला दिया। इस आदेश के मुताबिक R.B. Rai और Jarnail Singh से जुड़े मामलों को सुनवाई के लिए उपयुक्त पीठ के सामने तीन महीने के भीतर सूचीबद्ध करने की बात सामने आई है।
50% आरक्षण की सीमा क्यों महत्वपूर्ण?
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी फैसले का उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि उसमें निर्धारित आरक्षण की 50 प्रतिशत ऊपरी सीमा अभी भी लागू कानूनी सिद्धांत है और इसे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से पार नहीं किया जा सकता।
मौजूदा मामले में हाईकोर्ट ने इसी सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए कहा है कि प्रमोशन के लिए कर्मचारियों पर विचार किया जा सकता है, लेकिन आरक्षण की सीमा का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।
क्या हाईकोर्ट ने प्रमोशन पर पूरी रोक लगाई है?
नहीं। हाईकोर्ट के मौजूदा आदेश का अर्थ सभी प्रमोशन पर पूर्ण रोक लगाना नहीं है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि प्रमोशन के लिए विचार करना कर्मचारी का अधिकार है। साथ ही राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रमोशन की प्रक्रिया में आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा पार न हो।
इसलिए मौजूदा आदेश को “प्रमोशन पर पूर्ण रोक” के रूप में पढ़ना सही नहीं होगा। यह मुख्य रूप से आरक्षण की सीमा और प्रमोशन प्रक्रिया के बीच संतुलन से जुड़ा निर्देश है।
मुख्य सचिव की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय
इस आदेश का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हाईकोर्ट ने निगरानी की जिम्मेदारी सीधे राज्य के मुख्य सचिव को दी है। मुख्य सचिव को यह व्यक्तिगत रूप से देखना होगा कि किसी भी विभाग में आरक्षित वर्ग के 50 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों को प्रमोशन देकर निर्धारित सीमा का उल्लंघन न हो।
यह निर्देश तब तक प्रभावी रहेगा, जब तक संबंधित याचिकाओं पर हाईकोर्ट का निर्णय नहीं हो जाता या सुप्रीम कोर्ट में लंबित R.B. Rai और Jarnail Singh से जुड़े मामलों में फैसला नहीं आ जाता।
राज्य सरकार की ओर से कौन हुए पेश?
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और अतिरिक्त महाधिवक्ता जान्हवी पंडित ने सरकार का पक्ष रखा। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज शर्मा ने पैरवी की।
अब अगली सुनवाई कब?
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 1 दिसंबर 2026 की तारीख तय की है। तब तक राज्य सरकार को प्रमोशन की प्रक्रिया में 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा के पालन को लेकर कोर्ट के निर्देशों का ध्यान रखना होगा।
इस मामले का अंतिम असर मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की प्रमोशन व्यवस्था और आरक्षण नीति पर पड़ सकता है। हालांकि, अंतिम कानूनी स्थिति हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।